famous food | famous recipe of rajasthan | 10 रुपए में चार मिनी कचौरी, महीनों नहीं होती खराब, देश-विदेश तक पहुंच रहा बीकानेर का स्वाद

famous food | famous recipe of rajasthan | 10 रुपए में चार मिनी कचौरी, महीनों नहीं होती खराब, देश-विदेश तक पहुंच रहा बीकानेर का स्वाद


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Famous Food Of Bikaner : राजस्थान के बीकानेर में मिलने वाली मिनी कचौरी अपनी कम कीमत और बेहतरीन स्वाद के लिए प्रसिद्ध है. बड़ा बाजार में 10 रुपए में चार मिलने वाली ये कचौरी एक महीने तक खराब नहीं होती और इनकी देश-विदेश में मांग है. इन कचौरियों को बनाने में बेसन, दाल का मसाला और कई तरह के सूखे मसालों का इस्तेमाल किया जाता है. इनमें साबुत धनिया, अजवाइन, पान मेथी और मैदा भी मिलाया जाता है. सभी सामग्री को तय अनुपात में मिलाकर मसाला तैयार किया जाता है.

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बीकानेर. राजस्थान का बीकानेर शहर अपने खान-पान और पारंपरिक स्वाद के लिए देशभर में खास पहचान रखता है. यहां की भुजिया, पापड़ और मिठाइयों के साथ कचौरी का स्वाद भी लोगों को खूब पसंद आता है. शहर में कई तरह की कचौरी मिलती हैं, लेकिन यहां एक ऐसी मिनी कचौरी भी है, जिसकी कीमत सुनकर आप हैरान रह जाएंगे.

आमतौर पर जहां बाजार में एक कचौरी 10 से 20 रुपए तक में मिलती है, वहीं बीकानेर के बड़ा बाजार में 10 रुपए में चार कचौरी मिल जाती हैं. खास बात यह है कि स्वाद से भरपूर ये छोटी कचौरियां करीब एक महीने तक खराब नहीं होतीं. यही वजह है कि स्थानीय लोगों के साथ दूर-दराज के लोग भी इन्हें खरीदने पहुंचते हैं.

मसालों का ऐसा मेल है कि ऐसा कोई नहीं बना पाता है
बड़ा बाजार स्थित पुत्र बृजा महाराज की दुकान पर बनने वाली ये बेसन की मिनी कचौरियां अपने अलग स्वाद और कम कीमत के कारण लोगों के बीच लोकप्रिय हैं. आकार में छोटी होने के बावजूद इनमें मसालों का ऐसा मेल होता है कि खाने वाला इनका स्वाद भूल नहीं पाता. पुराने शहर के लोगों के बीच इन कचौरियों की खास पहचान है. कई लोग इन्हें नाश्ते के रूप में खाते हैं तो कुछ लोग घर और रिश्तेदारों के लिए भी लेकर जाते हैं.

दुकानदार ने बता दिया यूनिक ट्रिक
दुकानदार श्रीलाल पुरोहित बताते हैं कि इन कचौरियों को बनाने में बेसन, दाल का मसाला और कई तरह के सूखे मसालों का इस्तेमाल किया जाता है. इनमें साबुत धनिया, अजवाइन, पान मेथी और मैदा भी मिलाया जाता है. सभी सामग्री को तय अनुपात में मिलाकर मसाला तैयार किया जाता है. इसके बाद छोटी-छोटी कचौरियां बनाई जाती हैं. इनका आकार लगभग आधे से एक इंच तक होता है. छोटी होने के कारण इन्हें आसानी से खाया जा सकता है.

आम मसालों के बजाय इन मसालों का यूज किया जाता है
उन्होंने बताया कि इन मिनी कचौरियों की सबसे खास बात इनका लंबे समय तक सुरक्षित रहना है. दुकानदार के अनुसार, इनमें सूखे मसालों का इस्तेमाल किया जाता है और सही तरीके से रखने पर ये करीब एक महीने तक खराब नहीं होतीं. इसी वजह से लोग इन्हें सफर के दौरान साथ ले जाते हैं और दूसरे शहरों में रहने वाले अपने परिचितों के लिए भी खरीदते हैं. इनकी मांग देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों तक भी है.

क्या है कचौरियों की कीमत
पुरोहित ने बताया कि कीमत की बात करें तो बाजार में ये कचौरियां करीब 200 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बेची जाती हैं. वहीं, दुकान पर 10 रुपए में चार कचौरियां मिलती हैं. दुकानदार के मुताबिक, रोजाना करीब 15 से 20 किलो मिनी कचौरियां तैयार की जाती हैं. छोटी-सी कचौरी में पारंपरिक मसालों का स्वाद और कम कीमत का मेल इसे खास बनाता है.



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