कौड़ियों के भाव विला खरीद फंसे IAS शिखर अग्रवाल, दोषी हुए तो कितनी होगी सजा?
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ias shikhar agrawal पर राजस्थान में अलग-अलग जगह 40 विला कौड़ियों के भाव में खरीदने का आरोप है. सीएम ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-A के तहत उनके खिलाफ जांच को मंजूरी दे दी है. अगर वे दोषी साबित होते हैं तो उन्हें 3 से सात साल तक की सजा और भारी जुर्माना देना पड़ सकता है.
राजस्थान के सीनियर IAS शिखर अग्रवाल पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं. उनके खिलाफ मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने एंटी करप्शन ब्यूरो यानी ACB को जांच के लिए मंजूरी दे दी है. उन पर एक निजी कंपनी गोयल फैशंस से 40 विला लेकर बदले में कंपनी को विशेष छूट देकर फायदा पहुंचाने का आरोप है. सीनियर आईएएस के खिलाफ जांच के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-A के तहत मंजूरी ली गई है. दरअसल किसी भी सरकारी अधिकारी के खिलाफ उनके आधिकारिक कामों के से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों की प्राथमिक जांच के लिए इस धारा के तहत सरकार से अनुमति लेना जरूरी होता है.
आईएएस शिखर अग्रवाल पर अगर ये आरेाप साबित होते हैं तो उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सजा हो सकती है. उनके साथ निजी कंपनी गोयल फेंशस के जिम्मेदारों को भी जेल जाना पड़ सकता है. दरअसल भ्रष्टाचार के खिलाफ लागू इस कानून में 2018 में एक संशोधन किया गया था. इसके तहत रिश्वत लेने वाले के साथ-साथ रिश्वत देने वाले को भी अपराधी माना जाता है. आईएएस शिखर अग्रवाल का मामला बेशक रिश्वतखोरी से नहीं जुड़ा है, लेकिन ये पद के दुरुपयोग और कंपनी से विशेष फायदा देकर उसे लाभ पहुंचाने का आरोप है.
क्या है पूरा मामला?
राजस्थान के सीनियर आईएएस शिखर अग्रवाल पर आरोप है कि उनहोंने गोयल फैशंस कंपवनी के उदयपुर के बुझड़ा और अलवर के अजबगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट में कुल 40 विला खरीदे हैं. उन पर बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर ये संपत्तियां खरीदने का आरोप है. इनमें उदयपुर में महज 15 लाख और अलवर के अजबगढ़ में महज 16.5 लाख प्रति विला के हिसाब से खरीदे गए हैं.
इनमें से 20 विला की रजिस्ट्री उसी दिन कराई गई थी, जिस दिन कंपनी को विशेष आर्थिक पैकेज जारी किया गया था. यह तारीख 27 मार्च 2026 थी. आईएएस शिखर अग्रवाल पर आरोप है कि उन्होंने गोयल फैशंस के निदेशकों से साथ मिलीभगत कर सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचा और अपने लाभ के बदले कंपनी को विशेष लाभ पहुंचाकर पद का दुरुपयोग किया.
क्या है भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 में लागू किया गया था. इस अधिनियम का उद्देश्य लोक सेवक यानी अधिकारी या जनप्रतिनिधियों के बीच भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाना था. इस अधिनियम के लिए संथानम समिति की ओर से सिफारिश की गई थी, जिसने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1947 की जगह ली थी. 2018 में इसमें संशोधन कर रिश्वत लेने के साथ रिश्वत देना भी संज्ञेय अपराध माना गया है.
दोषी साबित होने पर क्या होगी सजा?
- भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7: जब कोई सरकारी कर्मचारी अपने कानूनी वेतन के अलावा किसी भी काम करने को एवज में रिश्वत या लाभ लेता है तो उसे इस धारा के तहत दोषी माना जाता है. ऐसा करने पर कम से कम 3 साल तक की सजा का प्रावधान है. इस मामले में अधिकतम 7 साल तक की सजा दी जाती है, साथ में जुर्माना भी लगाया जा सकता है. इसी में धारा 7A के तहत अगर अधिकारी पर दबाव डालने के लिए कोई बिचौलिया ऐसा करता है तो उसे भी इतनी सजा भोगनी पड़ सकती है.
- भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 8: साल 2018 में संशोधन कर इस धारा को जोड़ा गया था. इसके तहत किसी भी सरकारी कर्मचारी को अनुचित लाभ या रिश्वत देना गंभीर अपराध है. इस मामले में अधिकतम 7 साल तक की सजा या जुर्माना देानों हो सकता है. इस मामले में उन लोगों को छूट मिलती है, जिन पर रिश्वत के लिए दबाव डाला गया. हालांकि उन्हें सात दिन के अंदर जांच एजेंसी से इसकी शिकायत करनी पड़ती है.
- भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 11: यह धारा तब लगती है जब कोई लोकसेवक अपने आधिकारिक प्रभाव क्षेत्र में आने वाले किसी व्यक्ति से बिना पैसे दिए या बेहद कम कीमत पर कोई कीमती वस्तु लेता है. ऐसे मामले में छह माह से लेकर अधिकतम 5 साल तक की सजा का प्रावधान है.
- भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 12: इस धारा के तहत अगर कोई भी व्यक्ति किसी भ्रष्टाचार के अपराध में सहायता करता है. उसे 3 साल तक की जेल और 7 साल तक जुर्माना देना पड़ सकता है.
बार-बार अपराध पर 10 साल तक की सजा
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 के तहत सरकारी संपत्ति का गबन करना या आय से अधिक संपत्ति के मामले आते हैं.ऐसे मामलों में 4 से 10 साल तक की कठोर जेल या जुर्माने की सजा मिलती है. यदि कोई व्यक्ति इस अधिनियम के तहत एक बार दोषी पाए जाने के बाद दोबारा वही अपराध करता है तो उसे 5 से 10 साल तक की अतिरिक्त जेल या जुर्माना देना पड़ सकता है.