Acharya Prashant: ‘लोग मेरे पास सीखने नहीं, कुछ छोड़ने आते हैं’ आचार्य प्रशांत ने लोगों की दुर्बलता पर और क्या क्या कहा, जानें

Acharya Prashant: ‘लोग मेरे पास सीखने नहीं, कुछ छोड़ने आते हैं’ आचार्य प्रशांत ने लोगों की दुर्बलता पर और क्या क्या कहा, जानें


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लोग मेरे पास सीखने नहीं, कुछ छोड़ने आते हैं: आचार्य प्रशांत के विचार

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Acharya Prashant: आचार्य प्रशांत ने हाल ही में लोगों की दुर्बलता और मानसिक स्थिति पर तीखा प्रहार किया है. उनका एक बयान काफी चर्चा में है जिसमें उन्होंने कहा है कि लोग उनके पास कुछ सीखने नहीं, बल्कि अपनी कमियों और बुराइयों को छोड़ने आते हैं. इस विशेष बातचीत में उन्होंने इंसान की कमजोरियों, मानसिक भम्र और उन्हें दूर करने के उपायों पर खुलकर बात की. जानिए आचार्य प्रशांत ने लोगों की दुर्बलताओं को लेकर और क्या-क्या महत्वपूर्ण बातें कहीं.

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Acharya Prashant: आचार्य प्रशांत अपनी शिक्षा और विचार की वजह से सोशल मीडिया पर काफी वायरल रहते हैं. वे हर छोटे-बड़े मुद्दे पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और लोगों को नई नई जानकारी देते हैं. न्यूज 18 के एंकर किशोर अजवाणी के कार्यक्रम ‘कहके रहेगा कहने वाला’ शो में उनसे सवाल किया गया कि लोग आपके पास क्या सीखने के लिए आते हैं तो वे कहते हैं कि लोग मेरे पास कुछ भी सीखने नहीं आते हैं, वे अपने पास जो चीज हैं उनको छोड़ने आते हैं. आइए जानते हैं किशोर अजवाणी के कार्यक्रम में आचार्य प्रशांत ने और क्या क्या कहा…

आचार्य प्रशांत कहते हैं कि पैदा होते ही आपकी जाति तय हो जाती है, धर्म तय हो जाता है. आप स्कूल जाते हैं, वहां पहले ही किसी ने आपके लिए स्लेबस तय कर रखा है. आप बड़े होकर क्या करेंगे, वो भी बताने के लिए इतनी सारी ताकतें हैं, जो लगातार आपके कान में चिल्ला रही हैं. आचार्य प्रशांत आगे कहते हैं कि आप 25 के हो गए हो तो ये करना है… इतना करना है. अब ये होना चाहिए… अब बच्चों को स्कूल में डाल दो… अब ये कमाओ.. घर ले लो.. इसकी ईएमआई दे दो. आप बूड़े हो जाए, बच्चों की शादी कर दो.

आचार्य प्रशांत कहते हैं कि सबको बता रखा है कि क्या करना है सिवाय एक चीज के कि तुमको जरूरत ही नहीं है कि तुमको कोई कुछ बताए. वो बच्चा बिचारा असहाय है, दुर्बल है. आप इतना सबकुछ पहले ही बता देते हो. तुम इस जाति के हो इसलिए श्रेष्ठ हो… तुम इस जाति के हो इसलिए अश्रेष्ठ हो. किशोर अजवाणी कहते हैं कि अगर इन भी चीज की जरूरत ही नहीं है तो लोग फिर आपके पास क्यों आएं. इस पर आचार्य प्रशांत कहते हैं कि मेरे पास लोग कुछ सीखने नहीं आते, वो कुछ छोड़ने आते हैं. जो उनको पहले से बता दिया गया है… उसका खंडन सुनने आते हैं.

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