पटना. दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट से जमानत रद्द होने और 1 दिसंबर तक आत्मसमर्पण करने का निर्देश मिलने के बाद मोकामा विधायक अनंत सिंह ने सोशल मीडिया पर लगातार कई पोस्ट साझा किए हैं. एक पोस्ट में उन्होंने लिखा- ‘हम न कल झुके थे, न आज झुकेंगे और न ही कभी अपने सिद्धांतों से समझौता करेंगे.’ वहीं, दूसरी पोस्ट में ‘गरीब गुरबों पर अत्याचार, नहीं सहेंगे छोटे सरकार’ का नारा दिया है. इससे पहले एक वीडियो साझा कर उन्होंने ‘जय जनता मालिक, जनसेवा सर्वोपरि’ लिखा था. इसके साथ ही अनंत सिंह ने अपनी विस्तृत पोस्ट में न्यायपालिका और संविधान पर भरोसा जताया है.
अनंत सिंह ने अपने पोस्ट में लिखा है कि मोकामा की जनता के मान-सम्मान, स्वाभिमान और हक की लड़ाई में उनकी आवाज हमेशा बुलंद रही है और आगे भी रहेगी. उन्होंने कहा कि आज जमानत रद्द हुई है, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है. उन्हें उम्मीद है कि जनता की अदालत में उन्हें न्याय मिलेगा और वह बरी होकर बाहर आएंगे. पोस्ट के अंत में उन्होंने समर्थकों के स्नेह और आशीर्वाद को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताया है.
‘गरीब गुरबों पर अत्याचार, नहीं सहेंगे छोटे सरकार’
अनंत सिंह की एक अन्य पोस्ट में लिखा है- ‘गरीब गुरबों पर अत्याचार, नहीं सहेंगे छोटे सरकार.’ इस पोस्ट के जरिए उन्होंने अपने समर्थकों के बीच प्रचलित ‘छोटे सरकार’ संबोधन का इस्तेमाल किया है. इससे पहले उन्होंने एक वीडियो साझा करते हुए ‘जय जनता मालिक, जनसेवा सर्वोपरि’ लिखा था. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उनकी इन पोस्ट को समर्थकों के बीच साझा किया जा रहा है.
अनंत सिंह ने सोशल मीडिया में अपना पोस्ट साझा किया.
1 दिसंबर तक सरेंडर करने का सुप्रीम कोर्ट का आदेश
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 30 अक्टूबर को दुलारचंद यादव हत्याकांड में अनंत सिंह की जमानत रद्द करते हुए उन्हें 1 दिसंबर 2026 तक आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है. न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने बिहार पुलिस को चार महीने के भीतर मामले की जांच पूरी करने को भी कहा है. पटना हाईकोर्ट ने 19 मार्च 2026 को अनंत सिंह को जमानत दी थी. इस आदेश को दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.
नीरज कुमार विवाद के बाद JDU से निष्कासन
इस घटनाक्रम से पहले अनंत सिंह का जेडीयू के साथ विवाद भी सुर्खियों में रहा. पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव में उन्होंने जेडीयू के आधिकारिक प्रत्याशी नीरज कुमार के खिलाफ प्रचार किया था और जन सुराज प्रत्याशी अनुज सिंह का समर्थन किया था. इसके बाद 24 अक्टूबर को जेडीयू ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था. पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधि बताया था. दरअसल, अनंत सिंह ने इस विवाद में नीरज कुमार पर उन्हें दुलारचंद यादव हत्याकांड में फंसाने का आरोप लगाया है. वहीं, जेडीयू नेता नीरज कुमार ने इस मामले में अपनी किसी भूमिका से इनकार किया है. उन्होंने कहा था कि दुलारचंद यादव के पोते की ओर से दाखिल याचिका से उनका कोई संबंध नहीं है.
बेटे अभिषेक का पोस्ट और न्याय का तराजू
इससे पहले अनंत सिंह के बेटे अभिषेक सिंह ने भी पोस्ट किया था. सत्ता के साथ रहिए तो सम्मान, सवाल उठाइए तो कानून का ज्ञान. साथ में न्याय के तराजू की फोटो लगाई थी. पिता-पुत्र दोनों के पोस्ट एक ही दिन में आने से यह साफ है कि अनंत खेमा इसे राजनीतिक लड़ाई के तौर पर पेश करना चाहता है, कानूनी लड़ाई के साथ-साथ.
मोकामा विधायक अनंत सिंह के बेटे अभिषेक सिंह का सोशल मीडिया पोस्ट.
अनंत सिंह सियासी संदेश क्या है?
अनंत सिंह के तीनों पोस्ट में तीन बातें अहम हैं. पहला, झुकेंगे नहीं. दूसरा, न्यायपालिका पर भरोसा है. तीसरा, जनता मालिक है. राजनीति के जानकार कहते हैं कि ऐसे पोस्ट से छोटे सरकार की छवि को फिर से आगे किया जा रहा है. गरीब गुरबा शब्द का इस्तेमाल कर वे अपने कोर वोट बैंक मोकामा के गरीब, पिछड़े और सवर्ण गरीबों को संदेश दे रहे हैं. वहीं, जेडीयू से निष्कासन के बाद अनंत सिंह अब मोकामा में सहानुभूति और संघर्ष दोनों का नैरेटिव बना रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने तो पुलिस को चार महीने में जांच पूरी करने को कहा है, लेकिन अनंत सिंह खेमे ने लड़ाई को अभी से जनता की अदालत में शिफ्ट कर दिया है.