थेनी जेलब्रेक: सीएम विजय का चला हंटर, जेल सुपरींटेंडेंट सस्पेंड
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थेनी जिले की एक सब-जेल में विचाराधीन कैदियों ने मेडिकल इमरजेंसी का बहाना बनाकर बड़ा कांड किया था. 17 कैदी जेल से फरार हो गए. मामले की जानकारी मिलने के बाद सघन तलाशी अभियान चलाकर सभी कैदियों को पकड़ लिया गया था. अब इस मामले में एक्शन लिया गया है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलापति विजय थेनी जेलब्रेक मामले में एक्शन लिया है. (फाइल फोटो)
चेन्नई. तमिलनाडु के थेनी जिले की सब-जेल से 17 विचाराधीन कैदियों के फरार होने के मामले में राज्य सरकार ने जेल अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है. मुख्यमंत्री विजय ने जेल अधीक्षक नागेश्वरन को निलंबित करने के साथ ही कई अधिकारियों के तबादले के आदेश दिए हैं. उन्होंने राज्य की सभी जेलों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और निगरानी बढ़ाने के भी निर्देश दिए हैं.
सरकारी कार्रवाई के तहत थेनी जेल के अधीक्षक नागेश्वरन को 30 अक्टूबर से अगले आदेश तक निलंबित कर दिया गया है. वहीं, मदुरै केंद्रीय जेल के अधीक्षक आर कृष्णराज का तबादला कर उन्हें सलेम केंद्रीय जेल का अधीक्षक नियुक्त किया गया है. मुख्यमंत्री विजय ने जेल प्रशासन को राज्य की सभी जेलों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने, निगरानी तंत्र मजबूत करने और अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने स्पष्ट किया है कि ड्यूटी में लापरवाही बरतने या जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
यह कार्रवाई 26 अक्टूबर को थेनी जिले की थेक्कमपट्टी उप-जेल से 17 विचाराधीन कैदियों के फरार होने की घटना के बाद की गई है. आरोप है कि कैदियों ने जेल से भागने के लिए मेडिकल इमरजेंसी का नाटक किया. इसके बाद जब जेल कर्मचारी उनकी मदद के लिए पहुंचे तो कैदियों ने उन्हें काबू कर लिया और जेल की चाबियां लेकर फरार हो गए. घटना के बाद पुलिस और जेल प्रशासन ने व्यापक तलाशी अभियान चलाया. सभी 17 फरार कैदियों को बाद में गिरफ्तार कर लिया गया.
इस घटना ने तमिलनाडु की जेलों में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे. शुरुआती जांच में ड्यूटी के दौरान कथित लापरवाही सामने आने के बाद 9 जेल कर्मचारियों को निलंबित किया गया था. राज्य सरकार ने जेलों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है. इसके तहत निगरानी बढ़ाने, सुरक्षा ढांचे में सुधार करने और जेल प्रशासन की प्रक्रियागत खामियों को दूर करने के उपाय किए जा रहे हैं. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाए. सरकार का कहना है कि जेलों में सुरक्षा सुनिश्चित करना और कैदियों की निगरानी प्रभावी बनाना प्रशासन की प्राथमिकता है.
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