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Good News : यूपी में अब एक्सप्रेसवे का सफर सिर्फ शहरों को जोड़ने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि किसानों की फसल को बाजार और कारोबार को नए ठिकानों तक पहुंचाने का रास्ता भी आसान होगा. प्रदेश में 322 किलोमीटर लंबे चार नए लिंक एक्सप्रेसवे बनाए जाएंगे.
यूपी में बनेंगे नए एक्सप्रेसवे. (एआई तस्वीर)
लखनऊ: यूपी में अब एक शहर से दूसरे शहर पहुंचना ही नहीं, बल्कि खेतों से मंडियों और फैक्ट्रियों से बाजार तक सामान पहुंचाना भी आसान होने वाला है. प्रदेश में बनने वाले चार नए लिंक एक्सप्रेसवे राज्य के मौजूदा एक्सप्रेसवे नेटवर्क को आपस में जोड़ेंगे. इससे आम लोगों का सफर आसान होगा, किसानों को अपनी उपज बड़े बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी और उद्योगों को भी नई रफ्तार मिलेगी.
करीब 322 किलोमीटर लंबे इन चारों एक्सप्रेसवे के निर्माण पर लगभग 17,542 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से प्रदेश में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा. इसका फायदा केवल बड़े कारोबारियों को ही नहीं, बल्कि किसानों, छोटे व्यापारियों और रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं को भी मिल सकता है.
खेत से बाजार तक पहुंचेगी फसल, किसानों को मिलेगा फायदा
अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार के मुताबिक, इन एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा लाभ किसानों और कृषि उत्पादों के कारोबार को मिलेगा. अभी कई इलाकों में दूध, फल और सब्जियों को मंडियों या दूसरे शहरों तक पहुंचाने में काफी समय लगता है. लंबा सफर और देरी होने से जल्दी खराब होने वाले उत्पादों को नुकसान भी उठाना पड़ता है. नए लिंक एक्सप्रेसवे बनने से इन उत्पादों की ढुलाई तेज और आसान होगी. इससे किसानों को बड़े बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी. समय पर फसल पहुंचने से नुकसान कम करने और कारोबार के नए अवसर मिलने की उम्मीद है.
कौन सा एक्सप्रेसवे कहां से जुड़ेगा?
प्रदेश में चार नए लिंक एक्सप्रेसवे बनाए जाने हैं. इनका मकसद अलग-अलग क्षेत्रों को पहले से बने एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जोड़ना है.
- फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे : यह आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को फर्रुखाबाद के रास्ते गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा. इससे फर्रुखाबाद और आसपास के क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी.
- आगरा-लखनऊ-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे: इसके बनने से आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के बीच सीधा संपर्क स्थापित होगा. इससे पश्चिमी यूपी और पूर्वांचल के बीच सफर आसान हो सकेगा.
- झांसी लिंक एक्सप्रेसवे: यह झांसी और बुंदेलखंड क्षेत्र को प्रदेश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जोड़ेगा. इससे इस क्षेत्र की कनेक्टिविटी के साथ कारोबार और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
- जेवर लिंक एक्सप्रेसवे: यह जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा. इससे एयरपोर्ट की यमुना एक्सप्रेसवे और दिल्ली-एनसीआर के साथ कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी.
निवेश के साथ रोजगार के भी खुलेंगे रास्ते
चारों लिंक एक्सप्रेसवे तैयार होने के बाद यूपी के अलग-अलग हिस्सों के बीच आवागमन आसान होगा. उद्योगों को माल लाने-ले जाने में कम समय लग सकता है. बेहतर कनेक्टिविटी के कारण नए औद्योगिक निवेश, गोदाम, लॉजिस्टिक्स सेंटर और कारोबार से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है. इसका असर स्थानीय स्तर पर भी दिखाई दे सकता है. उद्योग और व्यापार बढ़ने से रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं. कुल मिलाकर, इन चार लिंक एक्सप्रेसवे का उद्देश्य सिर्फ सड़कों का विस्तार करना नहीं, बल्कि किसानों, कारोबारियों और आम लोगों को प्रदेश के बड़े विकास नेटवर्क से जोड़ना है.