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बहराइच के 65 वर्षीय रफीक अहमद बाबा ने पहली पत्नी के निधन के बाद अकेलेपन को दूर करने के लिए ज़ुलेखा के साथ दूसरा निकाह कर एक नई मिसाल पेश की है. बड़ीहाट मकबरा चौराहा निवासी 65 वर्षीय रफीक अहमद बाबा ने यह साबित कर दिया है कि इश्क, जज्बात और निकाह की कोई उम्र नहीं होती है. उन्होंने जीवन के इस पड़ाव पर ज़ुलेखा के साथ दूसरा निकाह कर अपनी जिंदगी की एक नई और खुशहाल शुरुआत की है, जिसकी गूंज पूरे इलाके में सुनाई दे रही है.
बहराइच: जनपद से एक बेहद अनोखा और चर्चा का विषय बना मामला सामने आया है, जहां उम्र के इस पड़ाव पर आकर प्यार, विश्वास और साथ की एक नई मिसाल देखने को मिली है. जनपद के बड़ीहाट मकबरा चौराहा निवासी 65 वर्षीय रफीक अहमद बाबा ने यह साबित कर दिया है कि इश्क, जज्बात और निकाह की कोई उम्र नहीं होती है. उन्होंने जीवन के इस पड़ाव पर ज़ुलेखा के साथ दूसरा निकाह कर अपनी जिंदगी की एक नई और खुशहाल शुरुआत की है, जिसकी गूंज पूरे इलाके में सुनाई दे रही है.
पहली पत्नी के निधन के बाद महसूस हुआ अकेलापन
रफीक अहमद बाबा का एक भरा-पूरा परिवार है, जिसमें उनके पहले से ही दो बेटे बहू और कई पोते-पोतियां मौजूद हैं. कुछ समय पहले उनकी पहली पत्नी का इंतकाल हो गया था, जिसके बाद से वह काफी अकेले रहने लगे थे.जीवन के इस सफर में पत्नी के गुजर जाने के बाद उन्हें अकेलेपन का गहरा अहसास सताने लगा. उम्र के इस पड़ाव पर रोजमर्रा के खान-पान, जीवन की भागदौड़ और अपनी देखभाल के लिए उन्हें एक सहारे की सख्त जरूरत महसूस हुई. इसी जरूरत और आपसी रजामंदी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपने जीवन के बचे हुए दिनों को बेहतर ढंग से बिताने के लिए दोबारा निकाह करने का अनूठा फैसला किया. इसके बाद उन्होंने ज़ुलेखा के साथ दूसरा निकाह करने का पक्का निर्णय लिया.
दो गवाहों की मौजूदगी में मुकम्मल हुआ निकाह
इस अनूठे निकाह की सभी रस्में पूरे विधि-विधान और पारंपरिक तरीके से पूरी की गई. निकाह के दौरान 25,786 रुपये महर तय किया गया. स्थानीय मौलाना की देखरेख और दो गवाहों की मौजूदगी में यह निकाह पूरी सादगी के साथ संपन्न हुआ. निकाह की रस्म अदायगी के दौरान जब उनसे पूछा गया, तो रफीक अहमद बाबा ने ज़ुलेखा के साथ अपना बाकी का जीवन बिताने के लिए पूरी खुशी के साथ कबूल है कहा, जिसे वहां मौजूद सभी लोगों ने सराहा.
आसपास के जिलों में हो रही चर्चा
जैसे ही इस निकाह की खबर और इससे जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, यह तेजी से वायरल होने लगा. बहराइच के साथ-साथ आसपास के जिलों के लोग भी इस उम्र में हुई इस अनोखी शादी को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं. जहां एक तरफ कुछ लोग इसे उम्रदराज व्यक्ति के अकेलेपन को दूर करने का एक व्यावहारिक और सही फैसला मान रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ यह पूरी घटना इलाके में आकर्षण का मुख्य विषय बनी हुई है. रफीक अहमद बाबा ने यह दिखा दिया कि जीवन की परिस्थितियों से हार मानने के बजाय सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना ही असली जिंदगी है.