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Bihar Former DGP Abhayanand: 1977 बैच के IPS अधिकारी और बिहार के पूर्व DGP अभयानंद 22 एनकाउंटर में शामिल रहे. लेकिन अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर से कभी एक गोली तक नहीं चलाई. कभी नक्सलियों के भेष में पूरी रात गांव में बिताई, तो कभी आधी रात गन्ने के खेत में डकैतों से मुकाबला किया. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने भी उन्होंने पुलिस की ताकत को लेकर बेबाक जवाब दिया था. जानिए बिहार के इस चर्चित ‘सुपर कॉप’ के कुछ ऐसे किस्से, जो उनके काम करने के अंदाज को बयां करते हैं.
बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद.
पटनाः फिल्मों में सुपर कॉप की पहचान अक्सर हाथ में बंदूक और अपराधियों से सीधी भिड़ंत से होती है. लेकिन बिहार के एक ऐसे पुलिस अफसर भी रहे, जो 22 एनकाउंटर में शामिल हुए, फिर भी उन्होंने अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर से कभी एक भी गोली नहीं चलाई. नाम है अभयानंद. 1977 बैच के IPS अधिकारी अभयानंद सितंबर 2011 से जून 2014 तक बिहार के DGP रहे. सख्त फैसले, अपराधियों पर एक्शन और कानून को लेकर अपनी स्पष्ट सोच के कारण उनकी पहचान अलग बनी. उनके करियर में कई ऐसे किस्से हैं, जो आज भी चर्चा में आते हैं.
न दबाव में काम किया, न पैरवी सुनी
अभयानंद की पहचान एक सख्त पुलिस अधिकारी के रूप में रही. उनके सामने कोई कितना भी प्रभावशाली व्यक्ति क्यों न हो, वह उसकी पैरवी नहीं सुनते थे. उनका मानना था कि पुलिस की असली ताकत कानून में है, न कि वर्दी के रौब में. अपराधियों तक पहुंचने के लिए वह सूझबूझ और तकनीक पर भरोसा करते थे. DGP बनने के बाद उन्होंने अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए स्पीडी ट्रायल पर जोर दिया. इसके तहत आर्म्स एक्ट जैसे मामलों में तेजी से सुनवाई कराई गई. इसका असर यह हुआ कि कई प्रभावशाली अपराधियों को जेल जाना पड़ा. कुछ ने बिहार छोड़ दिया.
जब नक्सलियों के भेष में पूरी रात गांव में रुकी पुलिस टीम
यह किस्सा उस समय का है, जब अभयानंद औरंगाबाद के SP थे. जिले में नक्सली घटनाएं बढ़ रही थीं. इसी दौरान उन्हें सूचना मिली कि एक बड़ा नक्सली गिरोह देव इलाके के एक गांव में आने वाला है. अभयानंद ने News18 को बताया कि उनकी पूरी टीम नक्सलियों के भेष में गांव पहुंची थी. वहां पहुंचने पर पता चला कि नक्सली सुबह आएंगे. इसके बाद टीम ने पूरी रात गांव में बिताई. पुलिसकर्मियों ने ग्रामीणों को बताया कि वे भोजपुर से आए हैं और इलाके के नक्सलियों के कामकाज को समझना चाहते हैं. सुबह नक्सली गांव पहुंचे. उन्हें जब वहां मौजूद लोगों के बारे में जानकारी मिली तो शक हुआ. इसके बाद दोनों पक्षों के बीच गोलीबारी हुई. अभयानंद के मुताबिक, इस कार्रवाई में 13 नक्सली पकड़े गए. पुलिस की तरफ से कोई हताहत नहीं हुआ और कोई नक्सली भाग नहीं सका.
फायरिंग के बीच भी नहीं लेटते थे अभयानंद
अभयानंद के बारे में एक और बात कही जाती है कि मुठभेड़ के दौरान गोलीबारी होने पर भी वह अपने जवानों के साथ जमीन पर नहीं लेटते थे. उनका मानना था कि ऐसा करने से पुलिस टीम का मनोबल प्रभावित हो सकता है. यही वजह थी कि वह मुश्किल हालात में भी जवानों के साथ डटे रहते थे.
गन्ने के खेत में डकैतों से हुई थी मुठभेड़
अभयानंद की पोस्टिंग जब चंपारण में थी, तब वहां डकैतों का आतंक था. एक गिरोह के डर से लोग पुलिस तक जाने से भी कतराते थे. इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि गिरोह ने एक प्रभावशाली व्यक्ति का अपहरण कर उसे गन्ने के खेत में छिपा रखा है. अभयानंद अपनी टीम के साथ रात में ही मौके पर पहुंचे. पुलिस ने खेत को घेर लिया. इसी बीच डकैतों ने गोलीबारी शुरू कर दी. पुलिस ने भी जवाब दिया. काफी देर तक दोनों तरफ से गोलियां चलीं. इसी दौरान अगवा व्यक्ति किसी तरह वहां से निकलकर पुलिस के पास पहुंच गया. अंधेरे का फायदा उठाकर डकैत भाग निकले. हालांकि, अभयानंद के मुताबिक, जिस गिरोह का चंपारण में आतंक था, वह घटना के बाद फिर कभी सामने नहीं आया.
तत्कालीन सीएम नीतीश कुमार को दिया था चौंकाने वाला जवाब
अभयानंद का एक किस्सा तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी जुड़ा है. DGP बनने से पहले एक दिन उन्हें मुख्यमंत्री आवास से फोन आया. नीतीश कुमार ने उनसे पूछा कि क्या बिहार से जंगलराज खत्म हो सकता है? उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस को ताकत देने और जरूरी कानून बनाने के लिए सरकार तैयार है. इस पर अभयानंद ने जवाब दिया कि पुलिस को ताकत देने और वर्दी की गुंडागर्दी में फर्क होना चाहिए. उन्होंने कहा, “पुलिस को शक्ति और वर्दी की गुंडागर्दी में कोई अंतर नहीं होता.” नीतीश कुमार ने पूछा कि फिर क्या किया जाना चाहिए? अभयानंद ने समझाया कि पुलिस की ताकत कानून से आती है. पुलिस का काम कानून का पालन कराना है. उसकी अपनी कोई अलग शक्ति नहीं होनी चाहिए, वरना वर्दी की गुंडागर्दी शुरू हो सकती है.