भगवान जगन्नाथ के आगे चक्रवात बेअसर! बारिश में बदला पवित्र ध्वज, जलते रहे दीप
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Puri Jagannath Temple Flag Change: पुरी के भगवान जगन्नाथ का चमत्कार कल 30 अक्टूबर को देखने को मिला. उनके आगे चक्रवात अर्नब भी बेअसर हो गया. भारी बारिश और तेज हवाओं के बीच मंदिर का पवित्र ध्वज बदला गया और वहां शिखर पर दीप जलते रहे. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
चक्रवात अर्नब के बीच बदला गया जगन्नाथ मंदिर का ध्वज.
Puri Jagannath Temple Flag Change: ओडिशा के प्रसिद्ध जगन्नाथ पुरी का मंदिर अपने कई रहस्यों और चमत्कारों के लिए जाना जाता है. लेकिन कल 30 अक्टूबर को श्री मंदिर का चमत्कार लोगों को देखने को भी मिला. चक्रवात अर्नब की वजह से पुरी समेत देश के कई हिस्सों में मौसम खराब था, भारी बारिश और तेज हवाएं चल रही थीं. पुरी में भी मौसमा का यही हाल था. उसी बीच मंदिर के शिखर पर पवित्र ध्वज बदला गया. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि भारी बारिश और तेज हवाओं के बीच मंदिर के शिखर पर एक पवित्र लौ जलती रही. आरती के दीपक भी जलते रहे, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
भारी बारिश और तेज हवाओं के बीच जलता रहा दीप
भगवान जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर लहराते पवित्र ध्वज को हर दिन सूर्यास्त के समय बदला जाता है. शिखर को नीलचक्र और ध्वज को बाना कहते हैं. मंदिर के चुनरा सेवादार इस ध्वज को बदलते हैं. वे लगभग 214 फीट ऊंचे मंदिर के शिखर पर ध्वज लेकर चढ़ते हैं और पुराने को उतार कर नए ध्वज को लगाते हैं.
कल, 30 अक्टूबर को भी सूर्यास्त के बाद ध्वज बदला जा रहा था, उस समय भारी बारिश और तेज हवाएं चल रही थीं, उस बीच चुनरा सेवादार ध्वज को लेकर मंदिर के शिखर पर चढ़ गए और ध्वज बदलने का कार्यक्रम रीति अनुसार प्रारंभ किया.
मंदिर के शिखर पर ध्वज लगाते समय दीप जलाते हैं और उस शिखर की परिक्रमा करते हैं. चमत्कार वाली बात यह है कि भारी बारिश और तेज हवाओं के बीच शिखर पर जलाया गया दीपक जलता रहा. वहीं लहराता हुआ पवित्र ध्वज भगवान जगन्नाथ की महिमा का गान कर रहा था. सोशल मीडिया पर इस वीडियो को देखकर लोग हैरान हैं और अपनी अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं.
हर दिन क्यों बदलते हैं ध्वज?
श्री मंदिर में भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और बलभद्र जी विराजमान हैं. मंदिर की मान्यता है कि यदि किसी भी एक दिन मंदिर का ध्वज नहीं बदला गया तो फिर मंदिर के कपाट अगले 18 वर्षों के लिए बंद करने पड़ते हैं. इस वजह से ही हालात जो भी क्यों न हों, ध्वज हर हाल में बदलना ही पड़ता है. आंधी, बारिश या तूफान जो भी आए, उसमें ही इस परंपरा को हर दिन सफलतापूर्वक निभाया जाता है.
जगन्नाथ मंदिर के चौंकाने वाले रहस्य
- पुरी के इस मंदिर का ध्वज हवा की विपरीत दिशा में लहराता है. आज तक यह विज्ञान के लिए एक रहस्या बना हुआ है.
- भगवान जगन्नाथ के इस धाम के मुख्य गुंबद की परछाई कभी नहीं बनती है. सुबह हो या फिर दोपहर, किसी भी समय विशाल गुंबद की परछाई जमीन पर नहीं पड़ती है.
- मंदिर का ध्वज बदलने के लिए किसी सुरक्षा उपकरण का उपयोग नहीं किया जाता है. चुनरा सेवादार बिना रस्सी या बेल्ट के 214 फीट ऊंचे शिखर पर चढ़ते हैं और प्रतिदिन ध्वज बदलते हैं.
- इस मंदिर से जुड़ा एक रहस्य यह भी है कि इसके ऊपर से कोई भी पक्षी नहीं उड़ता है और न ही कोई विमान ही गुजरता है.
- इस मंदिर का सिंहद्वार यानी मुख्य द्वार समुद्र तट के पास है. सिंहद्वार के बाहर रहते हैं तो समुद्र की लहरों की आवाज सुनाई देती है, लेकिन जैसे ही सिंहद्वार के अंदर कदम रखते हैं, वो आवाज बंद हो जाती है.
- इस मंदिर की रसोई दुनिया की सबसे बड़ी रसोई है, जिसमें महाप्रसाद बनता है. इस मंदिर का महाप्रसाद कभी भी कम नहीं पड़ता है, चाहें कितनी भी संख्या में श्रद्धालु क्यों न आए हों. महाप्रसाद मिट्टी के 7 बर्तनों में बनता है.
1 टन का नीलचक्र शिखर पर कैसे पहुंचा?
इस मंदिर के शिखर पर अष्टधातु का नीलचक्र लगा है, जो लगभग 1 टन से भी भारी है. पुरी में आप कहीं से भी खड़े होकर देखेंगे तो वो चक्र आपकी सीध में दिखाई देगा. चक्र का मुख आपके सामने होगा. सबसे बड़ी बात यह कि इतना वजनी चक्र मंदिर के शिखर पर कैसे लगाया गया?