G20 Summit Drama : G20 में सूट छोड़ कूल लुक में पहुंचे पुतिन के दूत, ‘अनफ्रेंडली एयरस्पेस’ का मुंहतोड़ जवाब, झेंप गए होंगे रूबियो

G20 Summit Drama : G20 में सूट छोड़ कूल लुक में पहुंचे पुतिन के दूत, ‘अनफ्रेंडली एयरस्पेस’ का मुंहतोड़ जवाब, झेंप गए होंगे रूबियो


ग्लोबल डिप्लोमेसी में बॉडी लैंग्वेज से लेकर पहनावे तक के पीछे एक बहुत भारी पॉलिटिकल मीनिंग छिपा होता है. अमेरिका के अटलांटा, जॉर्जिया में चल रही G20 विदेश मंत्रियों की बैठक से एक ऐसा नजारा सामने आया है जिसने दुनिया भर के पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का ध्यान खींच लिया है. रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव जब अमेरिका की धरती पर उतरे, तो उनका अंदाज कूटनीतिक प्रोटोकॉल वाला नहीं था. सूट-बूट की बजाय वो एकदम कैजुअल कपड़ों, जींस और डार्क जंपर में विमान की सीढ़ियों से उतरते दिखे. ये प्रोटोकॉल तोड़ने के पीछे की कहानी सिर्फ कपड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार 20 घंटे की लंबी उड़ान और अमेरिका-यूरोप द्वारा रूस के लिए खड़े किए गए ‘नो-फ्लाई जोन’ और ‘अनफ्रेंडली एयरस्पेस’ से जुड़े हैं.

जब कैजुअल लुक में उतरे लावरोव: प्रोटोकॉल तोड़ने का बड़ा कूटनीतिक मैसेज

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जब भी कोई विदेश मंत्री या राष्ट्राध्यक्ष किसी दूसरे देश की यात्रा पर जाते हैं, तो एक तय कूटनीतिक प्रोटोकॉल होता है, सूट, टाई, और बेहद फॉर्मल अंदाज. लेकिन सर्गेई लावरोव ने इस ट्रेडीशन को तोड़ते हुए अमेरिका के अटलांटा एयरपोर्ट पर बेहद कैजुअल अटायर में कदम रखा.

लावरोव काले रंग की स्वेटशर्ट और जींस पहने हुए विमान से नीचे उतरे. डिप्लोमेटिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये कोई लापरवाही नहीं, बल्कि एक सोचा-समझा और बड़ा मैसेज था. ये इस बात का सबूत था कि रूस पश्चिमी देशों के बनाए गए उन प्रोटोकॉल की अब कोई परवाह नहीं करता, जिनके जरिए वे दूसरों पर रौब झाड़ते हैं. मॉस्को ये जताना चाहता था कि वो अमेरिकी जमीन पर मेहमाननवाजई के दबाव में नहीं, बल्कि अपने शर्तों के साथ आया है.

20 घंटे की लंबी उड़ान और ‘अनफ्रेंडली एयरस्पेस’ का असली सच

इस पूरी यात्रा का सबसे हैरान करने वाला पहलू ये है कि मास्को से अमेरिका के अटलांटा तक पहुंचने के लिए लावरोव के विमान को करीब 20 घंटे का लंबा सफर तय करना पड़ा. आम तौर पर ये दूरी इतनी लंबी नहीं होती, लेकिन इसके पीछे की वजह है, यूरोप और पश्चिमी देशों का वह ‘अनफ्रेंडली एयरस्पेस’, जिसे रूस के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है.

जब से यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ है, अमेरिका, यूरोपीय यूनियन और उनके सहयोगियों ने रूसी विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र को प्रतिबंधित कर दिया है. इसका नतीजा ये हुआ है कि रूसी सरकारी विमानों को यूरोप के ऊपर से सीधा गुजरने का अधिकार नहीं है. लावरोव के विमान को यूरोप और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधित एयरस्पेस से बचने के लिए एक बहुत लंबा और घुमावदार चक्करदार रूट लेना पड़ा.

ये 20 घंटे की मैराथन उड़ान इस बात का जीता-जागता सबूत है कि आज की तारीख में रूस और पश्चिम के बीच दूरियां सिर्फ वैचारिक नहीं, बल्कि आसमान तक फैल चुकी हैं. एक तरफ अमेरिका और उसके साथी देशों के विदेश मंत्री अटलांटा में वैश्विक अर्थव्यवस्था, सप्लाई चेन और नेविगेशन की स्वतंत्रता पर बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके ही बनाए गए प्रतिबंधों ने रूस के शीर्ष राजनयिक को आसमान में लंबा रास्ता तय करने पर मजबूर कर दिया.

अटलांटा में G20 बैठक: बिना ‘फैमिली फोटो’ के शुरू हुआ महामंथन

जॉर्जिया के अटलांटा में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मेजबानी में शुरू हुई ये G20 विदेश मंत्रियों की बैठक पहले ही दिन से विवादों और दूरियों की भेंट चढ़ चुकी है. बैठक की शुरुआत में ही पारंपरिक ‘फैमिली फोटो’ को रद्द करना पड़ा.

वजह साफ थी कि कई यूरोपीय देशों के कूटनीतिक अधिकारियों ने साफ कह दिया था कि वे रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ एक फ्रेम में खड़े होकर फोटो नहीं खिंचवाएंगे. जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेपुल ने तो यहां तक कह दिया था, ‘रूस के साथ अब कोई सामान्यता नहीं बची है, इसलिए कोई पारिवारिक तस्वीर नहीं होगी’.

एक तरफ अमेरिकी मेजबान मार्को रुबियो ने वैश्विक आर्थिक संकट, ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य आपूर्ति और समुद्री नेविगेशन की स्वतंत्रता जैसे गंभीर मुद्दों पर मिलकर काम करने की अपील की, तो दूसरी तरफ पश्चिमी देशों की ये जिद दिखाती है कि कूटनीतिक मंचों पर संवाद के दरवाजे किस हद तक बंद हो चुके हैं.

तनाव के बीच रूस का रुख और दक्षिण अफ्रीका का मुद्दा

इस सम्मेलन के दौरान रूसी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे सर्गेई लावरोव ने पश्चिमी देशों के दोहरे रुख पर कड़ा प्रहार किया. मास्को ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि G20 मंचों पर सभी देशों के साथ समान और निष्पक्ष संवाद होना चाहिए. इसके अलावा, रूस ने अमेरिका द्वारा दक्षिण अफ्रीका को G20 शिखर सम्मेलन से बाहर रखने के फैसले की कड़ी आलोचना की है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दक्षिण अफ्रीका को निमंत्रण न देने के फैसले पर रूस ने आपत्ति जताई है और मांग की है कि अफ्रीकी देश के सदस्यता अधिकारों को पूरी तरह बहाल किया जाए. ये कूटनीतिक चाल रूस को विकासशील देशों के बीच एक मजबूत और सहानुभूति रखने वाले साथी के रूप में पेश करने की कोशिश है, जबकि अमेरिका और पश्चिमी देश अपने फैसलों की वजह से ग्लोबल साउथ के कुछ हिस्सों में आलोचनाओं का शिकार हो रहे हैं.

बदलती दुनिया की कूटनीति और अंतहीन दूरियां

सर्गेई लावरोव का कैजुअल कपड़ों में अमेरिका उतरना और 20 घंटे की लंबी उड़ान भरकर आना इस बात का सबूत है कि शीत पुरानी वैश्विक व्यवस्था अब दम तोड़ चुकी है. एक तरफ जहां अमेरिकी धरती पर G20 के मंच पर दुनिया को आर्थिक स्थिरता और सहयोग का पाठ पढ़ाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ एयरस्पेस की पाबंदियां, ‘फैमिली फोटो’ का बहिष्कार और नेताओं के तेवर ये बताते हैं कि महाशक्तियों के बीच अविश्वास की खाई अब और गहरी हो चुकी है.

ये ‘कैजुअल एंट्री’ सिर्फ एक कपड़े बदलने की घटना नहीं है, बल्कि ये उस टूटे हुए भरोसे की तस्वीर है जिसमें रूस ने दुनिया को ये दिखा दिया है कि उसे पश्चिमी दुनिया के दिखावटी प्रोटोकॉल की कोई परवाह नहीं है.



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