केले-मक्के से आगे बढ़कर लाल हुई किस्मत! 3 एकड़ में टमाटर उगा रहीं गंफाबाई
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Tomato Farming: बुरहानपुर के हथनूर निवासी गंफाबाई ने भाई से प्रेरणा लेकर तीन एकड़ में टमाटर की खेती शुरू की हैइ. ससे वह आत्मनिर्भर बनने के साथ 15 से 20 लोगों को रोजगार भी दे रही हैं. गंफाबाई की यह पहल अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही है कि वे पारंपरिक खेती के साथ सब्जी उत्पादन जैसे विकल्प अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकती हैं.
Tamatar Ki Kheti: जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं भी खेती-किसानी के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना रही हैं. ऐसी ही एक महिला हैं हथनूर निवासी गंफाबाई निवृत्ति कोली जिन्होंने अपने भाई से प्रेरणा लेकर टमाटर की खेती शुरू की. आज वे तीन एकड़ जमीन में टमाटर का उत्पादन कर रही हैं. खास बात यह है कि उनके इस खेती के काम से गांव के 15 से 20 लोगों को रोजगार भी मिल रहा है.
महिला किसान ने दी जानकारी
लोकल 18 की टीम को महिला किसान गंफाबाई ने बताया कि पहले केले, मक्का सहित अन्य पारंपरिक फसलों की खेती करती थीं. इसी दौरान उनके भाई ने उन्हें सब्जी की खेती करने के लिए प्रेरित किया. भाई ने न केवल उन्हें टमाटर की खेती का सुझाव दिया बल्कि बीज उपलब्ध कराकर इस काम की शुरुआत करने में भी मदद की. इसके बाद गंफाबाई ने टमाटर की खेती करने का निर्णय लिया. पिछले चार वर्षों से वे लगातार इस काम में जुटी हुई हैं. गंफाबाई ने बताया कि शुरुआत में भाई से मिले बीजों के माध्यम से टमाटर की खेती शुरू की थी. धीरे-धीरे अनुभव बढ़ता गया और अब वे तीन एकड़ क्षेत्र में टमाटर की फसल लगा रही हैं. इस खेती में खेत की तैयारी पौधों की देखभाल, सिंचाई खाद और समय-समय पर फसल की निगरानी करना जरूरी होता है. करीब आठ महीने की प्रक्रिया के बाद फसल तैयार होती है. इसके बाद लगभग चार महीने तक टमाटर की तुड़ाई का काम चलता है.
15 से 20 लोगों को दे रही हैं रोजगार
टमाटर की तुड़ाई और अन्य कृषि कार्यों के लिए उन्हें मजदूरों की आवश्यकता होती है. इसके चलते 15 से 20 लोगों को नियमित रूप से काम मिल रहा है. इस तरह गंफाबाई खेती के माध्यम से खुद आत्मनिर्भर बनने के साथ ही दूसरे परिवारों की आजीविका में भी सहयोग कर रही हैं. उनका कहना है कि खेती में मेहनत और लगन जरूरी है. भाई से मिली प्रेरणा ने उन्हें नया काम शुरू करने का हौसला दिया. अब उनका लक्ष्य टमाटर की खेती का दायरा बढ़ाने के साथ क्षेत्र के अधिक से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना है. गंफाबाई की यह पहल अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही है कि वे पारंपरिक खेती के साथ सब्जी उत्पादन जैसे विकल्प अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकती हैं.