‘तनखैया’ बयान पर आजम खान की मुश्किलें बरकरार रहेंगी या मिलेगी राहत? हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

‘तनखैया’ बयान पर आजम खान की मुश्किलें बरकरार रहेंगी या मिलेगी राहत? हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब


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Azam Khan Tankhaiya Speech Case: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान के चर्चित ‘तनखैया’ भाषण मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब किया है. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान रामपुर में दिए गए एक भाषण में तत्कालीन डीएम और सरकारी अधिकारियों को ‘तनखैया’ कहने के मामले में निचली अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी. दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली आजम खान की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर जस्टिस समित गोपाल की सिंगल बेंच में सुनवाई हुई, जिसमें कोर्ट ने यूपी सरकार को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर को तय की गई है.

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आजम खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं.

प्रयागराज: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मोहम्मद आजम खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान उनके द्वारा दिए गए विवादित ‘तनखैया’ भाषण से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है. आजम खान ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा और दोषसिद्धि को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दाखिल की है, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह सख्त रुख अपनाया है.

न्यायमूर्ति समित गोपाल की सिंगल बेंच में इस मामले की सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान याची आजम खान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन.आई. जाफरी, अधिवक्ता शाश्वत आनंद और शशांक तिवारी ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने अपनी दलीलें पेश कीं. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार सहित अन्य प्रतिवादियों को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. इस मामले की अगली सुनवाई अब आगामी 30 नवंबर को होगी.

जूते साफ करवाने की दलील

यह पूरा मामला 9 अप्रैल 2019 को लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान रामपुर जिले के ग्राम मनकरा में दिए गए आजम खान के एक भाषण से जुड़ा है. अभियोजन पक्ष के अनुसार, अपने इस भाषण में आजम खान ने तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) और अन्य सरकारी अधिकारियों को ‘तनखैया’ यानी वेतनभोगी कर्मचारी कहकर संबोधित किया था और लोगों से कहा था कि वे कलेक्टर से डरें नहीं. इसके अलावा, उन्होंने बसपा प्रमुख मायावती की उन पुरानी तस्वीरों का भी उल्लेख किया था जिनमें वरिष्ठ अधिकारी उनके जूते साफ करते दिखाई दे रहे थे, और टिप्पणी की थी कि वह इन अधिकारियों से भी ऐसा ही करवाएंगे.

बयान पर दो-दो साल की हुई थी सजा

इस मामले में तत्कालीन एसडीएम टांडा घनश्याम त्रिपाठी की शिकायत पर थाना सिविल लाइंस और बाद में थाना भोट में मुकदमा दर्ज किया गया था. रामपुर के विशेष न्यायाधीश (एमपी/एमएलए) कोर्ट ने 16 मई 2026 को आजम खान को भारतीय दंड संहिता (BNS/IPC) की विभिन्न धाराओं और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत दोषी ठहराते हुए दो-दो साल के कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी. इसके बाद रामपुर के अपर सत्र न्यायालय ने भी उनकी अपील खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.

सिर्फ राजनीतिक आलोचना थी

अपनी पुनरीक्षण याचिका में आजम खान की ओर से दलील दी गई है कि इस पूरे भाषण को राजनीतिक संदर्भ में देखा जाना चाहिए, जो प्रशासनिक कामकाज की आलोचना तक सीमित था. इसमें किसी भी धर्म, जाति या समुदाय के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की गई थी. याचिका में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की ग्राह्यता और गवाहों के बयानों पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं. अब देखना यह है कि राज्य सरकार के जवाब के बाद हाईकोर्ट इस चर्चित मामले में क्या नया रुख अपनाता है.



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