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IAS Anjani Kumar Singh Success Story: बिहार की राजधानी पटना में करीब 11 साल पहले बना एक म्यूजियम आज पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया है. बिहार म्यूजियम ने दुनिया के 100 सर्वश्रेष्ठ संग्रहालयों की 2026 की सूची में नौवां स्थान हासिल किया है. इस रैंकिंग में उसने पेरिस के मशहूर लूव्र म्यूजियम और न्यूयॉर्क के द मेट को भी पीछे छोड़ दिया है लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिहार की इस ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक म्यूजियम में बदलने के पीछे एक वरिष्ठ IAS अधिकारी की अहम भूमिका रही है? यह अधिकारी हैं बिहार के पूर्व मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह.
Bihar Museum World Ranking 2026: बिहार म्यूजिक दुनिया के टॉप 10 में.
IAS Anjani Kumar Singh Success Story: बिहार की राजधानी पटना में करीब 11 साल पहले बना एक म्यूजियम आज पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया है. बिहार म्यूजियम ने दुनिया के 100 सर्वश्रेष्ठ संग्रहालयों की 2026 की सूची में नौवां स्थान हासिल किया है. इस रैंकिंग में उसने पेरिस के मशहूर लूव्र म्यूजियम और न्यूयॉर्क के द मेट को भी पीछे छोड़ दिया है लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिहार की इस ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक म्यूजियम में बदलने के पीछे एक वरिष्ठ IAS अधिकारी की अहम भूमिका रही है? यह अधिकारी हैं बिहार के पूर्व मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर बने इस म्यूजियम को जमीन पर उतारने में उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई. आज जब बिहार म्यूजियम दुनिया के टॉप 10 संग्रहालयों में शामिल हुआ है, तो इसके निर्माण से जुड़ी उनकी कहानी भी जानने लायक है.
दुनिया में नौवां, एशिया में पहला स्थान
जर्मनी के म्यूनिख स्थित ट्रैवल पब्लिकेशन ‘वर्थ अ जर्नी’ ने वलर्ड 100 बेस्ट म्यूजियम 2026 (World’s 100 Best Museums 2026)की सूची जारी की है. इसमें पटना के बिहार म्यूजियम को दुनिया में नौवां और एशिया में पहला स्थान मिला है. इस सूची में शामिल होने वाला यह भारत का एकमात्र संग्रहालय है.खास बात यह है कि न्यूयॉर्क का मेट्रोपॉलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट दसवें और पेरिस का लूव्र 31वें स्थान पर है. सूची में पहले स्थान पर मेक्सिको सिटी का म्यूजियो नैशनल डी एंथ्रोपोलोजिया, दूसरे पर मैड्रिड का म्यूजियो डेल प्राडो और तीसरे पर डेनमार्क का लुइसियाना म्यूजियम ऑफ मॉडर्न आर्ट है.यह रैंकिंग दर्शकों की समीक्षाओं, आंकड़ों के विश्लेषण और विशेषज्ञों के मौके पर किए गए मूल्यांकन के आधार पर तैयार की गई है. उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने भी इस उपलब्धि की सराहना की है. उन्होंने इसे भारत में म्यूजियम देखने के अनुभव को बदलने वाला अवसर बताया है.
कौन हैं IAS अंजनी कुमार सिंह?
अंजनी कुमार सिंह बिहार कैडर के 1981 बैच के पूर्व IAS अधिकारी हैं. उनका जन्म बिहार के सीवान जिले में हुआ था जबकि बचपन बेगूसराय जिले के चमथा गांव में बीता.प्रशासनिक सेवा में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं. वह करीब चार साल तक बिहार के मुख्य सचिव रहे. मई 2018 में इस पद से सेवानिवृत्त होने के अगले ही दिन उन्हें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का सलाहकार नियुक्त किया गया. उन्हें नीति और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन से जुड़ी जिम्मेदारी दी गई.बाद में उन्हें बिहार म्यूजियम का महानिदेशक बनाया गया. संग्रहालय की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उनका नाम महानिदेशक के रूप में दर्ज है.
नीतीश कुमार ने देखा सपना, अंजनी सिंह ने संभाली जिम्मेदारी
बिहार म्यूजियम बनने की कहानी वर्ष 2010 से जुड़ी है. उस समय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पटना म्यूजियम गए थे. वहां उन्होंने देखा कि जगह की कमी के कारण बड़ी संख्या में ऐतिहासिक वस्तुएं आम लोगों के सामने प्रदर्शित नहीं की जा पा रही थीं.इसके बाद एक ऐसे नए संग्रहालय का विचार सामने आया जहां बिहार की हजारों साल पुरानी विरासत को आधुनिक तरीके से दिखाया जा सके. इस परियोजना में अंजनी कुमार सिंह को नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी मिली.जमीन, निर्माण, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और विशेषज्ञों के साथ तालमेल जैसी चुनौतियों के बीच परियोजना आगे बढ़ी. अंजनी सिंह ने अपनी किताब वन लाइफ इज इनफ (One Life is Enough)में भी बिहार म्यूजियम की स्थापना और इस दौरान सामने आई प्रशासनिक चुनौतियों का जिक्र किया है.
जापानी आर्किटेक्ट ने तैयार किया डिजाइन
पटना के बेली रोड पर करीब 13.9 एकड़ में फैले बिहार म्यूजियम का उद्घाटन 2015 में हुआ था. इसके डिजाइन में प्रित्जकर पुरस्कार विजेता जापानी आर्किटेक्ट फुमिहिको माकी और भारतीय आर्किटेक्चर फर्म स्टूडियो ओपोलिस की भूमिका रही.यहां दीदारगंज यक्षी की करीब दो हजार साल पुरानी प्रतिमा सबसे खास आकर्षणों में शामिल है. इसके अलावा कुरकीहार की कांस्य प्रतिमाएं, प्राचीन पत्थर के औजार, कुषाण काल की बुद्ध के जन्म से जुड़ी शिलापट्टिका, सिक्के, पांडुलिपियां और लोक कला की वस्तुएं भी प्रदर्शित हैं.संग्रहालय में बच्चों के लिए अलग गैलरी भी बनाई गई है ताकि वे इतिहास को रोचक तरीके से समझ सकें.
शिक्षा विभाग में भी निभाई अहम भूमिका
अंजनी कुमार सिंह की पहचान केवल बिहार म्यूजियम तक सीमित नहीं है. शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव रहते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री साइकिल योजना और मुख्यमंत्री अक्षर आंचल योजना जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन में भूमिका निभाई.कला और सार्वजनिक स्थानों पर कलाकृतियों को बढ़ावा देने के लिए उन्हें दिसंबर 2017 में ‘पब्लिक आर्ट इनिशिएटिव’ सम्मान भी मिला था. बिहार म्यूजियम में कलाकृतियों के चयन और उन्हें प्रदर्शित करने की व्यवस्था में उनके योगदान को भी पहचान मिली.
IAS अफसर को क्यों कहते हैं ‘कैक्टस मैन’?
अंजनी कुमार सिंह की एक अलग पहचान ‘कैक्टस मैन’ के रूप में भी है. उन्हें दुर्लभ पौधों को इकट्ठा करने और सहेजने का शौक है. उनके संग्रह में चार हजार से अधिक पौधे बताए जाते हैं.उन्होंने अफ्रीका और लैटिन अमेरिका सहित दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से कैक्टस और अन्य दुर्लभ पौधों की प्रजातियां जुटाई हैं. इनमें दक्षिण अफ्रीका में पाया जाने वाला हवार्किया पौधा भी शामिल है, जिसकी बढ़ने की रफ्तार बेहद धीमी होती है.अंजनी सिंह ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनकी पत्नी को फूल-पौधों का शौक था. इसी से प्रेरित होकर उन्होंने दुर्लभ प्रजातियों को इकट्ठा करना शुरू किया और बाद में उनके संरक्षण पर भी ध्यान दिया.