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World Economy : दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के हालिया आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि मंदी की आशंका अब मंद पड़ गई है. भारत और चीन के बाद अब अमेरिका की विकास दर के आंकड़ों ने भी दिखा दिया है कि ग्लोबल इकनॉमी में ग्रोथ आनी शुरू हो गई है. आईएमएफ ने भी अगले साल वर्ल्ड इकनॉमी की ग्रोथ तेज रहने का अनुमान जताया है.
वर्ल्ड इकनॉमी की ग्रोथ रेट अगले साल बढ़ने का अनुमान है.
नई दिल्ली. इस साल की शुरुआत से ही दुनिया में मंदी आने की आशंका जताई जा रही थी. लेकिन, जैसे-जैसे समय आगे बढ़ा, बड़ी अर्थव्यवस्थाओं ने अपनी ग्रोथ दिखानी शुरू कर दी. पहले भारत ने लगातार दूसरी तिमाही में तेज विकास दर से दुनिया को चौंकाया और फिर चीन और अमेरिका ने भी अनुमान से ज्यादा ग्रोथ दर्ज कर यह संकेत दे दिया है कि दुनिया की अर्थव्यवस्था सुस्ती से उबर रही है. ये आंकड़े बताते हैं कि मंदी का जोखिम अब पहले जितना नहीं दिख रहा, वह भी तब जबकि ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से दुनियाभर के कारोबार पर गंभीर असर पड़ रहा है.
अमेरिका और चीन दुनिया की सबसे बड़ी इकनॉमी हैं तो भारत दुनिया का सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार. इन तीनों की विकास दर में तेजी से पूरी दुनिया को गति मिलने का अनुमान है. यही कारण है कि बाजार एक्सपर्ट भी अब मंदी के जोखिम को कम आंकने लगे हैं. भारत अपने बड़ी घरेलू खपत, सरकारी और सेवाओं की मजबूती के सहारे दुनिया की अर्थव्यवस्था को सहारा देता है. चीन अपने निर्यात और औद्योगिक उत्पादन के दम पर ग्रोथ को बढ़ावा दे रहा है. अमेरिका आज भी सबसे ज्यादा उपभोक्ता खर्च वाला देश बना हुआ है. हालांकि, इस पर ब्याज और महंगाई का दबाव साफ देखा जा रहा है.
भारत-चीन और अमेरिका में किसकी विकास दर तेज
- भारत : सरकार की ओर से जारी दूसरी तिमाही के नतीजों में भारत की विकास दर 7.8 फीसदी रही थी, जो दुनिया में सबेस तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है.
- चीन : दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन की विकास दर दूसरी तिमाही में 4.3 फीसदी थी, जो जुलाई-सितंबर में बढ़कर 4.5 फीसदी पहुंच गई है.
- अमेरिका : दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका ने भी तीसरी तिमाही में अनुमान से भी ज्यादा विकास दर हासिल की है. दूसरी तिमाही में उसकी विकास दर 2.2 फीसदी थी, जो तीसरी तिमाही में 3.4 फीसदी पहुंच गई है.
आईएमएफ ने भी माना-बढ़ेगी ग्रोथ
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भी अपने हालिया आंकड़ों में यह संकेत दिया है कि दुनिया की ग्रोथ बढ़ने वाली है. आईएमएफ ने साल 2026 में दुनिया की ग्रोथ 3.1 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था जो अगले साल बढ़कर 3.4 फीसदी पहुंचने का अनुमान है. कयास ये भी लगाए जा रहे कि इस दौरान वर्ल्ड इकनॉमी को महंगाई का भी साथ मिलेगा. साल 2026 में जहां खुदरा महंगाई 4.7 फीसदी रहने का अनुमान है, वहीं अगले साल 2027 में यह 4.1 फीसदी तक गिर सकती है. महंगाई का दबाव कम होगा तो विकास दर को और बढ़ावा मिलेगा.
ग्लोबल इकनॉमी के सामने कितनी चुनौतियां
- वर्ल्ड इकनॉमी में अभी भले ही तेजी दिख रही है, लेकिन अमेरिका-चीन ट्रेड टेंशन की वजह से दुनियाभर में व्यापार और सप्लाई चेन पर असर पड़ रहा है.
- ईरान-अमेरिका और रूस-यूक्रेन जैसे देशों के भू-राजनीतिक संघर्षों की वजह से तेल और गैस की कीमतों में भी अस्थरिता दिख रही है.
- बात चाहे भारत की हो या फिर वर्ल्ड इकनॉमी की, ऊंची महंगाई की वजह से उपभोक्ताओं की खरीदने की क्षमता पर असर पड़ा है.
- ब्याज दरें बढ़ने की वजह से सरकारी कर्ज महंगा हो गया है, जिससे निवेश और विकास के लिए खर्च में गिरावट की आशंका जताई जा रही है.