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Bank Loan : आप हर महीने अपनी सभी ईएमआई बिल्कुल सही तारीख पर चुकाते हैं. क्रेडिट कार्ड के बिलों का भुगतान बिना चूके करते हैं. आपका क्रेडिट स्कोर भी 800 है. इतनी शानदार प्रोफाइल के बाद भी अगर बैंक आपको नया लोन देने से इंकार कर दे, तो आपको झटका लगेगा. आपका परेशान और निराश होना बिल्कुल स्वाभाविक है. ऊपर से यह सवाल आपको खाए जाएगा कि इतना शानदार क्रेडिट स्कोर होने के बावजूद भी आखिर बैंक ने लोन देने से इंकार किया तो कैसे किया.
दरअसल,क्रेडिट स्कोर ही लोन मिलने का एकमात्र पैमाना नहीं है. यह बात पूरी तरह सही नहीं है. क्रेडिट स्कोर बैंक को केवल यह बताता है कि आपने अतीत में कर्ज लेकर उसे कैसे लौटाया है. यह आपकी सेविंग, हर महीने खाते में आने वाली असली सैलरी, और वित्तीय क्षमता के बारे में बैंक को नहीं बताती. (Photo : canva)
बैंक लोन देने से पहले पहले आवेदक की इनकम, पहले से चल रहे कर्जों के बोझ, नौकरी और अपनी आंतरिक जोखिम नीतियों को भी परखता है. इनमें से किसी में आप अगर कमजोर हैं तो फिर 800 क्रेडिट स्कोर होने के बावजूद भी आपके लोन की फाइल अटक सकती है. (Photo : Canva)
लोन रिजेक्ट होने की सबसे आम वजह होती है आपकी सैलरी का एक बड़ा हिस्सा पहले से ही अन्य कर्जों की ईएमआई में बंधा होना. बैंक की भाषा में इसे ‘डेट-टू-इनकम रेशियो’ (DTI) कहा जाता है, यानी आप जितना कमा रहे हैं, उसका कितना फीसदी हिस्सा पुराने कर्ज चुकाने में जा रहा है. अगर आपकी मासिक सैलरी 65,000 रुपये है और आप कार या पर्सनल लोन के रूप में पहले ही 27,000 रुपये की मासिक किस्त भर रहे हैं, तो आपकी आय का एक बड़ा हिस्सा पहले ही ब्लॉक है. (Photo : Canva)
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ऐसे में अगर आप 18,000 रुपये की नई ईएमआई का एक और लोन मांगते हैं, तो आपकी कुल ईएमआई बढ़कर सीधे 45,000 रुपये हो जाएगी. जब कुल किस्तों का बोझ 45,000 रुपये हो जाएगा, तो घर के राशन, बच्चों की फीस, मेडिकल इमरजेंसी और रोजमर्रा के बाकी खर्चों के लिए आपके पास सिर्फ 20,000 रुपये बचेंगे. बैंक का क्रेडिट मैनेजर यह साफ देख लेता है कि इस बची हुई रकम में पूरा महीना काटना बेहद जोखिम भरा है और भविष्य में जरा सी परेशानी आते ही आप डिफॉल्ट कर सकते हैं.
लोन खारिज होने का दूसरा बड़ा कारण आपकी कमाई की निरंतरता और नौकरी की स्थिरता पर उठने वाले सवाल हो सकते हैं. हो सकता है कि आपका पुराना क्रेडिट रिकॉर्ड बेदाग रहा हो, लेकिन अगर आपने हाल ही में कंपनी बदली है और अभी प्रोबेशन पीरियड में हैं, तो बैंक हिचकिचाएगा. इसी तरह फ्रीलांसिंग, अनियमित प्रोजेक्ट्स या कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वालों को लोन देने में बैंक सतर्कता बरतता है. बैंक को हमेशा इस बात की पक्की गारंटी चाहिए होती है कि लोन की पूरी अवधि के दौरान आपके खाते में हर महीने तय तारीख को सैलरी जरूर क्रेडिट होगी. (Photo : canva)
बैंक यह सुनिश्चित करने के लिए कि आवेदक आने वाले वर्षों में भी नियमित रूप से किस्त चुकाने में सक्षम रहेगा, पिछले दो-तीन साल के इनकम टैक्स रिटर्न (ITR), विस्तृत बैंक स्टेटमेंट और बैलेंस शीट की बारीकी से जांच करता है. हर वित्तीय संस्थान के अपने नियम होते हैं, जिनमें न्यूनतम टर्नओवर, बिजनेस की उम्र और न्यूनतम शुद्ध मुनाफा तय होता है. मान लो कि आप बिजनेसमैन है और आपका बिजनेस इन पैमानों पर खरा नहीं उतरता, तो क्रेडिट स्कोर चाहे कितना भी मजबूत हो, बैंक लोन नहीं देगा.
क्रेडिट कार्ड की लिमिट का अत्यधिक इस्तेमाल करना भी घातक है. भले ही आप क्रेडिट कार्ड के बिल की पूरी रकम अंतिम तारीख से पहले भर देते हों, लेकिन अगर आपकी 1 लाख रुपये की लिमिट में से हर महीने 80,000 रुपये खर्च हो जाते हैं, तो यह रेड फ्लैग है. इसे हाई ‘क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो’ (CUR) कहा जाता है. वित्तीय विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कुल क्रेडिट लिमिट का ज्यादा से ज्यादा 70 फीसदी ही इस्तेमाल करना चाहिए.
लोन रिजेक्ट होने पर घबराकर एक साथ चार-पांच अलग-अलग बैंकों या लोन ऐप्स में धड़ाधड़ आवेदन कर देना एक बहुत बड़ी भूल साबित होती है. आप जब भी किसी बैंक में लोन की अर्जी लगाते हैं, तो वह बैंक आपकी क्रेडिट हिस्ट्री देखने के लिए ‘हार्ड इन्क्वायरी’ करता है, जो आपकी रिपोर्ट में तुरंत दर्ज हो जाती है. बहुत कम समय के भीतर कई हार्ड इन्क्वायरी दिखने पर बैंक आपको ‘क्रेडिट हंगरी’ यानी पैसों के लिए बेकरार ग्राहक मान लेता है.
अगर 800 का क्रेडिट स्कोर होने के बाद भी आपका लोन रिजेक्ट हो गया है, तो किसी नए बैंक का दरवाजा खटखटाने से पहले अपने बैंक से लिखित में रिजेक्शन का कारण मांगें. इसके बाद अपनी सिबिल या अन्य क्रेडिट रिपोर्ट को डाउनलोड करके उसमें दर्ज नाम, पैन कार्ड, खुले हुए लोन अकाउंट्स और ओवरड्यू हिस्ट्री की एक-एक लाइन की जांच करें. अपनी वर्तमान आमदनी के हिसाब से पुराने छोटे कर्जों को खत्म करें ताकि आपका डेट-टू-इनकम रेशियो कम हो सके.