महीने में सिर्फ 20 दिन काम, फिर भी बनवा लिया घर! सागर के मजदूर दीपक साहू से सीखिए बचत का फॉर्मूला

महीने में सिर्फ 20 दिन काम, फिर भी बनवा लिया घर! सागर के मजदूर दीपक साहू से सीखिए बचत का फॉर्मूला


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सागर में मजदूरी करने वाले दीपक साहू ने पैसों का सही मैनेजमेंट करके और छोटी-छोटी बचत से घर बनवाया, गाड़ी खरीदी और खुद की शादी की. वह महीने में 20 दिन काम करके बचत करते हैं.

आज के समय में दिन पर दिन महंगाई आसमान छू रही है. ऐसे में वित्तीय सलाहकारों के द्वारा ज्यादा से ज्यादा बचत करने का मंत्र दिया जा रहा है ताकि लोगों के बजट पर इसका ज्यादा असर दिखाई ना दे लेकिन सागर में एक मजदूर के द्वारा 8 साल पहले ही इस फार्मूले को अपना लिया था जिसकी वजह से वह बाकायदा महीने में मात्र 20 दिन काम करते हैं और इससे जो कमाई होती है उस घर खर्च चलता है. इसके साथ-साथ में वह थोड़ी-थोड़ी बचत भी कर लिया करते हैं.

सागर में पुट्टी, पुताई, ट्रेक्चर का काम करने वाले दीपक साहू पथरिया जाट के रहने वाले हैं. वह पिछले 9 साल से यह काम कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने शुरू से ही यह फार्मूला अपनाया कि वह महीने में केवल 20 दिन काम करते हैं और 10 दिन रेस्ट लेते हैं. 18 से 20000 रुपए की महीने में कमाई होती है. इसमें वह कभी 2000 तो कभी 3000 की बचत कर लेते हैं. सीजन आने पर वह 10000 तक की बचत कर लेते हैं और इस समय वह अपने कार्य करने की टाइमिंग बढ़ा देते हैं. कुछ काम ठेकेदारी में भी करते हैं, जिसमें ज्यादा बचत हो जाती है.

छोटी-छोटी बचत से मिला फायदा
दीपक बताते हैं कि वह केवल जरूरी काम को करने के लिए ही बाइक का इस्तेमाल करते हैं. बाकी समय साइकिल से छोटे-मोटे काम करते रहते हैं ताकि पेट्रोल में ज्यादा पैसा खर्च ना हो. खाने में भी कम तेल मसाले की चीजों का इस्तेमाल घर में होता है. सबसे जरूरी बात की जो लोग दिन भर मजदूरी करते हैं वो लगभग 99% मजदूर घर पहुंचने से पहले ही नशा कर लेते हैं. शराब पी लेते हैं लेकिन ये गुटखा के अलावा कोई दूसरा नशा नहीं करते हैं. इस तरह से छोटी-छोटी चीजों में कटौती करके और कुछ बुरी चीजों से दूर रहकर थोड़ी-थोड़ी पैसों की बचत करते रहते हैं. इसकी वजह से ही हमारा घर खर्च तो आराम से चलता है. इससे ही छोटा सा मकान भी अपनी कमाई से बनवा लिया और खुद की शादी भी हमने कर ली और बाइक भी इसी तरह से खरीदी थी.

आउटडोर कामों में रहता है खतरा
दीपक आगे कहते हैं कि वह साल भर यही काम करते रहते हैं जो भी नए मकान बनते हैं या फिर पुराने मकान का रेनोवेशन होता है. आजकल लोग पुटी और ट्रेक्चर का काम सबसे अधिक करवाने लगे हैं. इसलिए साल भर काम की कमी नहीं रहती है, बस करने की इच्छा होनी चाहिए. हालांकि, इस काम में रिस्क भी बहुत रहता है क्योंकि जो आउटडोर का काम होता है वह कभी झूला के सहारे करना पड़ता है तो कभी पाड़ बांधना पड़ता है. सुबह से लेकर शाम तक इन पर लटका रहते हैं और काम करते हैं. हर समय जान जोखिम का खतरा रहता है लेकिन भगवान के भरोसे गाड़ी चलती रहती है. दीपक बताते हैं कि हमारे परिवार में माता-पिता के अलावा छोटा भाई है. 3 साल पहले शादी हुई थी, जिसमें दो बच्चे हैं. एक बेटी दो साल की और एक बेटा 6 महीने का है और सब कुछ बढ़िया चल रहा है.



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