बिजनेस छोड़ फिल्मों में रखा कदम, दामाद का करियर बचाने के लिए लूटा दी जीवनभर की जमा-पूंजी, TV शो से हुए मशहूर

बिजनेस छोड़ फिल्मों में रखा कदम, दामाद का करियर बचाने के लिए लूटा दी जीवनभर की जमा-पूंजी, TV शो से हुए मशहूर


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बॉलीवुड का वो एक्टर जिसने टीवी सीरियल से लेकर फिल्मों तक अपनी अलग पहचान बनाई. युसूफ हुस्सैन को हमने ज्यादातर साइड किरदार में ही देखा है. युसूफ हुस्सैन ने सपोर्टिव रोल्स से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई. टीवी सीरियल्स से फिल्मों तक अपनी छाप छोड़ने वाले दिवंगत एक्टर का हंसल मेहता से खास कनेक्शन है. आज उनकी पुण्यतिथि के मौके पर उनकी जिंंदगी के अनसुने पहलुओं के बारे में बताते हैं.

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युसूफ हुस्सैन की आज पुण्यतिथि है. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली. बॉलीवुड की दुनिया में कामयाबी की कई कहानियां हैं लेकिन कुछ किस्से ऐसे होते हैं, जो रिश्तों की अहमियत समझा जाते हैं. ऐसी ही एक कहानी दिवंगत अभिनेता यूसुफ हुसैन की है, जिन्होंने अपनी जिंदगी में कई यादगार किरदार निभाए. टीवी से लेकर फिल्मों तक अपनी पहचान बनाने वाले एक्टर युसूफ हुसैन जितने शानदार कलाकार थे, वो उतने ही बेहतर इंसान भी थे. उन्होंने अपने दामाद हंसल मेहता का करियर बचाने के लिए अपनी जिंदगीभर की जमा-पूंजी दांव पर लगा दी थी.

युसूफ हुसैन ने पर्दे पर भले ही उन्हें ज्यादातर सपोर्टिंग रोल्स अदा किए हैं लेकिन टीवी पर उनका एक ऐसा शो था जिसने उन्हें दर्शकों के बीच अमर बना दिया था. एक्टर ने असल जिंदगी में ऐसा काम किया, जिसे लोग हमेशा याद रखेंगे. जब उनके दामाद और फिल्म निर्देशक हंसल मेहता का करियर मुश्किल दौर से गुजर रहा था, तब यूसुफ हुसैन ने अपनी जिंदगीभर की जमा पूंजी दांव पर लगा दी. उनकी इस मदद से न सिर्फ एक फिल्म पूरी हुई बल्कि हंसल मेहता के करियर को भी नई दिशा मिली.

कपड़ों का बिजनेस छोड़ पकड़ी एक्टिंग की राह

यूसुफ हुसैन का जन्म 21 जनवरी 1948 को हुआ था. उन्होंने अपनी जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव देखे. अभिनय की दुनिया में आने से पहले वह लखनऊ में कपड़ों का कारोबार करते थे. उनमें एक्टिंग का कीड़ा कुछ ऐसा घूसा कि उन्होंने कपड़ों का बिजनेस छोड़ फिल्मी राह पकड़ ली. यूसुफ हुसैन ने साल 2002 में आई फिल्म ‘दिल चाहता है’ में आमिर खान के पिता की भूमिका निभाई. इसके बाद उन्होंने ‘धूम 2’, ‘कृष 3’, ‘ओएमजी : ओह माय गॉड’ और ‘रईस’ जैसी फिल्मों में काम किया.

‘कुमकुम’ से बनाई पहचान

फिल्मों के अलावा यूसुफ टेलीविजन की दुनिया में भी सक्रिय रहे. वह ‘सीआईडी’ जैसे लोकप्रिय शो में नजर आए और ‘कुमकुम : प्यारा सा बंधन’ जैसे सीरियल के जरिए घर-घर तक पहुंचे. यूसुफ हुसैन की जिंदगी का एक महत्वपूर्ण किस्सा उनके दामाद हंसल मेहता की फिल्म ‘शाहिद’ से जुड़ा है.

हंसल मेहता की फिल्म ‘शाहीद’ वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता शाहिद आजमी की जिंदगी पर आधारित थी. हंसल मेहता इस कहानी को बड़े पर्दे पर लाना चाहते थे, लेकिन फिल्म बनाना उनके लिए आसान नहीं रहा. फिल्म की शुरुआती शूटिंग के दो शेड्यूल पूरे हो चुके थे. इसके बाद आर्थिक परेशानियों ने पूरी परियोजना को मुश्किल में डाल दिया. फिल्म को पूरा करने के लिए पैसों की जरूरत थी लेकिन इंतजाम नहीं हो पा रहा था.

दामाद पर लूटा दी सारी जमा-पूंजी

हंसल मेहता के सामने सवाल था कि आखिर वह फिल्म की बची हुई शूटिंग कैसे पूरी करें.यह उनके करियर का बेहद कठिन दौर था. फिल्म अधूरी रह जाने का डर था और उन्हें लगने लगा था कि शायद उनका करियर भी खत्म हो सकता है. ऐसे समय में अक्सर लोग साथ छोड़ देते हैं लेकिन यूसुफ हुसैन ने अपने दामाद का हौसला टूटने नहीं दिया.

हंसल मेहता को दिलाया नेशनल अवॉर्ड

जब यूसुफ हुसैन को हंसल मेहता की परेशानी के बारे में पता चला, तो उन्होंने बिना देर किए उनकी मदद करने का फैसला किया. उन्होंने अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) की रकम इस्तेमाल करने की पेशकश की और हंसल को चेक सौंप दिया. उनकी मदद से फिल्म की बची हुई शूटिंग पूरी हो सकी. बाद में इस फिल्म के लिए हंसल मेहता को सर्वश्रेष्ठ निर्देशन का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला. 30 अक्टूबर 2021 को यूसुफ हुसैन का निधन हो गया. आज वो भले ही हमारे बीच मौजूद नहीं हैं लेकिन उनकी फिल्में उनकी विरासत को हमेशा जिंदा रखेंगी.



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