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इंडिगो का रेवेन्यू सितंबर तिमाही में बढ़ा और पिछले साल के मुकाबले घाटा घटा है. लेकिन लगातार तीसरी तिमाही में नुकसान बताता है कि कंपनी की वित्तीय स्थिति में सुधार की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है. निवेशकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि आने वाली तिमाहियों में एयरलाइन घाटे से निकलकर मुनाफे में कब लौटती है.
indigo के दूसरी तिमाही के नतीजे आए हैं.
IndiGo Q2 Results: देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो की कमाई में अच्छी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन कंपनी अब भी घाटे से जूझ रही है. फाइनेंशियल ईयर 2026-27 की दूसरी तिमाही में कंपनी को 1,879 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. हालांकि, पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले घाटा कम हुआ है. कंपनी की पैरेंट फर्म इंटरग्लोब एविएशन ने गुरुवार को सितंबर तिमाही के नतीजे जारी किए.
इंडिगो के लिए सितंबर तिमाही के नतीजे मिले-जुले रहे. एक तरफ कंपनी की कमाई बढ़ी, तो दूसरी तरफ वह मुनाफे में वापसी नहीं कर सकी. जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान कंपनी को 1,879 करोड़ रुपये का घाटा हुआ. इससे पहले वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में इंडिगो को 2,581.7 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था. यानी सालाना आधार पर कंपनी का घाटा कम हुआ है. इसके बावजूद लगातार तीसरी तिमाही में नुकसान दर्ज होना कंपनी के लिए चिंता का विषय है. कंपनी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती घाटे को पूरी तरह खत्म करके मुनाफे की राह पर लौटने की है.
रेवेन्यू में करीब 26% का उछाल
इंडिगो के नतीजों में सबसे अच्छी बात परिचालन से होने वाली कमाई में बढ़ोतरी है. सितंबर तिमाही में कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू सालाना आधार पर 25.9 फीसदी बढ़कर 23,364 करोड़ रुपये हो गया. पिछले साल की समान तिमाही में यह आंकड़ा 18,555.3 करोड़ रुपये था.
इस बढ़ोतरी से संकेत मिलता है कि कंपनी के कारोबार का आकार बढ़ रहा है. यात्रियों की मांग और उड़ानों से होने वाली आय एयरलाइन के रेवेन्यू को सहारा दे सकती है. हालांकि, केवल कमाई बढ़ने से कंपनी का मुनाफे में आना तय नहीं होता. इसके लिए खर्चों पर नियंत्रण भी जरूरी है.
मुनाफे में वापसी के लिए क्या हैं चुनौतियां?
एयरलाइन कारोबार में विमान ईंधन, विमानों के रखरखाव, कर्मचारियों, एयरपोर्ट शुल्क और दूसरे परिचालन खर्चों की बड़ी भूमिका होती है. इनमें बढ़ोतरी होने पर कंपनी की कमाई बढ़ने के बावजूद मुनाफे पर दबाव बना रह सकता है.
इंडिगो के लिए भी अब यही सवाल अहम है कि बढ़ते रेवेन्यू का कितना हिस्सा आखिरकार मुनाफे में बदल पाता है. ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव और परिचालन लागत कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं.