बिहार की मिट्टी में भी होगा संतरे का बंपर उत्पादन, 2 साल में तैयार होगा पेड़
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Jahanabad Orange Farming: हमारा देश कृषि प्रधान है. यहां बड़ी संख्या में किसान जीविकोपार्जन के लिए खेती-बाड़ी ही करते हैं. यहां आप किसानों को साल भर खेतों में ही कार्य करते देखेंगे. हालांकि, यहां हर इलाके की मिट्टी और जलवायु के लिहाज से खेती का स्वरूप बदल जाता है. साथ ही वहां की फसलें भी बदल जाती है. ऐसे में बिहार में खेती बाड़ी का तौर तरीका अन्य राज्यों से अलग है. यहां के किसान प्रदेश की मिट्टी और जलवायु को देखकर हर सीजन के हिसाब से फसल की बुआई करते हैं. हालांकि, बदलते समय के साथ कुछ दूसरों प्रदेशों की फसलें भी राज्य में लगने लगी हैं. भले ही उसको यहां के वातावरण के हिसाब से तैयार किया गया हो.
इसी कड़ी में जहानाबाद में संतरे के पौधे भी नर्सरी में बिकना शुरू हो गए हैं. जिला मुख्यालय के कनौदी में स्थित ग्रीन सिटी नर्सरी के संचालक सत्येंद्र नारायण सिंह का कहना है कि संतरे के पौधों की मांग शहर में काफी ज्यादा है. कुछ लोग बहुत शौक से ले जाना पसंद करते हैं तो कई लोग बिजनेस के उद्देश्य से ज्यादा संख्या में पौधे घर ले जा रहे हैं. बढ़ती मांग के चलते ही अपने नर्सरी में 50 पेड़ संतरा के रखे हुए हैं. मांग बढ़ेगी तो और अधिक मंगाएंगे. जहानाबाद और पटना की सीमा पर बसे शहर मसौढ़ी में एक शिक्षक अभी संतरा और मौसमी के 50 से अधिक पेड़ अपने बगीचे में लगा रखे हैं, जिसमें अब फल भी आने लगा है.
संतरा की खेती के फायदे गिनाते हुए सत्येंद्र नारायण ने लोकल 18 से बताया कि इस फसल की खेती करने से अच्छी कमाई हो सकती है. हमारे पास मगध क्षेत्र की जलवायु के अनुसार संतरे की वैरायटी है, जिसका उत्पादन क्षमता बहुत अच्छा है. करीब 2 साल में पेड़ बेहतर ढंग से तैयार हो जाता है.
इसके बाद एक पेड़ से एक सीजन में 5 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है. वहीं, एक साल में 2 बार फल लगता है. संतरे में फलन का एक सीजन मार्च -अप्रैल और दूसरा सितंबर -अक्टूबर होता है. मार्केट में कितनी भी उपलब्धता क्यों न हो जाए? इस फल की कीमत कम नहीं होती है.
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ऐसे में उनका मानना है कि संतरे की फसल से बेहतर आमदनी ले सकते हैं. कम से कम बाजार में 40 रुपए किलो तक बिकता ही है. कई लोगों की यह शिकायत रहती है कि पौधा नर्सरी से महंगा खरीदकर ले जाते हैं, लेकिन सुख जाता है तो उन लोगों को यह सलाह रहेगी कि आप अपने पौधे को लगाने से पहले मिट्टी के बारे में जरूर पता करें.
मिट्टी बलुआही रहेगी तो फलन में कमी नहीं आएगी और पौधे भी नहीं खराब होंगे. साथ ही जैविक खाद का इस्तेमाल हमेशा करते रहें. पहली बार मिट्टी के साथ जैविक खाद को मिलाना होगा. इसके बाद 15 दिन में एक बार जैविक खाद का प्रयोग करना होगा. साथ ही पानी को हिसाब से पौधे में देना जरूरी है.