पाकिस्तान के कराची पोर्ट पर पिछले 7 महीनों से एक ईरानी कार्गो जहाज खड़ा है, और उसमें फंसे हैं 6 बेकसूर भारतीय नागरिक. न उनकी कोई गलती है, न ही उन्होंने कोई जुर्म किया है, लेकिन फिर भी वो अपने ही जहाज में कैद होकर रह गए हैं. एक ईरानी शिपिंग कंपनी और पाकिस्तान के कराची पोर्ट अधिकारियों के बीच चले व्यावसायिक विवाद का खामियाजा इन निर्दोष सीफारेअर्स को भुगतना पड़ रहा है. जहाज की बिजली काट दी गई है, खाना और पानी खत्म होने के कगार पर है और सभी के पासपोर्ट तक जब्त कर लिए गए हैं.
ओमान से कराची तक का सफर और फिर ‘कैद’
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के रहने वाले 35 वर्षीय विनीत किशोर मिश्रा पिछले 10 सालों से मर्चेंट नेवी में बतौर चीफ ऑफिसर काम कर रहे हैं. 25 फरवरी 2026 को उन्होंने ईरानी जनरल कार्गो शिप ‘KEVER’ को जॉइन किया था. ईरान और ओमान के समुद्री रास्तों से सामान ले जाते हुए ये जहाज 17 अप्रैल 2026 को पाकिस्तान के कराची पोर्ट पर पहुंचा.
विनीत और उनके साथ मौजूद 5 अन्य भारतीय सहकर्मियों का 6 महीने का कॉन्ट्रैक्ट था, जो अगस्त में खत्म हो चुका है. नियम के मुताबिक उन्हें अगस्त में ही जहाज से साइन-ऑफ यानी रिटायर होकर वतन लौटना था. लेकिन जैसे ही जहाज कराची पोर्ट पर उतरा, ईरानी कंपनी और कराची पोर्ट अथॉरिटी के बीच किसी पुराने विवाद को लेकर ठन गई. कराची पोर्ट ने जहाज को वहीं जब्त कर लिया, चालक दल के सभी पासपोर्ट और सीमन बुक्स जमा करा लिए और उन्हें जहाज से उतरने पर बैन लगा दिया.
बिना बिजली के काला समंदर: 3 महीने से ‘ब्लैकआउट’ और दाने-दाने को तरसते सीफारेअर्स
इस विवाद के बाद कराची पोर्ट प्रशासन ने संवोदनहीनता की सारी हदें पार कर दीं. पोर्ट ने जहाज की पावर सप्लाई पूरी तरह काट दी और ईंधन खत्म हो गया.
- अंधेरे में जिंदगी: पिछले तीन महीनों से ये जहाज पूरी तरह ब्लैकआउट में खड़ा है. न पंखे चल रहे हैं, न ही AC. उमस और अंधेरे के बीच 6 भारतीय उसी लोहे के विशालकाय केबिन में रहने को मजबूर हैं.
- खाने और पानी का संकट: जहाज पर रसद लगभग खत्म हो चुकी है. सुबह सिर्फ दो बिस्कुट मिलते हैं, दोपहर का खाना शाम 4 बजे और रात का खाना 11 बजे नसीब होता है.
- संपर्क की पाबंदी: जहाज पर कोई मोबाइल नेटवर्क नहीं है. 15 से 20 दिनों में जब कभी पोर्ट से कोई छोटी-मोटी सुविधा मिलती है, तो जहाज पर फंसे लोग एक-दो मिनट के लिए ही अपने परिवार से बात कर पाते हैं.
भारत-पाक तनाव और इंटरनेशनल मैरीटाइम लॉ की धज्जियां
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि क्या पाकिस्तान अपनी द्विपक्षीय खुन्नस और कूटनीतिक कड़वाहट की वजह से इन भारतीय नागरिकों से खुन्नस निकाल रहा है? अगर ऐसा है तो पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून और मैरीटाइम लेबर कन्वेंशन (MLC 2006) की धज्जियां उड़ा रहा है, जिसका उसे खामियाजा भी भुगतना पड़ेगा.
- सीफारेअर्स के अधिकार: अगर किसी शिपिंग कंपनी और पोर्ट अथॉरिटी या किसी वित्तीय संस्था के बीच कोई कर्मशियल या लीगल विवाद होता है, तो उसके लिए जहाज के चालक दल (Crew) को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.
- पासपोर्ट जब्ती अवैध: सीफारेअर्स को मानवीय आधार पर भोजन, पीने का पानी, बिजली और चिकित्सा सुविधाएं देना पोर्ट स्टेट की बाध्यता होती है. किसी का पासपोर्ट और सीमन बुक जब्त करके उसे अवैध रूप से बंधक बनाना मानवाधिकारों का सीधा उल्लंघन है.
- सुरक्षित साइन-ऑफ: जब क्रू का कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो जाता है, तो पोर्ट अधिकारियों का ये फर्ज है कि वो उन्हें उनके देश वापस भेजने की इजाजत दें, चाहे जहाज का मामला कोर्ट में ही क्यों न लंबित हो.
लेकिन पाकिस्तान का कराची पोर्ट प्रशासन अंतर्राष्ट्रीय नियमों को ताक पर रखकर इन 6 भारतीयों का पासपोर्ट दबाकर बैठा है.
कैसे होगी भारतीय नाविकों की रिहाई?
प्रयागराज के विनीत मिश्रा और उनके 5 साथियों का मामला अब साधारण सर्विस विवाद नहीं रहा, बल्कि ये एक हाई-प्रोफाइल कूटनीतिक मुद्दा बन चुका है.
- इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग का दखल: विदेश मंत्रालय और इस्लामाबाद में मौजूद भारतीय दूतावास को पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय (MOFA) के सामने इस मुद्दे को तुरंत और सख्ती से उठाना होगा.
- IMO (अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन) का दबाव: चूंकि जहाज पर बिजली नहीं है और क्रू की जान को गंभीर खतरा है, भारत सरकार ‘इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन’ (IMO) और ‘इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन’ (ITF) के जरिए पाकिस्तान पर दबाव बनवा सकती है.
- इमरजेंसी कॉन्सुलर एक्सेस: भारत को तुरंत अपने सीफारेअर्स के लिए कॉन्सुलर एक्सेस यानी दूतावास के अधिकारियों की मुलाकात की मांग करनी चाहिए, ताकि उन्हें भोजन, पानी और दवाइयां मुहैया कराई जा सकें और उनका साइन-ऑफ कराया जा सके.
6 बेकसूर भारतीय, कराची पोर्ट के अंधेरे में फंसे जहाज पर बिना बिजली, बिना भरपेट खाने के हर पल खौफ में बिता रहे हैं. दो मासूम बच्चे भारत में अपने पिता का इंतजार कर रहे हैं. कंपनियां और पोर्ट अपने बिजनेस के झगड़े निपटाते रहेंगे, लेकिन किसी निर्दोष नागरिक की जिंदगी को दांव पर नहीं लगाया जा सकता.