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मंडी के चाय विक्रेता हरजिंदर सिंह लकड़ी के वेस्ट मटेरियल से बेहतरीन मॉडल तैयार कर रहे हैं. बचपन के शौक को पूरा करते हुए वह घंटाघर और स्वर्ण मंदिर जैसी कलाकृतियां बना चुके हैं.
मंडी. आप और हम लकड़ी के वेस्ट मटेरियल को हमेशा इसी नजरिए से देखते हैं कि यह जलाने के काम आ जाएगा. लेकिन छोटी काशी मंडी में एक चाय वाला ऐसा भी है, जो इस वेस्ट मटेरियल का बेस्ट इस्तेमाल करके अपनी कलाकारी को नए आयाम तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है.
जानकारी के अनुसार, छोटी काशी मंडी के जेल रोड़ का 50 वर्षीय हरजिंदर सिंह परिवार का पालन पोषण करने के लिए चाय की दुकान चलाता है. वर्षों से हरजिंदर इसी काम से अपनी आजीविका कमा रहा है. लेकिन जब आप हरजिंदर के हुनर के बारे में जानेंगे तो दंग रह जाएंगे. हरजिंदर सिंह लकड़ी के वेस्ट मटेरियल से कलाकारी करके ऐसे-ऐसे मॉडल बनाता है जिनके बारे में आप सोच भी नहीं सकते.
हरजिंदर सिंह ने बताया कि उसे बचपन से ही आर्ट का काफी शौक था. लेकिन परिवार की परिस्थितियों के चलते वह अपने इस शौक को आगे नहीं बढ़ा पाया. 15 वर्ष पूर्व जब एक दोस्त के पिता को उपहार में मिले मॉडल को देखा तो उससे बेहतरीन मॉडल बनाने की कसक मन में उठी. वहीं से हरजिंदर ने अपने हुनर को तराशना शुरू किया. सबसे पहले मंडी शहर के ऐतिहासिक घंटाघर का मॉडल बनाया और बाद में इसके इर्द-गिर्द पूरी मार्किट भी बना डाली. इसके अलावा पराशर ऋषि, स्वर्ण मंदिर और हालही में जालपा माता मंदिर सहित करीब आधा दर्जन मॉडल अभी तक बना चुका है.
एक मॉडल को बनाने में लग जाता है एक साल
हरजिंदर ने बताया कि इस काम में मेहनत बहुत अधिक लगती है. एक मॉडल को पूरी तरह से तैयार करने में कम से कम 6 महीने या एक साल का समय लग जाता है. दुकान के दौरान या फिर बाद में जब भी समय मिलता है, वह इस कार्य को धीरे-धीरे आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है. हरजिंदर को मलाल है कि उन्हें अभी तक अपने इस हुनर को प्रदर्शित करने के लिए कोई मंच नहीं मिल पाया है. अगर स्पोर्ट मिले तो वह अपने इस हुनर को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक ले जाने का मादा रखता है.
बारिकी से काम करने में है विश्वास
हरजिंदर सिंह के काम को अगर ध्यान से देखें तो वह सिर्फ एक ढांचा मात्र खड़ा करके मॉडल नहीं बना रहा बल्कि उसमें बारीकी से काम भी कर रहा है. जो भी मॉडल हरजिंदर बनाता है उसकी हूबहू कॉपी बनाने के लिए बारीकी से काम करता है. छोटी-छोटी चीजों को उकेरने में और उन्हें पूरी तरह से उभारने में कोई कसर नहीं छोड़ता है. ऐसे कलाकारों को आज जरूरत है प्रोत्साहन की, ताकि वे अपनी कला के माध्यम से अपने क्षेत्र का नाम और रोशन कर सकें.