Vishwakarma Jayanti 2026 Today story behind 5 temples built in one night | एक ही रात में 5 मंदिरों का निर्माण, आखिर क्यों विश्वकर्मा के मंदिर निर्माण

Vishwakarma Jayanti 2026 Today story behind 5 temples built in one night | एक ही रात में 5 मंदिरों का निर्माण, आखिर क्यों विश्वकर्मा के मंदिर निर्माण


Vishwakarma Jayanti 2026 Today: हिंदू धर्म में वास्तुकार, इंजीनियर और शिल्पकार माने जाने वाले भगवान विश्वकर्मा की जयंती देशभर में धूमधाम से मनाई जा रही है. जिस दिन सूर्य देव कन्या राशि में गोचर करते हैं, उस तिथि को कन्या संक्रांति के नाम से जाना जाता है और इसी शुभ दिन पर विश्वकर्मा जयंती मनाई जाती है. भगवान विश्वकर्मा जयंती हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक महत्व रखने वाला पर्व है. इस शुभ अवसर पर विश्वकर्माजी की पूजा विधि विधान से करते हैं, इसके अलावा मशीन, औजार, दुकान, वाहन आदि की भी पूजन किया जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा ने भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र, शिवजी के त्रिशूल और पुष्पक विमान के साथ देवघर स्थित बाबा वैद्यनाथ मंदिर का भी निर्माण किया था. लेकिन क्या आप जानते हैं विश्वकर्मा की वजह भगवान विष्णु को मुर्गे का रूप लेना पड़ा. आइए जानते हैं ऐसा क्यों हुआ…

एक ही रात में 5 मंदिरों का निर्माण
बाबा वैद्यनाथ धाम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं. कहा जाता है कि भगवान विश्वकर्मा ने इस मंदिर का निर्माण किया था. मान्यता है कि देवताओं ने जंगल से घिरे इस स्थान पर मंदिर स्थापना का निर्णय लिया और देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई थी. भगवान विश्वकर्मा ने एक रात में इस मंदिर सहित पांच मंदिरों का निर्माण किया था.

सबसे पहले भोलेनाथ का मंदिर बनाया
भगवान विश्वकर्मा ने सबसे पहले भोलेनाथ का मंदिर बनाया था. इसके बाद मां पार्वती के मंदिर का निर्माण किया. इसके बाद भगवान गणेश और संध्या मंदिर को बनाया. इन सभी मंदिरों को बनाने के बाद भगवान विश्वकर्मा खुद के लिए सबसे बड़ा और भव्य मंदिर का निर्माण करने लगे. मान्यता है कि उनके ऐसा करने से देवताओं को चिंता हो गई कि भगवान विश्वकर्मा भोलेनाथ के मंदिर से बड़ा स्वयं का मंदिर कैसे बना सकते हैं?

भगवान विष्णु ने लिया मुर्गे का रूप
मान्यता है कि भगवान विष्णु ने मुर्गे का रूप धारण करके समय से पहले ही बांग कर दी. मुर्गे की आवाज सुनकर भगवान विश्वकर्मा को लगा कि सुबह हो गई है और एक रात में मंदिर निर्माण का संकल्प अधूरा रह गया. वह मंदिर आज भी अधूरा है, जिसको लक्ष्मी नारायण मंदिर के नाम से जाना जाता है. पौराणिक मान्यता है कि नारद मुनि ने भोलेनाथ को इसकी जानकारी दी थी कि विश्वकर्मा खुद के मंदिर को भव्य तरीके से बना रहे हैं, तो भोलेनाथ ने उस मंदिर को अपने अंगूठे से दबा दिया था.

विश्वकर्मा पूजा शुभ मुहूर्त 2026
कन्या संक्रांति पुण्य काल: सुबह 07:58 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक मुख्य समय
सुबह का मुहूर्त: सुबह 07:58 बजे से सुबह 10:43 बजे तक
दोपहर का मुहूर्त (चर-लाभ-अमृत): सुबह 10:12 बजे से दोपहर 02:47 बजे तक
अमृत चौघड़िया: दोपहर 12:16 से 01:48 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक
शाम का मुहूर्त: शाम 04:52 बजे से शाम 06:24 बजे तक

राहुकाल (इस दौरान पूजा ना करें)
दोपहर: 01:48 बजे से दोपहर 03:20 बजे तक

विश्वकर्मा ने किए भव्य भवन, अस्त्र-शस्त्र और दिव्य नगरों का निर्माण
बाबा वैद्यनाथ मंदिर ना सिर्फ 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है बल्कि यह कई मान्यताओं एवं रहस्यों का केंद्र है. इस तरह से भगवान विश्वकर्मा ने एक ही रात में 5 मंदिरों का निर्माण किया था. मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा ने देवताओं के लिए भव्य भवनों, अस्त्र-शस्त्रों और दिव्य नगरों का निर्माण किया था. इसी कारण उन्हें निर्माण, वास्तुकला, शिल्पकला और तकनीकी कौशल का देवता माना जाता है. विश्वकर्मा जयंती के दिन विशेष रूप से कारखानों, कार्यस्थलों, औजारों, मशीनों और निर्माण से जुड़ी वस्तुओं की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से कार्य में सफलता, समृद्धि और उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है.



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