UP Chunav 2027: कीर्ति कश्यप कौन हैं जिन्हें अखिलेश यादव ने बिथरी चैनपुर से बनाया प्रत्याशी, समझें इसके पीछे की राजनीति

UP Chunav 2027: कीर्ति कश्यप कौन हैं जिन्हें अखिलेश यादव ने बिथरी चैनपुर से बनाया प्रत्याशी, समझें इसके पीछे की राजनीति


सियासत में जब इज्जत पर बात आती है, तो रास्ते खुद-ब-खुद बदल जाते हैं. बरेली की राजनीति में भी कुछ ऐसा ही बड़ा राजनीतिक खेल हुआ है. आंवला के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप और उनकी बेटी कीर्ति कश्यप ने बीजेपी का साथ छोड़ दिया है और समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बड़ा दांव चलते हुए कीर्ति कश्यप को बिथरी चैनपुर विधानसभा सीट (सीट नंबर 130) से उम्मीदवार भी घोषित कर दिया है. इस फैसले के साथ ही साफ हो गया है कि मामला सिर्फ पार्टी बदलने का नहीं, बल्कि सम्मान और 2027 के विधानसभा चुनाव की पूरी तैयारी का है.

क्यों चर्चा में है यह पूरा मामला?

आंवला सीट से पूर्व सांसद रहे धर्मेंद्र कश्यप और उनकी बेटी कीर्ति कश्यप अब समाजवादी पार्टी के साथ आ गए हैं. लखनऊ पहुंचकर बरेली से आए सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने सपा की सदस्यता ली, जिससे पार्टी को इलाके में नया चेहरा और मजबूत सियासी समीकरण मिला है. पार्टी बदलने की वजह पूछने पर कीर्ति कश्यप ने साफ शब्दों में कहा, ‘कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना… जहां सम्मान नहीं, वहां रहना नहीं.’

कीर्ति कश्यप का कहना है कि उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव का रिजल्ट आने के तुरंत बाद से ही विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी थीं.

कीर्ति कश्यप का अपना परिचय क्या है?

कीर्ति कश्यप की अपनी कोई खास सामाजिक पहचान नहीं है. फिलहाल वह पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप की बेटी के तौर पर ही जानी जाती हैं. लॉ की डिग्री हासिल करने के बाद कीर्ति ने क्षेत्र में कई सामाजिक कार्यों में हिस्सा लेती रही हैं, लेकिन वहां भी वह पिता के प्रतिनिधि के तौर पर ही पहचान बना पाईं. पिता धर्मेंद्र कश्यप भी कीर्ति को कई कार्यक्रमों में अपने साथ ले जाते रहे हैं.

पीडीए और सामाजिक समीकरण का दांव

अखिलेश यादव का मानना है कि धर्मेंद्र कश्यप और अन्य नेताओं के आने से बरेली ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों और पूरे उत्तर प्रदेश में पार्टी की ताकत बढ़ेगी. सपा लगातार पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) वर्गों को जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है. ऐसे में कश्यप परिवार की पार्टी में एंट्री को इसी रणनीति का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है.

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि समाजवादी पार्टी ने सबसे पहले अयोध्या से पवन पांडे को आगामी विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाने की घोषणा की थी. अखिलेश यादव आगामी चुनाव में किसी भी तरह से ब्राह्मणों को अपने साथ लाना चाहते हैं. इसलिए उन्होंने पीडीए में ‘पी का मतलब ‘पंडित’ भी बताया. अब उन्होंने कीर्ति कश्यप को पार्टी में लेने के साथ ही उन्हें बिथरी चैनपुर विधानसभा सीट से प्रतयाशी बनाए जाने की घोषणा कर दी. यानी कीर्ति पीडीए में पिछड़ा की प्रतिनिधि हैं. अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि P से पंडित और पिछड़ा प्रत्याशी तो घोषित हो गए, लेकिन D और A वाले प्रत्याशी कब आएंगे.

दूसरी तरफ, धर्मेंद्र कश्यप ने योगी सरकार पर निशाना साधते हुए कश्यप समाज के लोगों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं. वहीं, पार्टी छोड़ने और नेताओं के फिर से पाला बदलने के सवाल पर सपा का कहना है कि जो लोग आ रहे हैं, उन्हें पूरा सम्मान और पीडीए की ताकत दी जाएगी ताकि वे पार्टी छोड़कर न जाएं.

अब आगे क्या?

टिकट का ऐलान हो चुका है और सियासी मैदान सज चुका है. बिथरी चैनपुर सीट पर कीर्ति कश्यप के सामने अपनी पुरानी पार्टी (बीजेपी) के गढ़ में कड़ी चुनौती पेश करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी. राजनीति में केवल एलान करने या टिकट मिलने से जीत नहीं मिलती, बल्कि जनता का भरोसा जीतना पड़ता है. वोटर की अदालत में हर दावे और हर फैसले का हिसाब जरूर होता है.



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