Last Updated:
High-Tech Mechanised Laundry Facility : यमुना किनारे कपड़े धोने के लिए घंटों मेहनत करने और रेत पर कपड़े सुखाने की परेशानी अब जल्द खत्म हो सकती है. आगरा के छलेसर में नगर निगम ने 1.90 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक धोबीघाट तैयार किया है. यहां मशीनों से कपड़े धुलेंगे और ड्रायर से सुखाए भी जाएंगे. इससे समय और मेहनत बचेगी.
आगरा में बना हाईटेक धोबीघाट. (ai image)
आगरा: यमुना किनारे कपड़े धोने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर है. अब कपड़े धोने के लिए देग में पानी गर्म करने और नदी किनारे रेत पर कपड़े सुखाने की परेशानी से छुटकारा मिल सकता है. नगर निगम ने छलेसर में 1.90 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक धोबीघाट तैयार किया है. यहां मशीनों से कपड़े धुलेंगे और ड्रायर की मदद से उन्हें सुखाया भी जा सकेगा. इससे लोगों का समय और मेहनत दोनों बचेंगे. साथ ही यमुना नदी को प्रदूषण से बचाने में भी मदद मिलेगी. फिलहाल धोबीघाट का ट्रायल चल रहा है और दिवाली के आसपास इसे शुरू करने की योजना है.
अब घंटों की मेहनत होगी कम
अब तक धोबी समाज के लोगों को कपड़े धोने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती थी. पानी गर्म करने से लेकर कपड़ों को धोने और फिर नदी किनारे सुखाने तक में काफी समय लगता था. छलेसर में बने नए धोबीघाट से यह काम आसान हो सकता है. यहां तीन बड़ी वॉशिंग मशीनें लगाई गई हैं, जिनकी मदद से एक घंटे में करीब 200 किलो कपड़े धोए जा सकेंगे. इससे एक साथ ज्यादा कपड़ों की धुलाई हो सकेगी और लोगों की मेहनत भी कम होगी.
रेत पर नहीं करना पड़ेगा इंतजार
यमुना किनारे कपड़े धोने वाले लोगों के सामने सबसे बड़ी परेशानी कपड़ों को सुखाने की होती है. मौसम खराब होने या धूप नहीं निकलने पर कपड़े सुखाने में ज्यादा समय लगता है. नए धोबीघाट में इस समस्या का भी समाधान किया गया है. यहां कपड़ों से पानी निकालने के लिए हाइड्रो एक्सट्रेक्टर और सुखाने के लिए टंबल ड्रायर लगाया गया है. इसके अलावा कपड़ों को प्रेस करने के लिए वैक्यूम आयरनिंग टेबल और मैनुअल आयरनिंग टेबल भी उपलब्ध होंगी.
यमुना को गंदा होने से बचाने की तैयारी
यमुना नदी में कपड़ों की धुलाई और रंगाई के बाद निकलने वाला गंदा पानी प्रदूषण की एक वजह बनता है. इससे नदी के पानी की गुणवत्ता पर असर पड़ता है. इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने यह आधुनिक धोबीघाट तैयार कराया है. यहां मशीनों से निकलने वाले डिटर्जेंट वाले पानी को ट्रीट करके छोड़ा जाएगा, ताकि गंदा पानी सीधे यमुना में न पहुंचे. इससे नदी को साफ रखने की कोशिशों को मदद मिल सकती है.
आम लोगों को कितना देना होगा शुल्क?
इस धोबीघाट का इस्तेमाल करने के लिए लोगों को बहुत ज्यादा पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे. नगर निगम इसे नो प्रॉफिट-नो लॉस की नीति पर चलाने की तैयारी कर रहा है. यानी इसका उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि सुविधा उपलब्ध कराना होगा. बिजली समेत संचालन पर होने वाले खर्च को ध्यान में रखकर मामूली शुल्क तय किया जाएगा. इसके लिए नगर निगम की समिति फैसला लेगी. धुलाई के लिए समय भी निर्धारित किया जाएगा, ताकि धोबी समाज के लोग अपनी सुविधा के अनुसार इसका इस्तेमाल कर सकें.
दिवाली के आसपास शुरू हो सकती है सुविधा
नगर निगम के नगर आयुक्त संतोष कुमार वैश्य के मुताबिक, पांच बार टेंडर की प्रक्रिया के बाद धोबीघाट के संचालन की व्यवस्था तय हो पाई है. फिलहाल यहां मशीनों का ट्रायल चल रहा है. ट्रायल के दौरान सामने आने वाली दिक्कतों को दूर किया जा रहा है. योजना है कि दिवाली के आसपास इसे शुरू कर दिया जाए. इसके चालू होने से धोबी समाज के लोगों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी और यमुना किनारे कपड़े धोने की निर्भरता भी कम हो सकेगी.