न फंड का इंतजार, न रीलबाजी का शौक…तालाब साफ करने निकली युवाओं की टोली

न फंड का इंतजार, न रीलबाजी का शौक…तालाब साफ करने निकली युवाओं की टोली


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Balaghat News: युवकों ने लोकल 18 से कहा कि विसर्जन के दौरान तालाब के घाट पर गंदगी पसर जाती है, जिससे यहां आने वाले लोगों के साथ हादसा हो सकता है. घाट की सफाई से अपने ही गांव के लोग सुरक्षित होते हैं.

बालाघाट. बीते कुछ सालों में दुनियाभर में औद्योगीकरण तेज हुआ है. इससे विकास जरूर हुआ है और कथित रूप से मानव का जीवन आसान हुआ है. वहीं इसका दूसरा पहलू यह है कि धरती पर तेजी से प्रदूषण बढ़ा है. खासतौर से जल प्रदूषण. नदी हो या तालाब सब प्रदूषित हो रहे हैं. ऐसे में तीज-त्योहारों में नदियों में विसर्जन होते हैं. इसके बाद नदियों का वातावरण कुछ हद तक बदल जाता है. मध्य प्रदेश के बालाघाट से 10 किलोमीटर दूर पाथरवाड़ा गांव के कुछ युवकों ने अनोखी मिसाल पेश की है. युवकों ने न तो सरकारी फंड का इंतजार किया और न ही सोशल मीडिया पर रीलबाजी का दिखावा किया. वे विसर्जन के बाद तालाब की सफाई के लिए निकल पड़े. उनके काम को देख अब हर कोई युवकों की तारीफ कर रहा है.

आपने देखा होगा देशभर में बिट्टू तबाही का नाम रोशन हुआ. एक अजनार नदी को साफ करने के लिए अकेला निकल पड़ा और यह मुमकिन भी कर दिखाया. ऐसे में बालाघाट के कुछ युवकों ने उसी राह की ओर कदम बढ़ाया.

विसर्जन के बाद फैल जाती है गंदगी
बालाघाट के पाथरवाड़ा गांव के युवकों ने लोकल 18 को बताया कि पहले गणेश उत्सव और उसके बाद नवरात्रि (दुर्गा पूजा) में धार्मिक रीति-रिवाज के मुताबिक विसर्जन की प्रथा है. ऐसे में ग्रामीण अंचलों में मिट्टी की ही प्रतिमा बनाई जाती है लेकिन भीतर पुआल रहती है. वहीं प्रतिमा के साथ पूजन सामग्री भी रहती है. सभी को गांव के तालाब में विसर्जित किया जाता है. कुछ चीजें पानी में विलय हो जाती है लेकिन कुछ ऐसी चीजें हैं, जो लंबे समय तक तालाब और नदी में पड़ी रहती हैं, जिससे जल स्रोत प्रदूषित हो जाते हैं. इससे पानी में रहने वाले जीव भी प्रभावित होते हैं. जल स्रोतों पर जितना हमारा हक है, उतना ही हक उन जलीय जीवों का भी है. ऐसे में हम हर त्योहार के बाद अपने गांव के तालाब की सफाई करते हैं.

घाट पर गंदगी से होती है परेशानी
गांव के युवकों का यह भी तर्क है कि विसर्जन के दौरान तालाब के घाट पर गंदगी पसर जाती है, जिससे तालाब में आने वाली महिलाओं के साथ हादसा भी हो सकता है. सफाई करने से अपने ही गांव के लोग सुरक्षित होते हैं. ऐसे में सफाई करना उनका पहला दायित्व बन जाता है. गांव के दर्जनभर से ज्यादा युवक घाट की सफाई करते हैं.

न फंड का इंतजार, न ही रीलबाजी का शौक
युवकों का कहना है कि नदी और तालाब को साफ रखना हमारा पहला कर्तव्य होना चाहिए. हमें सरकारी फंड का भी इंतजार नहीं करना चाहिए और न ही किसी के कहने का इंतजार करना चाहिए. युवा अपनी जिम्मेदारी समझते हुए तालाब की सफाई में जुट गए. ग्रामीण उनकी जमकर तारीफ कर रहे हैं.



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