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Dholpur Govt College Heritage Building History: धौलपुर का राजकीय महाविद्यालय 123 साल पुरानी ऐतिहासिक इमारत में संचालित हो रहा है. वर्ष 1903 में महाराजा राना रामसिंह के समय सफेद बलुआ पत्थरों से निर्मित यह भवन कभी ब्रिटिश पॉलिटिकल एजेंट का निवास था. वर्ष 1961 में वकील आरपी मोदी के प्रयासों से यहाँ धौलपुर के पहले सरकारी कॉलेज की शुरुआत हुई. ब्रिटिश स्थापत्य कला, फायर प्लेस और लकड़ी के फर्श वाली यह धरोहर आज जिले में उच्च शिक्षा और नोडल कॉलेज के रूप में हजारों विद्यार्थियों के भविष्य को संवार रही है.
धौलपुर: धौलपुर का राजकीय महाविद्यालय आज पूरे जिले में उच्च शिक्षा का प्रमुख और अग्रणी केंद्र बन चुका है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस ऐतिहासिक इमारत का अतीत बेहद खास और गौरवशाली रहा है. करीब 123 साल पहले, वर्ष 1903 में धौलपुर के महाराजा राना रामसिंह के शासनकाल के दौरान सफेद बलुआ पत्थरों से इस खूबसूरत भवन का निर्माण करवाया गया था. उस दौर में यह इमारत धौलपुर रियासत में तैनात ब्रिटिश सरकार के पॉलिटिकल एजेंट का आधिकारिक सरकारी निवास हुआ करती थी. कालचक्र के बदलने के साथ ही इस इमारत की पहचान भी बदल गई और कभी अंग्रेज अधिकारियों की चहल-पहल का गवाह रहा यह परिसर आज हजारों विद्यार्थियों के सपनों को साकार कर रहा है.
इतिहासकार अरविंद शर्मा बताते हैं कि जिला मुख्यालय पर स्थित यह राजकीय महाविद्यालय धौलपुर की ऐतिहासिक विरासत का एक अनमोल हिस्सा है. इमारत की अनूठी बनावट आज भी ब्रिटिश कालीन वास्तुकला की याद ताजा कर देती है. भवन के कमरों में बने विशेष ‘फायर प्लेस’ (अंगीठी) इसकी अनूठी पहचान हैं, जिनका उपयोग कड़ाके की सर्दियों में कमरों को गर्म रखने के लिए किया जाता था. इसके अलावा इमारत की दूसरी मंजिल पर स्थित पुस्तकालय का लकड़ी का फर्श आज भी अपनी मूल पहचान बनाए हुए है. रियासत काल में अंग्रेज अधिकारी इस कमरे का उपयोग मनोरंजन कक्ष के रूप में किया करते थे. इसकी मजबूत दीवारें, ऊंचे पिलर और ढांचा आज भी अपनी भव्यता बयां करते हैं.
वकील आरपी मोदी की पहल पर 1961 में शुरू हुआ पहला सरकारी कॉलेज
धौलपुर जिले में उच्च शिक्षा की नींव भी इसी ऐतिहासिक इमारत से पड़ी थी. वर्ष 1961 में यहां जिले का पहला सरकारी महाविद्यालय शुरू किया गया. उस समय नया कॉलेज खोलने के लिए राज्य सरकार को 50 हजार रुपये की अग्रिम राशि की आवश्यकता थी. इस शिक्षा यज्ञ में धौलपुर के प्रख्यात वकील आरपी मोदी ने आगे बढ़कर 50 हजार रुपये की राशि एकत्रित की और तत्कालीन मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया को सौंपी. इसके बाद महाविद्यालय की विधिवत शुरुआत हुई और गोविंद राम शर्मा को इसका पहला प्राचार्य नियुक्त किया गया. वर्ष 1967 में यहां विज्ञान संकाय की पढ़ाई भी आरंभ कर दी गई.
नोडल कॉलेज के रूप में लिख रहा है सफलता की नई इबारत
वर्ष 1980 में इस ऐतिहासिक परिसर के भीतर विधि महाविद्यालय (लॉ कॉलेज) की स्थापना की गई, जहां शुरुआती दौर में महज 44 विद्यार्थी अध्ययनरत थे. इतिहासकार अरविंद शर्मा बताते हैं कि वे स्वयं वर्ष 1983 में इस कॉलेज के छात्र रहे हैं और उनके पिता श्याम स्वरूप शर्मा भी यहीं प्रोफेसर थे. समय के साथ-साथ यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या में इतना इजाफा हुआ कि परीक्षाओं के दौरान परिसर में टेंट लगाने पड़ते थे. सफेद बलुआ पत्थरों से बनी 123 साल पुरानी यह विशाल धरोहर आज भी पूरी मजबूती से खड़ी है और धौलपुर जिले में नोडल कॉलेज के रूप में शिक्षा की अलख जगा रही है.