पहले गुरुग्राम फिर लखनऊ… भारत में हर साल होते हैं कितने हिट एंड रन के मामल
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सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार 2024 में भारत में 4,87,707 सड़क दुर्घटनाएं हुईं और 1,77,175 लोगों की मौत हुई. 2024 में इस बाबत देश में नया कानून भी लाया गया है. जिसमें कई सख्त कदम हैं. फिर भी ऐसे मामले लगातार बढ़ रहे हैं. हिट-एंड-रन का मतलब है, किसी वाहन से दुर्घटना होने के बाद चालक का घायल व्यक्ति की मदद किए बिना या पुलिस को सूचना दिए बिना मौके से भाग जाना.
2024 में भारत में 4,87,707 सड़क दुर्घटनाएं हुईं (AI image)
रविवार की सुबह दोस्तों के साथ बाइकिंग पर निकली सिया का 2 घंटे तक पीछे करने के बाद, कल्याण बैंसला को उसकी स्पीड बर्दाश्त नहीं हुई और वो अपनी कार से उसे टक्कर मारकर निकल गया. ये मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि अब लखनऊ में एक लड़के ने अपनी गर्लफ्रेंड को कार से उड़ाया है. लखनऊ में दिनदहाड़े शाहनवाज नाम के लड़के ने अनामिका नाम की युवती को पहले कार के बोनट पर घसीटा और फिर टक्कर मारकर फरार हो गया था. क्या राजधानी और क्या साइबर सिटी, सड़कों पर दौड़ती गाड़िया लोगों को उड़ाने के बाद धड़ल्ले से हवा से बातें करती आगे निकल रही हैं. सड़क हादसों में लोगों को टक्कर मारकर भागने के मामले को Hit & Run कहा जाता है.
भारत में हिट एंड रन के मामले
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार 2024 में भारत में 4,87,707 सड़क दुर्घटनाएं हुईं और 1,77,175 लोगों की मौत हुई. इनमें हिट-एंड-रन दुर्घटनाओं में 34,030 मौतें दर्ज हुईं है. हालांकि नए आपराधिक कानून में ऐसे मामलों के लिए अलग प्रावधान रखा गया है.
हरियाणा के गुरुग्राम में एक महिला बाइक राइडर के साथ हिट एंड रन का मामला सामने आया है.
हिट-एंड-रन का मतलब है, किसी वाहन से दुर्घटना होने के बाद चालक का घायल व्यक्ति की मदद किए बिना या पुलिस को सूचना दिए बिना मौके से भाग जाना. कानून में दो बातें अलग-अलग समझना जरूरी है. पहली स्थिति में चालक दुर्घटना के बाद भाग जाता है, लेकिन पीड़ित बच जाता है. दूसरी स्थिति में चालक की लापरवाही से किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है और वह पुलिस या मजिस्ट्रेट को सूचना दिए बिना मौके से चला जाता है. भारत में 1 जुलाई 2024 से नए आपराधिक कानून लागू हुए. मौत वाली स्थिति के लिए भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धारा 106(2) बनाई गई है. हालांकि, धारा 106(2) को 1 जुलाई 2024 से लागू किए गए BNS के बाकी प्रावधानों के साथ लागू नहीं किया गया था और इसके लागू होने को लेकर अलग सरकारी अधिसूचना की स्थिति रही है. उपलब्ध कानूनी रिपोर्टों के अनुसार, सितंबर 2026 तक यह धारा अभी लागू नहीं हुई है.
दुर्घटना के बाद मदद न करने पर जिम्मेदारी
मोटर वाहन अधिनियम की धारा 134 के तहत दुर्घटना के बाद चालक की जिम्मेदारी है कि वह घायल व्यक्ति को जरूरी मेडिकल हेल्प दिलाने के लिए जरूरी कदम उठाए और पुलिस को सूचना दे. इन कर्तव्यों का पालन न करने पर मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 187 के तहत कार्रवाई हो सकती है. लीगल रिपब्लिक की रिपोर्ट बताती है कि ऐसे मामलों में जहां वाहन या चालक की पहचान नहीं हो पाती, मृतक के परिवार को 2 लाख रुपये और गंभीर चोट के मामले में 50,000 रुपये का मुआवजा दिया जाता है. यह आपराधिक सजा से अलग सहायता व्यवस्था है. इसके अलावा, यदि वाहन और बीमा कंपनी की पहचान हो जाए, तो पीड़ित मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल यानी MACT के माध्यम से अलग मुआवजा क्लमे कर सकता है.