माता शर्मा की जन्मशताब्दी में जुटेंगे 24 हजार लोग, नारी शक्ति के नाम महोत्सव
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Gayatri Pariwar : अखिल विश्व गायत्री परिवार की संस्थापिका माता भगवती देवी शर्मा की जन्मशताब्दी पर 31 अक्टूबर को नई दिल्ली में एक स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट जारी किया जाएगा. गायत्री परिवार के अनुसार इसकी शुरुआत माताजी ने ही की थी. इस अभियान के ज़रिए उन्होंने महिलाओं को घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर समाज में अपनी जगह बनाने और यज्ञ व संस्कार कराने जैसी भूमिकाएँ निभाने के लिए तैयार किया.
भगवती देवी शर्मा की जन्मशताब्दी
Gayatri Pariwar: अखिल विश्व गायत्री परिवार की संस्थापिका माता भगवती देवी शर्मा की जन्मशताब्दी पर एक स्मारक सिक्का और एक विशेष डाक टिकट जारी करने की तैयारी है. गायत्री परिवार के अनुसार इनका विमोचन 31 अक्टूबर को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में शुरू हो रहे तीन दिन के जन्मशताब्दी महोत्सव के पहले दिन प्रस्तावित है. महोत्सव की रूपरेखा बताते हुए शताब्दी समारोह के दलनायक डॉ. चिन्मय पंड्या ने बताया कि पहला दिन माताजी के जीवन, उनकी साधना और महिला सशक्तिकरण में उनके योगदान को समर्पित रहेगा. इसी दिन माताजी की जन्मशताब्दी के अवसर पर स्मारक डाक टिकट और सिक्के के विमोचन की योजना है.
यह पहली बार नहीं है जब गायत्री परिवार से जुड़े किसी व्यक्तित्व को डाक टिकट के ज़रिए याद किया जा रहा हो. 27 जून 1991 को भारतीय डाक विभाग ने माताजी के पति और गायत्री परिवार के संस्थापक पं. श्रीराम शर्मा आचार्य की याद में एक रुपये का डाक टिकट जारी किया था. तब डाक विभाग ने उनके परिचय में आज़ादी की लड़ाई और समाज सुधार में उनके योगदान का ज़िक्र किया था. अगर प्रस्तावित विमोचन होता है, तो करीब 35 साल बाद इस दंपति में से दूसरे व्यक्तित्व को भी यही राष्ट्रीय सम्मान मिलेगा.
कौन थीं माता भगवती देवी शर्मा
माता भगवती देवी शर्मा का जन्म 20 सितंबर 1926 को आगरा में हुआ था. 1943 में उनका विवाह पं. श्रीराम शर्मा आचार्य से हुआ. इसके बाद वे गायत्री परिवार के हर काम में उनकी बराबर की साथी रहीं. उनकी सबसे बड़ी पहचान नारी जागरण अभियान से जुड़ी है. गायत्री परिवार के अनुसार इसकी शुरुआत माताजी ने ही की थी. इस अभियान के ज़रिए उन्होंने महिलाओं को घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर समाज में अपनी जगह बनाने और यज्ञ व संस्कार कराने जैसी भूमिकाएँ निभाने के लिए तैयार किया. 1990 में आचार्य जी के देह त्यागने के बाद उन्होंने पूरे संगठन की ज़िम्मेदारी संभाली और 1992 में अश्वमेध यज्ञों की श्रृंखला शुरू की, जो देश के साथ विदेश तक पहुँची. 19 सितंबर 1994 को हरिद्वार के शांतिकुंज में उनका देहावसान हुआ.
पहला दिन नारी शक्ति के नाम
सिक्के और डाक टिकट के विमोचन के अलावा महोत्सव के पहले दिन समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम करने वाली महिलाओं को सम्मानित करने की भी योजना है. डॉ. पंड्या के अनुसार यह दिन समाज में महिलाओं की भूमिका, उनकी नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान पर चर्चा का मंच बनेगा. गायत्री परिवार ने माताजी के शताब्दी वर्ष को पहले ही नारी सशक्तिकरण को समर्पित किया हुआ है. आयोजकों के अनुसार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्रियों और राज्यपालों को महोत्सव में आमंत्रित किया गया है, और उनकी सहभागिता प्रस्तावित है.
24 हज़ार चुने हुए प्रतिभागी, 10 हज़ार से ज़्यादा युवा
डॉ. पंड्या के अनुसार दिल्ली महोत्सव में देश भर से लगभग 24 हज़ार चुने हुए प्रतिभागियों को बुलाने की योजना है. इनमें अलग-अलग क्षेत्रों में योगदान देने वाले लोगों के साथ 10 हज़ार से ज़्यादा युवा शामिल होंगे. उनके मुताबिक़ आयोजन का एक मकसद अनुभवी पीढ़ी की सीख को युवाओं की ऊर्जा और नए विचारों से जोड़ना भी है. उन्होंने कहा कि यह आयोजन सिर्फ़ एक उत्सव नहीं, बल्कि सौ साल की तपस्या से निकली सोच को लोगों की ज़िंदगी में उतारने का मौका है. इसका उद्देश्य व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण और राष्ट्र निर्माण के संकल्पों की समीक्षा करना है.
जन्मशताब्दी सिक्कों की परंपरा
भारत में किसी व्यक्तित्व की जन्मशताब्दी पर स्मारक सिक्का जारी करने की परंपरा पुरानी है. ऐसे सिक्के भारत सरकार के वित्त मंत्रालय की ओर से जारी किए जाते हैं, और स्मारक डाक टिकट भारतीय डाक विभाग जारी करता है. उदाहरण के लिए, 2010 में मदर टेरेसा की जन्मशताब्दी पर भारत सरकार ने पाँच रुपये का स्मारक सिक्का जारी किया था.