कहते हैं कि ‘हर हीरो के पीछे कोई केप दिखे ये जरूरी नहीं, कुछ हीरो ऐसे होते हैं जिनके शरीर पर पड़े घाव के निशान उनकी बहादुरी की दास्तान खुद बयां करते हैं’. UAE में भारतीय मूल के कैप्टन स्मित मच्छर को जब सम्मानित किया गया, तो उनके घाव देखकर दुनिया दंग रह गई. उनके सिर के पिछले हिस्से पर टाकों के बहुत गहरे निशाने दिखाई दिए और उनके एक हाथ में प्लास्टर चढ़ा हुआ था. ये ‘बैटल स्कार’ इस बहादुरी का तमगा है, जिसके जरिए कैप्टन ने 170 लोगों की जान बचाई थी. इतने दर्दनाक जख्म होने के बावजूद, हमारे इस ‘सुपरहीरो’ के चेहरे पर मुस्कान थी और उन्होंने हंसते हुए यह सम्मान लिया.
कैप्टन स्मित मच्छर के सिर पर टांके और दुनिया भर से सलाम
आतंकवादी से लड़ने और मासूम पैसेंजर्स की जान बचान के बाद, जब कैप्टन स्मित सार्वजनिक रूप से सामने आए, तो संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने उनके इस बेमिसाल जज्बे को सलाम करते हुए देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक से नवाजा.
समारोह के दौरान जब कैप्टन स्मित की तस्वीर सामने आई, तो उनके सिर पर पड़ा टांकों का खौफनाक निशान देखकर हर किसी की रूह कांप गई. यूके के चर्चित नेता टॉमी रोबिन्सन ने सोशल मीडिया पर इस तस्वीर को शेयर करते हुए लिखा ‘सभी हीरो के पास केप नहीं होता, कुछ के पास जंग के निशान होते हैं. हमारे हीरो भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर, पूरी दुनिया आपको सलाम करती है’. ये तस्वीर अब सोशल मीडिया पर बहादुरी और इंसानियत की मिसाल बन चुकी है.
आसमान में क्या हुआ था? FZ1073 की वो खौफनाक रात
ये घटना 30 सितंबर की है, जब फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 ने दुबई से तेल अवीव के लिए उड़ान भरी थी. प्लेन में 170 से ज्यादा यात्री सवार थे और सब कुछ सामान्य चल रहा था. लेकिन तभी अचानक कॉकपिट के अंदर एक ऐसा खौफनाक मंजर देखने को मिला, जिसकी कल्पना शायद किसी ने नहीं की होगी.
विमान में मौजूद ओमानी को-पायलट ने अचानक कैप्टन स्मित मच्छर पर हमला कर दिया. उसने कॉकपिट में रखी ‘क्रैश एक्स’ यानी आपातकालीन कुल्हाड़ी से कैप्टन के सिर और शरीर पर ताबड़तोड़ वार कर दिए. वो प्लेन को क्रैश करवाना चाहता था.
कॉकपिट के अंदर चल रही इस खूनी झड़प के दौरान ओमानी को-पायलट ने विमान को नीचे की तरफ झुका दिया. बताया जाता है कि प्लेन महज 30 सेकंड के भीतर लगभग 14,000 फीट नीचे की तरफ जा रहा था. यात्रियों में हड़कंप मच गया.
लहूलुहान हालत में भी नहीं खोया आपा: ऐसे रचा इतिहास
सिर से लगातार खून बह रहा था, गहरी चोटें थीं और दर्द से शरीर बेहाल था, लेकिन कैप्टन स्मित ने हिम्मत नहीं हारी. उन्हें अच्छी तरह पता था कि अगर वो इस वक्त बेहोश हो गए या उन्होंने हार मान ली, तो प्लेन में सवार 170 से ज्यादा जिंदगियों का बचना नामुमकिन हो जाएगा.
अपनी जान की परवाह न करते हुए कैप्टन स्मित ने अपनी बची-कुची ताकत जुटाई और कॉकपिट का दरवाजा अनलॉक कर दिया. जैसे ही दरवाजा खुला, बाहर मौजूद क्रू मेंबर्स और यात्रियों ने तुरंत अंदर घुसकर उस सनकी को-पायलट को दबोच लिया. उसी फ्लाइट में यात्री के रूप में सफर कर रहे फ्लाईदुबई के दो अन्य ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने तुरंत कॉकपिट का कंट्रोल संभाला.
इसके बाद विमान की सऊदी अरब के तबूक एयरपोर्ट पर सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई. कैप्टन स्मित की इस एक समझदारी और बहादुरी की बदौलत एक बहुत बड़ा हादसा टल गया.
यूएई का सर्वोच्च नागरिक सम्मान: ‘फर्स्ट क्लास ऑर्डर ऑफ जायद II’
कैप्टन स्मित मच्छर की इस अदम्य वीरता को सम्मानित करने के लिए यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने कैप्टन स्मित और उनके फ्लाईदुबई क्रू मेंबर्स को प्रतिष्ठित ‘फर्स्ट क्लास ऑर्डर ऑफ जायद II’ से सम्मानित किया.
दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने एक भव्य समारोह में ये मेडल कैप्टन स्मित को प्रदान किया. इससे पहले भी जब कैप्टन स्मित सऊदी अरब से इलाज के बाद अबू धाबी के अस्पताल में भर्ती थे, तब खुद शेख हमदान उनसे मिलने पहुंचे थे और उनके जज्बे की तारीफ की थी. यूएई की शीर्ष कमान ने क्रू की पेशेवर क्षमता, तत्परता और यात्रियों की सुरक्षा के प्रति समर्पण की जमकर सराहना की.
क्या थी हमले की वजह?
इजराइली और अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों के अनुसार, हमलावर को-पायलट ओमान (Oman) का नागरिक था, जिसे घटना के तुरंत बाद सऊदी पुलिस ने हिरासत में ले लिया था. हालांकि, उसने कॉकपिट के अंदर कैप्टन पर इतना जानलेवा हमला क्यों किया, इसके पीछे का असली मकसद अब तक पूरी तरह साफ नहीं हो सका है. जांच एजेंसियां इस मामले की गहराई से जांच कर रही हैं.
कैप्टन स्मित मच्छर की ये कहानी सिर्फ एक विमान को दुर्घटनाग्रस्त होने से बचाने की नहीं है, बल्कि ये इस बात का सबूत है कि जब संकट का समय आता है, तो एक सच्चा लीडर अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है.
आसमान में घटित इस खौफनाक वारदात ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था, लेकिन भारतीय मूल के इस जांबाज पायलट ने साबित कर दिया कि असली हीरो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी घबराते नहीं, बल्कि इतिहास रचते हैं. कैप्टन स्मित के सिर का वो निशान अब सिर्फ एक चोट का दाग नहीं, बल्कि उनकी बहादुरी का एक अमिट दस्तावेज बन चुका है.