Jharkhand News: हत्या के केस में उम्रकैद, फिर अंग्रेजी पूछताछ पर HC ने पलटा फैसला; दोषी हुआ बरी


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Jharkhand High Court C Oraon Case: झारखंड हाईकोर्ट ने हत्या के दोषी सी. ओरांव को बरी कर दिया. दरअसल, कोर्ट ने पाया कि आरोपी अंग्रेजी नहीं समझता था, फिर भी उसी भाषा में पूछताछ और बयान दर्ज हुआ. जानिए कोर्ट ने फैसले में क्या कहा.

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हत्या के केस में उम्रकैद, फिर अंग्रेजी पूछताछ पर HC ने पलटा फैसला; दोषी बरीZoom

झारखंड हाईकोर्ट ने 2009 के हत्या मामले में उम्रकैद काट रहे सी. ओरांव को बरी कर दिया है.

Jharkhand High Court C Oraon Case: : झारखंड हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे एक दोषी को बरी कर दिया है. कोर्ट ने यह फैसला इस आधार पर सुनाया कि आरोपी से अंग्रेजी में पूछताछ की गई थी. जबकि वह अंग्रेजी भाषा समझता नहीं था. अदालत ने माना कि ऐसी स्थिति में आरोपी के जवाब उसके बचाव के अधिकार को प्रभावित कर सकते हैं. न्यायमूर्ति आनंद सेन और न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने सी. ओरांव की ओर से दायर आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए रांची की निचली अदालत के दोषसिद्धि और सजा के आदेश को रद्द कर दिया.

2009 में महिला की हत्या का था आरोप
सी. ओरांव को 26 फरवरी 2009 को परमेश्वरी देवी की हत्या का दोषी ठहराया गया था. आरोप था कि जमीन पर कब्जे को लेकर हुए विवाद के बाद ओरांव ने परमेश्वरी देवी को कुएं में डुबोकर मार दिया था. इस मामले में रांची की निचली अदालत ने 25 अप्रैल 2018 को ओरांव को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. साथ ही उस पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था. इसके बाद ओरांव ने हाईकोर्ट में सजा के खिलाफ अपील दाखिल की थी.

अंग्रेजी में दर्ज किए गए आरोपी के बयान
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष ने ओरांव से अंग्रेजी में सवाल पूछे थे. जबकि वह अंग्रेजी भाषा को समझ नहीं पाता था. अदालत ने यह भी पाया कि निचली अदालत ने उसके बयान भी अंग्रेजी में दर्ज किए थे. अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक बयान दर्ज किए जाने के बाद ओरांव ने उन पर अपने अंगूठे का निशान लगाया था.

‘बयान दर्ज करने की प्रक्रिया महज दिखावा’
हाईकोर्ट ने निचली अदालत में आरोपी का बयान दर्ज किए जाने की प्रक्रिया पर कड़ा रुख अपनाया. अदालत ने कहा कि जब आरोपी उस भाषा को ही नहीं समझता जिसमें उससे सवाल पूछे जा रहे हैं, तो उसके जवाब उसके बचाव के अधिकार को नुकसान पहुंचा सकते हैं. खंडपीठ ने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार देता है. अदालत ने माना कि ऐसी स्थिति में आरोपी के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया उचित तरीके से नहीं हुई. सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सी. ओरांव की दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा का आदेश रद्द कर दिया और उसे बरी कर दिया.



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