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Mumbai Infra Projects : एमएमआरडीए ने वर्ष 2024 में ₹58,000 करोड़ की लागत वाली रिंग रोड विकास योजना को मंजूरी दी थी. इसका मुख्य उद्देश्य पूर्व-पश्चिम कनेक्टिविटी को सुधारना और भीड़भाड़ वाली सड़कों पर ट्रेफिक का भार कम करना है. 169 किलोमीटर लंबे पुणे रिंग रोड एक्सप्रेसवे का निर्माण भी चल रहा है. इसे साल 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है.
मुंबई महानगर क्षेत्र में सड़कें, एलिवेटेड पुल और सुरंगें बनाई जा रही हैं. (Photo : Canva)
नई दिल्ली. मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में लोगों को जाम से मुक्ति दिलाने और सफर आसान बनाने को मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) ‘मुंबई इन मिनट्स’ (Mumbai in Minutes) योजना को धरातल पर उतारने में लगा है. प्राधिकरण एक ऐसा एकीकृत नेटवर्क तैयार कर रहा है, जिससे यात्री शहर के किसी भी एक कोने से दूसरे कोने तक अधिकतम 59 मिनट में पहुंच सके. News18 राइजिंग भारत समिट (वेस्ट) में एमएमआरडीए के महानगर आयुक्त डॉ. संजय मुखर्जी ने इस योजना के बारे में विस्तार से बताया. मुखर्जी ने कहा कि योजना के तहत नए सड़क कॉरिडोर, सुरंगें और मेट्रो नेटवर्क बनाये जा रहे हैं.
एमएमआरडीए ने वर्ष 2024 में ₹58,000 करोड़ की लागत वाली रिंग रोड विकास योजना को मंजूरी दी थी. इसके तहत मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में 90 किलोमीटर से अधिक लंबी सड़कें, एलिवेटेड पुल और सुरंगें बनाई जा रही हैं. इसका मुख्य उद्देश्य पूर्व-पश्चिम कनेक्टिविटी को सुधारना और भीड़भाड़ वाली सड़कों पर ट्रेफिक का भार कम करना है. मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक (MTHL), कोस्टल रोड नेटवर्क, ठाणे-बोरीवली ट्विन टनल, सेवरी-वर्ली कनेक्टर और मेट्रो लाइनों का विस्तार इस योजना के दायरे में शामिल है.
90 मिनट का सफर 30 मिनट में
डॉ. मुखर्जी ने कहा कि विभिन्न कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स के आपस में जुड़ने से ट्रैवल टाइम बहुत कम हो जाएगा. वर्ली से यात्रा करने वाले लोग कोस्टल रोड कॉरिडोर का यूज करके सीधे एमटीएचएल से जुड़ सकेंगे. इससे वर्ली से नवी मुंबई के बीच का सफर 90 मिनट से घटकर 30 मिनट से भी कम का रह जाएगा. इसी तरह रोड बनने से मुंबई और ठाणे के बीच की यात्रा में भी आने वाले समय में केवल 25 मिनट लगेंगे. जमीन के नीचे बनाई जाने वाली सुरंगों और बाईपास के जरिए गाड़ियां जाम वाले हिस्सों को बायपास कर निकल जाएंगी.
पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुधारने पर भी जोर
प्राधिकरण का कहना है कि यह योजना केवल निजी गाड़ियों या सड़कों के विस्तार तक सीमित नहीं है. इसमें मेट्रो और रेल नेटवर्क का विस्तार तथा बस सेवाओं को मजबूत करना शामिल है. ट्रैफिक कम होने से बसें समय पर चल सकेंगी, जिससे आम यात्रियों को सीधा फायदा होगा.