बसपा में वापसी के बाद मायावती के भतीजे और पार्टी के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद एक बार फिर सियासी मैदान में सक्रिय हो गए हैं. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए उन्होंने पश्चिमी यूपी से अपनी रैलियों का आगाज कर राजनीतिक हलचल तेज कर दी है. बुलंदशहर के अनूपशहर में आयोजित बसपा की रैली में आकाश आनंद ने भाजपा, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर निशाना साधा. इसके साथ ही उन्होंने मायावती के साथ अपने रिश्तों और पार्टी में अपनी भूमिका को लेकर हुए घटनाक्रम पर भी खुलकर बात की. इसी दौरान उन्होंने उस सवाल का जिक्र किया, जिसने उनके मुताबिक उन्हें भावुक कर दिया था. आखिर मायावती बार-बार उनकी परीक्षा क्यों लेती हैं?
आकाश आनंद ने रैली में बताया कि उन्होंने मायावती से पूछा था कि आखिर उनकी बार-बार परीक्षा क्यों ली जाती है? इस पर मायावती ने उन्हें सीधे जवाब देने के बजाय तीन सवाल किए. इन सवालों के जरिए उन्होंने आकाश को बहुजन आंदोलन के इतिहास, उसके संघर्ष और जिम्मेदारी का एहसास कराने की कोशिश की.
मायावती ने क्या कहा, जिससे आकाश आनंद अंदर से हिल गए?
आकाश के मुताबिक, मायावती ने सबसे पहले पूछा कि क्या डॉ. भीमराव आंबेडकर ने आखिरी सांस तक समाज के लिए संघर्ष नहीं किया और क्या उन्होंने जीवनभर कठिन परिस्थितियों का सामना नहीं किया? इसके बाद उन्होंने बहुजन आंदोलन के संस्थापक कांशीराम का उदाहरण देते हुए पूछा कि क्या उन्होंने अपना पूरा जीवन बहुजन समाज के संघर्ष के लिए समर्पित नहीं कर दिया? मायावती ने तीसरे सवाल में अपने जीवन का उदाहरण दिया. उन्होंने बताया कि किस तरह उन्होंने अपना परिवार छोड़कर बहुजन समाज को ही अपना परिवार माना और जीवनभर त्याग, तपस्या तथा संघर्ष का रास्ता चुना.
‘इतना बड़ा आंदोलन तुम्हें बिना परीक्षा लिए कैसे सौंप दूं’
आकाश आनंद ने बताया कि मायावती के इन सवालों के बाद उन्होंने स्वीकार किया कि संघर्ष और परीक्षा किसी भी बड़े आंदोलन का अहम हिस्सा हैं. उनके मुताबिक, इसके बाद मायावती ने उनसे कहा कि इतना बड़ा आंदोलन, इतना बड़ा समाज और इतनी बड़ी जिम्मेदारी वह बिना परीक्षा लिए उन्हें कैसे सौंप सकती हैं.
आकाश ने रैली में इस बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि मायावती की यह बात सुनकर उनकी आंखों में आंसू आ गए थे. उन्होंने मायावती से कहा कि जब तक वह जीवित हैं, तब तक उनकी हर परीक्षा देने के लिए तैयार हैं. आकाश के इस बयान से साफ है कि वह अपने राजनीतिक सफर में मायावती के भरोसे और बहुजन आंदोलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को प्रमुखता से सामने रखना चाहते हैं. हालांकि, उनके इस बयान को पार्टी के भीतर उनकी भूमिका और नेतृत्व से जुड़े हालिया घटनाक्रम के संदर्भ में भी देखा जा रहा है.
बहुजन समाज ही मेरा परिवार- आकाश
रैली में आकाश आनंद ने मायावती को भरोसा दिलाने की बात भी कही. उन्होंने कहा कि वह बहुजन समाज को ही अपना परिवार मानते हैं और उसके लिए त्याग, तपस्या तथा दिन-रात मेहनत करते रहेंगे. आकाश ने अपने संबोधन में कहा कि जब तक बहुजन समाज को देश का शासक बनाने का लक्ष्य हासिल नहीं हो जाता, तब तक वह चैन की सांस नहीं लेंगे. उनके इस बयान में एक तरफ मायावती के प्रति सम्मान और निष्ठा का संदेश था, तो दूसरी तरफ पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच अपनी सक्रियता और प्रतिबद्धता को स्थापित करने की कोशिश भी दिखाई दी.
बसपा की सक्रियता बढ़ाने की कोशिश
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बसपा अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश में जुटी है. ऐसे समय में आकाश आनंद का पश्चिमी यूपी से रैलियों की शुरुआत करना अहम माना जा रहा है. बुलंदशहर के अनूपशहर में उन्होंने भाजपा, सपा और कांग्रेस को निशाने पर लेकर पार्टी के राजनीतिक संघर्ष को धार देने का संदेश दिया.
आकाश आनंद के लिए यह दौर केवल चुनावी रैलियों तक सीमित नहीं है. उन्हें पार्टी के भीतर अपनी भूमिका, मायावती के विश्वास और बहुजन समाज के बीच अपनी स्वीकार्यता को लेकर भी राजनीतिक संदेश देना है. मायावती के साथ हुई बातचीत का जिक्र करके उन्होंने अपने संघर्ष को बहुजन आंदोलन की परंपरा से जोड़ने की कोशिश की है.
अब देखना होगा कि पश्चिमी यूपी से शुरू हुई आकाश आनंद की यह सियासी सक्रियता बसपा के संगठन और जनाधार को कितना मजबूत कर पाती है. साथ ही, यह भी अहम होगा कि पार्टी 2027 के चुनाव में अपने पारंपरिक सामाजिक आधार को एकजुट करने के लिए किस तरह की रणनीति अपनाती है.