नई दिल्ली. भारत में सस्ते डेटा की क्रांति लाने और दुनिया का सबसे बड़ा टेलीकॉम नेटवर्क खड़ा करके जियो प्लेटफॉर्म्स ने अपनी क्षमता का लोहा मनवाया है. जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में जिस तरह से देसी और विदेशी निवेशकों ने जिस तरह दिल खोलकर पैसा लगाया, उसने साबित कर दिया है कि कंपनी की क्षमता और संभावनाओं पर इन्वेस्टर्स को पूरा भरोसा है. ऐसे में अब सवाल यह है कि क्या जियो सैमसंग, सोनी और SK Hynix के बाद एशिया की अगली ग्लोबल टेक दिग्गज कंपनी बनेगी? बाजार एक्सपर्ट तो इस सवाल का जवाब हां में ही दे रहे हैं. बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जियो अब महज एक पारंपरिक टेलीकॉम ऑपरेटर नहीं रह गई है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), सैटेलाइट इंटरनेट और 6G जैसी तकनीकों पर भारी निवेश के दम पर कंपनी दक्षिण कोरिया की सैमसंग और एसके हाइनिक्स और जापान की सोनी जैसी एशियाई तकनीकी महाशक्ति बनने की तैयारी कर रही है.
शेयर बाजार में ब्लॉकबस्टर लिस्टिंग के दिन ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, जियो करीब 131 अरब डॉलर के मार्केट कैप के साथ दुनिया की छठी सबसे बड़ी लिस्टेड टेलीकॉम कंपनी बन गई. इसने भारती एयरटेल को पीछे छोड़ते हुए एशिया में चीन की चाइना मोबाइल के बाद दूसरा स्थान हासिल किया. विशाल उपभोक्ता आधार, इंजीनियरिंग क्षमताओं और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश के दम पर Jio ऐसे टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स और प्लेटफॉर्म विकसित करना चाहती है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धा कर सकें. इसके साथ ही कंपनी भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने वाली टेक्नोलॉजी कंपनियों के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है. उसकी इंजीनियरिंग क्षमता, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और विशाल उपभोक्ता आधार उसे वैश्विक टेक्नोलॉजी पावरहाउस बनने में मदद कर सकते हैं. कंपनी अब भारत में विकसित प्रोडक्ट्स और प्लेटफॉर्म को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की तैयारी में है.
आकाश अंबानी ने बताया कंपनी का रोडमैप
कंपनी के विजन को स्पष्ट करते हुए मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश अंबानी ने कहा, “पहले 10 वर्षों में हमने डेटा को आम लोगों तक पहुंचाकर लोकतांत्रिक बनाया और करोड़ों लोगों को डिजिटल जीवन से जोड़ा. अगले 10 वर्षों में हम हर उस टेक्नोलॉजी को आम लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं, जो भारतीयों के जीवन को बदल सकती है. इनमें AI, क्लाउड, कनेक्टेड डिवाइस, अंतरिक्ष से मिलने वाली कनेक्टिविटी और ऐसी डिजिटल सेवाएं शामिल हैं, जिनकी अभी कल्पना भी नहीं की गई है.”
स्पेसएक्स जैसा मॉडल तैयार कर रही है जियो
मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, काउंटरपॉइंट रिसर्च के सह-संस्थापक और रिसर्च एनालिस्ट नील शाह का मानना है कि बाजार अब जियो को केवल टेलीकॉम कंपनी के चश्मे से नहीं देख रहा. 135 अरब डॉलर के आसपास का मूल्यांकन दर्शाता है कि निवेशक इसमें एक एकीकृत टेक पावरहाउस देख रहे हैं. जियो को AI, क्लाउड, डिजिटल कंटेंट और कनेक्टिविटी के मेल पर तैयार किया गया है. इसके पास खुद की ग्रीन एनर्जी और गीगावाट क्षमता वाले विशाल डेटा सेंटर हैं. 5G स्थलीय नेटवर्क को लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट कनेक्टिविटी, स्वदेशी AI और डिजिटल मीडिया के साथ जोड़ना जियो को किसी पारंपरिक टेलीकॉम कंपनी के बजाय एलन मस्क के स्पेसएक्स (SpaceX) मॉडल के बेहद करीब ले जाता है.
शाह का कहना है कि इन-हाउस 4G/5G स्टैक, AI आधारित नेटवर्क ऑटोमेशन और 6G रिसर्च के दम पर जियो अब एरिक्सन, नोकिया और सैमसंग जैसे हार्डवेयर-नेटवर्क दिग्गजों के सामने भी एक मजबूत तकनीकी विकल्प बन रही है. वह वैश्विक टेक्नोलॉजी साझेदारों के साथ भी काम कर रही है. अब उसके सामने सबसे बड़ा अवसर इन क्षमताओं को अपने नेटवर्क तक सीमित रखने के बजाय उनका व्यावसायीकरण करने का है. इसके तहत Jio दूसरे टेलीकॉम ऑपरेटरों को टेक्नोलॉजी और सेवाएं उपलब्ध करा सकती है, जिनमें अंतरराष्ट्रीय बाजारों में काम करने वाली कंपनियां भी शामिल हैं.
12,000 इंजीनियर्स की फौज और ग्लोबल चुनौतियां
एम्बिट कैपिटल रिसर्च के विश्लेषक विवेकानंद एस का कहना है कि Jio की इंजीनियरिंग क्षमता और AI में निवेश उसे वैश्विक टेक्नोलॉजी कंपनी बनने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए मजबूत आधार प्रदान करते हैं. जियो की सबसे बड़ी ताकत उसकी अपनी इंजीनियरिंग क्षमता और बड़े स्तर पर समस्याओं को सुलझाने का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड है. जियो ने होम ब्रॉडबैंड को कंटेंट से जोड़कर जिस तरह बाजार बदला, वही रणनीति वह नए सेक्टर्स में दोहरा सकती है. विवेकानंद के मुताबिक, जियो के पास करीब 12,000 इंजीनियरों की इन-हाउस टीम है, जो विदेशी वेंडर्स पर निर्भर रहने के बजाय खुद के स्वदेशी प्रोडक्ट्स तैयार करने में सक्षम है.
विवेकानंद ने एक बड़ी चुनौती की ओर भी इशारा किया. उनका कहना है कि तकनीक विकसित करने और दुनिया भर में अपनाया जाने वाला ग्लोबल प्रोडक्टबनाने के बीच बहुत बड़ा अंतर होता है. अमेरिका और पश्चिमी देशों के विकसित बाजारों में स्थापित कंपनियों को टक्कर देना आसान नहीं होगा. उन्होंने कहा कि जियो की मुख्य रणनीति ऐसी विशिष्ट समस्याओं की पहचान करना होना चाहिए, जिनकी मांग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो. यदि कंपनी का कोई प्रोडक्ट अंतरराष्ट्रीय बाजारों में व्यापक रूप से अपनाया जाता है, तो इससे Jio को टेक्नोलॉजी पावरहाउस के रूप में स्थापित होने में मदद मिल सकती है.
(डिस्क्लेमर – नेटवर्क18 और टीवी18 कंपनियां चैनल/वेबसाइट का संचालन करती हैं, जिनका नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज एकमात्र लाभार्थी है.)