बिहार MLC चुनाव में किस जाति का रहा दबदबा, कौन बना सिकंदर और किसकी डूब गई लुटिया?

बिहार MLC चुनाव में किस जाति का रहा दबदबा, कौन बना सिकंदर और किसकी डूब गई लुटिया?


बिहार की राजनीति में जातीय समीकरणों की चर्चा विधानसभा चुनावों तक ही सीमित नहीं रहती. विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजों ने भी सियासी दलों की ताकत और अलग-अलग जातियों के प्रतिनिधित्व की तस्वीर सामने रखी है. 28 अक्टूबर 2026 को सामने आए बिहार MLC चुनाव के नतीजों में भूमिहार समुदाय के उम्मीदवारों का दबदबा रहा. आठ सीटों में से पांच पर भूमिहार प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की. वहीं, एक-एक सीट पर यादव, राजपूत और सहनी समुदाय के उम्मीदवार विजयी रहे. इस चुनाव में सम्राट चौधरी की जाति कोइरी यानी कुशवाहा और पूर्व सीएम नीतीश कुमार की जाति कुर्मी से एक भी उम्मीदवार नहीं जीत पाया.

अगर पार्टी वाइज देखें तो बीजेपी और जेडीयू के नेतृत्व वाले एनडीए ने कुल चार सीटों पर कब्जा जमाया. आरजेडी को एक सीट मिली, जबकि प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने भी अपना खाता खोला. दो सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की. इन नतीजों में बीजेपी के लिए पटना शिक्षक सीट गंवाना बड़ा झटका रहा. इस सीट पर बीजेपी के नवल किशोर यादव बीते 30 सालों से कब्जा जमाए बैठे थे. इस चुनाव में कांग्रेस का हाथ पूरी तरह कट गया. कांग्रेस के दिग्गज ब्राह्मण चेहरा और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा को जन सुराज कैंडिडेट के भूमिहार कैंडिडेट सुरेश प्रसाद राय ने हरा दिया.

जन सुराज का विधान परिषद में खाता खुला, दरभंगा शिक्षक में सुरेश राय जीते, सारण में आफाक अहमद हारे

इस चुनाव की खास बात यह है कि 5 भूमिहार उम्मीदवार अलग-अलग दलों से जीतकर आए हैं. इनमें आरजेडी, जेडीयू, बीजेपी और जन सुराज से जुड़े उम्मीदवार शामिल हैं. इससे साफ है कि इस चुनाव में भूमिहार समुदाय का प्रतिनिधित्व किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं रहा. वहीं, ब्राह्मण समुदाय का कोई उम्मीदवार आठ विजेताओं की सूची में शामिल नहीं हुआ.

निर्वाचन क्षेत्र विजेता पार्टी/समर्थन जाति

पटना शिक्षक- डॉ. संजीव कुमार- आरजेडी-भूमिहार
दरभंगा शिक्षक- डॉ. सुरेश प्रसाद राय- जन सुराज-भूमिहार
तिरहुत शिक्षक- डॉ. नरेंद्र प्रसाद सिंह- बीजेपी-भूमिहार
सारण शिक्षक-  राहुल राज- निर्दलीय- राजपूत
पटना स्नातक- नीरज कुमार- जेडीयू- भूमिहार
दरभंगा स्नातक सर्वेश कुमार- बीजेपी- भूमिहार
तिरहुत स्नातक वंशीधर ब्रजवासी- निर्दलीय- सहनी
कोसी स्नातक डॉ. एनके यादव- बीजेपी- यादव

सारण शिक्षक MLC सीट पर बीजेपी बागी राहुल राज की जीत

शिक्षक सीटों पर बंट गईं चारों जीत

शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में किसी एक पार्टी का पूरी तरह दबदबा नहीं रहा. चारों सीटें चार अलग-अलग राजनीतिक धाराओं के खाते में गईं. डॉ. संजीव कुमार ने बीजेपी के दिग्गज और लंबे समय से विधान परिषद सदस्य रहे नवल किशोर यादव को 1,057 मतों से हराया. इस नतीजे ने बीजेपी की परंपरागत मजबूती को चुनौती दी. वहीं, दरभंगा शिक्षक सीट पर प्रशांत किशोर की पार्टी के डॉ. सुरेश प्रसाद राय ने कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और मौजूदा एमएलसी मदन मोहन झा को हराकर जन सुराज को विधान परिषद में पहली जीत दिलाई. तिरहुत से बीजेपी के नरेंद्र प्रसाद सिंह ने शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जीत दर्ज कर बीजेपी का खाता खोला. सारण से बीजेपी के बागी राहुल राज ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की. उन्होंने जेडीयू के आनंद पुष्कर को पछाड़ दिया.

स्नातक सीटों पर बीजेपी-जेडीयू का प्रदर्शन कैसा रहा?

स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में एनडीए ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की. बीजेपी ने दरभंगा स्नातक, तिरहुत शिक्षक और कोसी स्नातक में जीत हासिल की, जबकि पटना स्नातक सीट जेडीयू के नीरज कुमार के खाते में गई. तिरहुत स्नातक सीट पर निर्दलीय वंशीधर ब्रजवासी ने जीत दर्ज की. इन नतीजों में जेडीयू के लिए पटना स्नातक सीट का महत्व इसलिए भी था क्योंकि नीरज कुमार को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष और मोकामा के विधायक अनंत सिंह की बगावत की चर्चा रही थी. इसके बावजूद नीरज कुमार जीत हासिल करने में सफल रहे.

कांग्रेस के मदन मोहन झा गए हार. 

बिहार की राजनीति के लिए इन नतीजों के क्या मायने?

इन चुनाव परिणामों से तीन बातें सामने आती हैं. पहली, आठ सीटों में पांच भूमिहार उम्मीदवारों की जीत जातिगत प्रतिनिधित्व के लिहाज से उल्लेखनीय है. दूसरी, एनडीए चार सीटों के साथ सबसे बड़ा गठबंधन रहा, लेकिन बीजेपी की पटना शिक्षक सीट पर हार बताती है कि गठबंधन की सफलता हर निर्वाचन क्षेत्र में एक जैसी नहीं रही. तीसरी, जन सुराज और निर्दलीय प्रत्याशियों की जीत ने यह दिखाया कि चुनावी मुकाबले में स्थापित दलों के अलावा दूसरे विकल्प भी जगह बना सकते हैं.

बिहार एमएलसी चुनाव में भूमिहार उम्मीदवारों का प्रतिनिधित्व सबसे ज्यादा रहा, जबकि दलगत मुकाबले में एनडीए ने चार सीटें जीतकर बढ़त बनाई. कोइरी, कुर्मी उम्मीदवार भी दूसरे दलों से लड़े लेकिन, वह जीत नहीं पाए. आरजेडी और जन सुराज को एक-एक सीट मिली, दो सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीतीं और कांग्रेस अपना खाता नहीं खोल सकी. यही इस चुनाव की जातीय और राजनीतिक तस्वीर का सबसे अहम पहलू है.



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