Jio शेयर बाजार में उतरते ही छा गई, बनी दुनिया की 7वीं और एशिया की दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी

Jio शेयर बाजार में उतरते ही छा गई, बनी दुनिया की 7वीं और एशिया की दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी


28 अक्टूबर 2026 का दिन भारतीय शेयर बाजार और कॉरपोरेट जगत के इतिहास में एक सुनहरे पन्ने की तरह दर्ज हो गया है. रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) ने बाजार में ऐसी धमाकेदार एंट्री मारी है कि दुनियाभर की दिग्गज टेलीकॉम कंपनियां बस देखती रह गईं. अपने ब्लॉकबस्टर आईपीओ (IPO) के बाद शेयर बाजार में कदम रखते ही जियो प्लेटफॉर्म्स दुनिया की 7वीं और एशिया की दूसरी सबसे मूल्यवान टेलीकॉम कंपनी बन गई है. एशिया में अब जियो से आगे सिर्फ चाइना मोबाइल (China Mobile) है.

जियो का आईपीओ भारत के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ था, जिसने बाजार से 30,213 करोड़ रुपये जुटाए. निवेशकों में इसे लेकर गजब का उत्साह था, जिसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह ओवरऑल 22.19 गुना सब्सक्राइब हुआ था. जब लिस्टिंग की बारी आई, तो 1119 रुपये के इश्यू प्राइस वाला यह शेयर सीधे 1358 रुपये पर खुला. इस शानदार शुरुआत के साथ ही कंपनी का मार्केट कैप लगभग 131.5 अरब डॉलर यानी करीब 12.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया.

दुनिया के टॉप दिग्गजों की लिस्ट में जियो की धाक

ग्लोबल रैंकिंग की बात करें तो 218.9 अरब डॉलर के मार्केट कैप के साथ चाइना मोबाइल पहले नंबर पर है. इसके बाद अमेरिका की वेराइजन (Verizon), जापान का सॉफ्टबैंक ग्रुप (SoftBank), टी-मोबाइल यूएस (T-Mobile US) और एटीएंडटी (AT&T) का नंबर आता है.

जियो अब 135.6 अरब डॉलर के मूल्यांकन वाली जर्मनी की डॉयचे टेलीकॉम के बेहद करीब पहुंच गई है. वहीं, भारत की ही एक और दिग्गज कंपनी भारती एयरटेल लगभग 122.8 अरब डॉलर के वैल्यूएशन के साथ इस रेस में बनी हुई है.

आकाश अंबानी का विजन और ग्राहकों की फौज

जियो के पास इस वक्त दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल कस्टमर बेस है. 30 जून 2026 तक कंपनी के पास 53.33 करोड़ ग्राहक थे. वहीं, 5G के मामले में भी कंपनी झंडे गाड़ रही है. चीन के बाहर दुनिया का सबसे बड़ा 5G कस्टमर बेस जियो के पास है, जिसकी संख्या 26.85 करोड़ है. जियो प्लेटफॉर्म्स के मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश अंबानी ने गर्व के साथ बताया, जियो के स्वदेशी प्लेटफॉर्म अब 54 करोड़ (540 मिलियन) से अधिक ग्राहकों को सेवा दे रहे हैं. उन्होंने साफ किया कि जियो ने अपनी तकनीक शून्य से खुद विकसित की है, क्योंकि दुनिया में मौजूद पुरानी तकनीकें भारत की विशाल आबादी और जरूरतों के हिसाब से नहीं बनी थीं.

सिर्फ नेटवर्क नहीं, भविष्य की तकनीक पर है नजर

जियो का अगला लक्ष्य सिर्फ मोबाइल कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं है. कंपनी अब अपना दायरा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग, एंटरप्राइज सर्विसेज और सैटेलाइट कम्युनिकेशन (Satcom) तक बढ़ा रही है.

कंपनी ने 4G, 5G, 6G, AI और क्लाउड नेटवर्क जैसी डिजिटल तकनीकों के लिए 7,220 पेटेंट फाइल किए हैं. जियो की यह आत्मनिर्भरता उसे भविष्य में विदेशी कंपनियों पर निर्भर नहीं रहने देगी. यही नहीं, जियो अपनी तकनीक दुनिया के अन्य देशों की टेलीकॉम कंपनियों को लाइसेंस पर देने की तैयारी भी कर रही है.

मुनाफे का मीटर और आगे का रास्ता

ब्रोकरेज फर्म नोमुरा (Nomura) का मानना है कि जियो ने नेटवर्क इन्फ्रास्ट्रक्चर पर जो भारी-भरकम खर्च करना था, वह अब लगभग पूरा हो चुका है. इसका मतलब है कि आने वाले समय में कंपनी के पास कैश फ्लो बढ़ेगा और वह नई टेक्नोलॉजी व सैटेलाइट कम्युनिकेशन जैसे नए रास्तों पर खुलकर निवेश कर पाएगी.

जियो की यह कामयाबी सिर्फ सब्सक्राइबर जोड़ने तक सीमित नहीं है. अब असली चुनौती यह है कि जियो भारत की इस सफलता और अपनी बेजोड़ तकनीक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कैसे भुनाती है और एक ग्लोबल टेक लीडर के रूप में खुद को कैसे स्थापित करती है. शेयर बाजार में यह धमाकेदार शुरुआत तो बस एक नए युग का आगाज है!



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