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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीथेन गैस के उत्सर्जन पर लगाम लगाने वाले नियम को खत्म करने का फैसला किया है. सरकार का दावा है कि इससे 45 अरब डॉलर की बचत होगी और तेल उत्पादन बढ़ेगा. लेकिन पर्यावरण संगठनों ने इस फैसले पर चिंता जताई है. आखिर ट्रंप के इस कदम से पर्यावरण पर क्या असर पड़ेगा?
ट्रंप ने खत्म किया बाइडन का नियम
बिलिंग्स: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा फैसला लिया है. उनका प्रशासन मीथेन गैस के उत्सर्जन पर लगाम लगाने वाला नियम खत्म करेगा. सरकार का दावा है कि इससे तेल और गैस कंपनियों को फायदा होगा. साथ ही, आम लोगों के अरबों डॉलर बचेंगे. लेकिन इस फैसले से पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की चिंता बढ़ गई है. ऐसे में सवाल है कि क्या सस्ते ईंधन के लिए पर्यावरण से समझौता करना सही है?
ट्रंप ने मंगलवार को टेक्सास में एक चुनावी रैली के दौरान कहा कि इस फैसले से उपभोक्ताओं और ऊर्जा उत्पादकों की 45 अरब अमेरिकी डॉलर की बचत होगी तथा 21 करोड़ बैरल तेल निकालने का रास्ता खुलेगा. यह मात्रा अमेरिका में करीब 10 दिन की पेट्रोलियम खपत के बराबर है.
ईंधन की कीमतों के बीच बड़ा कदम
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब ईरान के साथ अमेरिका के युद्ध के बीच ईंधन की ऊंची कीमतों को लेकर ट्रंप की आलोचना हो रही है. इसका उद्देश्य घरेलू स्तर पर तेल की खुदाई को बढ़ावा देना है.
वैज्ञानिकों के अनुसार, जलवायु को गर्म करने वाली ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में मीथेन की हिस्सेदारी करीब एक-तिहाई है. औद्योगिक क्षेत्र से होने वाले मीथेन उत्सर्जन में सबसे अधिक योगदान तेल एवं गैस उद्योग का है. मीथेन प्राकृतिक गैस का मुख्य घटक है और अल्पावधि में कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में वातावरण को कहीं अधिक गर्म करती है. यह गैस उपकरणों से रिसकर वातावरण में पहुंचती है या तेल निकालने के दौरान अपशिष्ट के रूप में जला दी जाती है.
सुपर एमिटर प्रोग्राम भी होगा बंद
अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (ईपीए) के प्रमुख ली जेल्डिन ने पिछले महीने इन बदलावों के संकेत दिए थे. उन्होंने कहा था कि एजेंसी का ‘सुपर एमिटर प्रोग्राम’ समाप्त किया जाएगा. इस कार्यक्रम के तहत कंपनियों को तेल एवं प्राकृतिक गैस प्रतिष्ठानों से मीथेन के बड़े रिसाव की जांच कर उसे ठीक करना होता है. एजेंसी छोटे तेल एवं गैस कुओं के लिए कम सख्त मानक भी तय करेगी.
पर्यावरण संगठनों ने जताई चिंता
पर्यावरण संगठनों ने इस फैसले की आलोचना की है. पर्यावरण कानून एवं नीति केंद्र के अधिवक्ता मैक्स लोपेज ने कहा कि इससे प्रदूषण का बोझ उन समुदायों पर बढ़ेगा, जो पहले से इसके प्रभावों का सामना कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि इससे ऊर्जा क्षेत्र की दक्षता भी कम होगी.
पर्यावरण संगठनों ने जताई चिंता
जेल्डिन ने कहा कि मीथेन संबंधी नियम लागू करने पर 18 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च होते और इससे अमेरिकी ऊर्जा उद्योग की प्रगति बाधित होती. उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन की पर्यावरण संरक्षण एजेंसी अमेरिका को उसकी ऊर्जा क्षमता का पूरा इस्तेमाल करने में मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है.
पूर्व राष्ट्रपति बाइडन के कार्यकाल में संघीय अधिकारियों ने कहा था कि इस नियम से 2038 तक अनुमानित पांच करोड़ 80 लाख टन मीथेन का उत्सर्जन रोका जा सकेगा और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा करने वाले अन्य प्रदूषकों के उत्सर्जन में भी कमी आएगी. पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में भी मीथेन उत्सर्जन पर अंकुश लगाने के प्रयास किए गए थे, लेकिन ट्रंप के पहले कार्यकाल में उन्हें सीमित कर दिया गया था.