चौथ माता मंदिर का रहस्य: यहां दर्शन मात्र से सुहागिनों को मिलता है खास वरदान
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Karwa Chauth 2026 Chauth Mata Temple: प्रसिद्ध चौथ माता मंदिर में भक्तों की भारी आस्था देखने को मिलती है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से आने वाले सुहागिनों को पति की लंबी आयु का वरदान मिलता है. इसके साथ ही, माता के दरबार में दर्शन मात्र करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. दूर-दूर से श्रद्धालु इस पवित्र धाम में आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पहुंचते हैं और माता के दर्शन कर खुद को धन्य मानते हैं.
Karwa Chauth 2026 Chauth Mata Temple: 29 अक्टूबर दिन गुरुवार को देशभर में करवाचौथ का त्योहार मनाया जाएगा, हर वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को यह पावन पर्व मनाया जाता है. यह त्योहार खासतौर पर उत्तर और मध्य भारत के राज्यों में मनाया जाता है. इस दिन अपने पति की लंबी आयु के लिए पत्नियां निर्जला उपवास करती हैं और रात में चांद को देखकर अपना उपवास खोलती हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि राजस्थान और उज्जैन में चौथ माता को समर्पित ऐसा मंदिर है, जहां महिलाएं अखंड सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद लेने जाती हैं. मान्यता है कि इस मंदिर में दर्शन करने मात्र से सभी इच्छाएं पूरी होती है. आइए करवा चौथ के मौके पर जानते हैं चौथ माता के इस मंदिर के बारे में…
पति की लंबी आयु के वरदान के लिए प्रसिद्ध
राजस्थान के माधोपुर जिले के चौथ शहर के बरवाड़ा कस्बे में सिद्धपीठ चौथ माता का मंदिर है. यह मंदिर खासतौर पर पति की लंबी आयु के वरदान के लिए प्रसिद्ध है. माना जाता है कि जो भी महिलाएं चौथ माता का आशीर्वाद लेती हैं, उनके पति की आयु क्षीण नहीं होती. यह मंदिर अरावली पर्वत की पहाड़ियों पर बसा है और मंदिर के प्रांगण तक पहुंचने के लिए भक्तों को लंबी सीढ़ियों को चढ़कर जाना होता है. करवाचौथ के मौके पर इस मंदिर में महिलाओं की भीड़ उमड़ जाती है.
मां गौरी का दूसरा रूप
चौथ माता, मां गौरी का दूसरा रूप माना जाता है. मान्यता है कि इस मंदिर में मांगी गई इच्छाएं हमेशा पूरी होती हैं. करवा चौथ के अलावा नवरात्रि के मौके पर भी मंदिर में भक्तों की भीड़ देखने को मिलती है. माता का यह मंदिर इसलिए भी खास है क्योंकि इस मंदिर का निर्माण शासक भीम सिंह ने करवाया था. मंदिर की बनावट राजस्थान की कला और पुराने पारंपरिक काल को दर्शाती है.
मां पार्वती अपनी दोनों बहुएं के साथ
बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में भी मां पार्वती को समर्पित करवा चौथ माता का एक मंदिर मौजूद है. यह मंदिर उन्हेल बायपास के पास के जीवनखेड़ी गांव में बना है, लेकिन फिर भी यहां की मान्यता बहुत ज्यादा है. इस मंदिर में मां पार्वती अपनी दोनों बहुएं, ऋद्धि और सिद्धि, के साथ विराजमान हैं और भगवान गणेश भी साथ हैं. इस मंदिर की खास बात यह है कि यह मंदिर सिर्फ करवाचौथ के दिन ही खुलता है और साल के बाकी दिन बंद रहता है. ये मंदिर डॉ. कैलाश नागवंशी नाम के शख्स ने बनाया है और मंदिर को अपनी मां को समर्पित किया है.
करवा चौथ का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में करवा चौथ का विशेष महत्व माना जाता है. यह व्रत मुख्य रूप से सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से रखती हैं. इस दिन महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निर्जला उपवास करती हैं और भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश तथा करवा माता की पूजा-अर्चना करती हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, करवा चौथ का व्रत पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है. शाम को चंद्रमा निकलने पर महिलाएं चंद्रदेव को अर्घ्य देती हैं और छलनी से चंद्रमा के दर्शन करने के बाद पति का चेहरा देखती हैं. इसके बाद पति के हाथों जल ग्रहण करके व्रत खोला जाता है. यह पर्व भारतीय संस्कृति में वैवाहिक रिश्तों की अहमियत और पारिवारिक परंपराओं को दर्शाता है.