Trump Pakistan Drone Deal : भारत को तेल पर ज्ञान दे रहे, उधर पाकिस्तान को छुपकर ड्रोन बेच रहे ट्रंप, टैरिफ तो अमेरिका पर लगना चाहिए

Trump Pakistan Drone Deal : भारत को तेल पर ज्ञान दे रहे, उधर पाकिस्तान को छुपकर ड्रोन बेच रहे ट्रंप, टैरिफ तो अमेरिका पर लगना चाहिए


अमेरिका की विदेश नीति कितनी दोगली है, इसका सबूत एक बार फिर दुनिया के सामने आया है. एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत को रूस से तेल खरीदने पर नसीहत दे रहे हैं. यही नहीं, भारत पर 100 परसेंट टैरिफ लगाने की तैयारी भी चल रही है. दूसरी तरफ, ट्रंप चोरी-छिपे पाकिस्तान को हथियार बेच रहे हैं. वही पाकिस्तान, जो इन हथियारों का इस्तेमाल आतंकवाद फैलाने में करता है. भारत को नियम-कानून सिखाने वाले अमेरिका का ये दो-मुंह वाला चेहरा अब सामने आ चुका है. ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर टैरिफ भारत पर लगना चाहिए या आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले अमेरिका पर?

भारत पर 100% टैरिफ की धमकी, उधर पाकिस्तान से सैन्य डील

अमेरिकी संसद में एक बिल पेश हुआ है जिसका सीधा निशाना भारत जैसे देश हैं. ये वो देश हैं जो अपनी जरूरतों के लिए रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीद रहे हैं. अमेरिकी नेताओं का तर्क है कि तेल खरीदकर ये देश रूस की अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं. इसीलिए वो भारत और बाकी देशों पर भारी टैक्स और कारोबारी पाबंदियां लगाने की वकालत कर रहे हैं.

लेकिन ठीक इसी समय वाशिंगटन में एक और खेल चल रहा था. ठीक इसी समय वाशिंगटन में एक अलग ही खेल चल रहा था. अमेरिका की जानी-मानी ड्रोन कंपनी ‘पावरस’ (Powerus) ने पाकिस्तानी सेना के साथ एक सीक्रेट डील कर ली है. इस समझौते के तहत पाकिस्तानी सेना को आधुनिक मिलिट्री ड्रोन की पहली खेप सौंपी जाएगी. यानी एक तरफ भारत की एनर्जी सिक्योरिटी पर लगाम कसने की धमकी दी जा रही है, वहीं दूसरी तरफ पड़ोसी पाकिस्तान की फौजी ताकत को चुपचाप मजबूत किया जा रहा है.

ट्रंप के बेटों का कंपनी से सीधा कनेक्शन और आसिम मुनीर से मुलाकात

इस पूरी डील का सबसे चौंकाने वाला फैक्ट ये है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के परिवार का कनेक्शन है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ड्रोन कंपनी ‘पावरस’ जल्द ही ‘ऑरियस ग्रीनवे होल्डिंग्स’ नाम की कंपनी के साथ मर्ज होने वाली है. इस कंपनी में राष्ट्रपति ट्रंप के दोनों बेटों, डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और एरिक ट्रंप का बड़ा शेयर है. रेगुलेटरी फाइलिंग्स से खुलासा हुआ है कि ट्रंप के बेटों का इन्वेस्टमेंट फंड ‘अमेरिकन वेंचर्स’ इस नई बनने वाली कंपनी में 9.9 फीसदी की हिस्सेदारी रखेगा.

इस डील को पक्का करने के लिए पावरस कंपनी के को-फाउंडर ब्रेट वेलिकोविच ने हाल ही में पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर से मुलाकात की थी. दोनों के बीच हुई इस मीटिंग में डिफेंस खरीदारी, मिलिट्री ड्रोन बनाने और लंबे समय तक पाकिस्तानी सेना की ताकत बढ़ाने पर विस्तार से बातचीत हुई.

पाकिस्तान में ही ड्रोन बनाने की तैयारी

ये डील सिर्फ कुछ ड्रोन बेचने तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका और पाकिस्तान के बीच डिफेंस टेक्नोलॉजी का एक बड़ा नेटवर्क खड़ा करने की तैयारी है.

  • लोकल मैन्युफैक्चरिंग: पावरस कंपनी पाकिस्तान में ही अपनी तकनीक से ड्रोन बनाने की संभावनाएं तलाश रही है.
  • जॉइंट टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप: कंपनी का मकसद अमेरिकी और पाकिस्तानी तकनीक को मिलाकर एडवांस मिलिट्री ड्रोन तैयार करना है.
  • पाकिस्तानी बाजार पर नजर: पावरस के सीईओ एंड्रयू फॉक्स का कहना है कि पाकिस्तान का प्राइवेट डिफेंस सेक्टर अभी शुरुआती चरण में है, इसलिए अमेरिकी कंपनियों के लिए वहां बहुत तेजी से कदम जमाने के बड़े मौके मौजूद हैं.

वाशिंगटन से आ रही सफाइयों का सच

जब ये खबर पब्लिक हुई, तो वाशिंगटन से लेकर ट्रंप परिवार तक में हड़कंप मच गया. इसके तुरंत बाद सफाइयों और बयानों का दौर शुरू हो गया.

  1. ट्रंप जूनियर का पक्ष: डोनाल्ड ट्रंप जूनियर के प्रवक्ता ने कहा कि वो केवल एक पैसिव इन्वेस्टर हैं और कंपनी के रोजाना के कामकाज या इस डील में उनकी कोई सीधी भूमिका नहीं है. उन्हें इस डील की पहले से कोई जानकारी भी नहीं थी.
  2. कंपनी की सफाई: पावरस के सीईओ एंड्रयू फॉक्स ने दावा किया कि ये कॉन्ट्रैक्ट पूरी तरह मेरिट के आधार पर हुआ है और इसमें ट्रंप परिवार का कोई बिजनेस प्रेशर नहीं था.
  3. व्हाइट हाउस का बयान: व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव ने साफ कहा कि इस सौदे में किसी भी तरह का ‘कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट’ नहीं है.

लेकिन सवाल ये उठता है कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति का परिवार किसी ऐसे रक्षा सौदे से पूरी तरह अनजान हो सकता है, जो उस देश की सेना के साथ हो रहा है जो भारत के बॉर्डर पर आतंकवादी हरकतों के लिए बदनाम है.

टैरिफ भारत पर नहीं, अमेरिका के दोहरे रवैये पर लगना चाहिए

भारत हमेशा से अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों को सबसे ऊपर रखता आया है. जब भारत रूस से तेल खरीदता है तो वो किसी देश के खिलाफ नहीं बल्कि अपनी 140 करोड़ आबादी की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए ऐसा करता है. इसके बावजूद अमेरिका भारत को नीचा दिखाने और उस पर आर्थिक दबाव बनाने के लिए 100% टैरिफ की धमकियां देता है.

वहीं दूसरी तरफ, जब खुद अमेरिका की कंपनियों और राष्ट्रपति के परिवार के आर्थिक हितों की बात आती है, तो सारे नैतिक नियम और राष्ट्रीय सुरक्षा के दावे हवा में उड़ जाते हैं. पाकिस्तान जैसे देश को, जिसके ऊपर आतंकवाद को पनाह देने के आरोप लगते रहे हैं, एडवांस सैन्य ड्रोन बेचना अमेरिका के इस दोगले चरित्र को एक्सपोज करता है.

अगर दुनिया में व्यापारिक नियमों और नैतिकता का कोई पैमाना है, तो प्रतिबंध और भारी टैरिफ भारत पर नहीं, बल्कि अपने आर्थिक मुनाफे के लिए एक देश की शांति को खतरे में डालने वाले अमेरिका पर लगाए जाने चाहिए.



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