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Indonesia Air Pollution: इंडोनेशिया के बोर्नियो द्वीप पर जंगलों में लगी भीषण आग से उठता धुआं लोगों की सेहत पर भारी पड़ रहा है. पलंगका राया शहर में सांस की परेशानी से जूझ रहे लोगों की मदद के लिए प्रशासन ने ऑक्सीजन बस शुरू की है, जहां मुफ्त में ऑक्सीजन दी जा रही है. स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, अगस्त से रविवार तक धुएं से जुड़ी सांस की बीमारियों के करीब 3.5 लाख मामले सामने आए.
इंडोनेशिया की बस में लगाए गए ऑक्सीजन सिलेंडर. (Reuters)
Indonesia Air Pollution Index: इंडोनेशिया के बोर्नियो द्वीप पर जंगलों में लगी आग का धुआं लोगों की जिंदगी मुश्किल बना रहा है. आसमान में छाई पीली-नारंगी धुंध के बीच लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है, खांसी और आंखों में जलन की शिकायतें बढ़ रही हैं. हालात बिगड़ने पर सेंट्रल कालीमंतन प्रांत के पलंगका राया शहर में स्थानीय प्रशासन ने ऑक्सीजन टैंकों और मेडिकल स्टाफ से लैस एक खास बस शुरू की है. यहां लोगों को मुफ्त में ऑक्सीजन दी जा रही है, ताकि जहरीली हवा के बीच उन्हें कुछ देर राहत मिल सके.
इंडोनेशिया में हर साल जंगलों में आग लगने की घटनाएं होती हैं. खास तौर पर सुमात्रा और बोर्नियो द्वीप इससे प्रभावित होते हैं. लेकिन इस साल आग की तीव्रता एक दशक से भी ज्यादा समय में सबसे अधिक बताई जा रही है. तेज गर्मी और अल नीनो मौसम घटना ने जंगलों और जमीन के भीतर मौजूद पीट की परतों को आग के प्रति ज्यादा संवेदनशील बना दिया है. आग से उठने वाला धुआं इंडोनेशिया के अलावा मलेशिया और सिंगापुर तक पहुंच गया है.
5 से 10 मिनट तक दी जा रही ऑक्सीजन
पलंगका राया में सांस से जुड़ी बीमारियों के मामले बढ़ने के बाद स्थानीय प्रशासन ने सफेद और नीले रंग की ‘ऑक्सीजन बस’ तैनात की है. इसमें ऑक्सीजन सिलेंडर और मेडिकल कर्मचारी मौजूद हैं. सांस लेने में परेशानी महसूस करने वाले लोगों को नाक में छोटी ट्यूब लगाकर 5 से 10 मिनट तक ऑक्सीजन दी जाती है. सेंट्रल कालीमंतन के स्वास्थ्य विभाग ने इस सप्ताह इंस्टाग्राम पर बताया कि इस सेवा का मकसद लोगों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराना है, खासकर उन लोगों को जिन्हें सांस की परेशानी है या खराब हवा के कारण ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत पड़ रही है.
बस में आने वाले लोगों की जानकारी दर्ज की जाती है और उनकी परेशानी के मुताबिक मदद दी जाती है. मेडिकल स्टाफ के मुताबिक, कई लोग खांसी और सांस लेने में दिक्कत की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं. 44 साल की ओक्टाविना ने ऑक्सीजन लेते हुए कहा, ‘यह प्रकृति की ओर से आई आपदा है और हम इसके लिए बहुत कुछ नहीं कर सकते.’ इंडोनेशिया में कई लोग सिर्फ एक नाम से जाने जाते हैं. 31 साल की पुरनासारी ने बताया कि घर से बाहर निकलने के बाद उन्हें सीने में जकड़न और खांसी महसूस होती है. उन्होंने कहा, ‘आज सुबह धुआं बहुत गाढ़ा और पीला था, इसलिए सांस लेने में परेशानी हो रही थी.’ एक अन्य महिला, सिटी जुमियाती ने बताया कि वह लंबे समय से आंखों में लालिमा और जलन, गले में दर्द और खांसी से जूझ रही हैं. उन्होंने कहा कि बस में उन्हें मुफ्त में सांस लेने में मदद मिल पा रही है.
प्रदूषण का स्तर 1,000 के पार
इंडोनेशिया के वायु प्रदूषण सूचकांक यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) में बोर्नियो और सुमात्रा के कुछ इलाकों में प्रदूषण का स्तर 1,000 से ज्यादा दर्ज किया गया है. जबकि 300 या उससे अधिक की रीडिंग को पहले ही खतरनाक श्रेणी में रखा जाता है. स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, जंगलों की आग और धुएं से जुड़ी सांस की बीमारियों के करीब 3.5 लाख मामले अगस्त से रविवार तक सामने आए. इनमें सेंट्रल कालीमंतन में लगभग 31,000 मामले दर्ज किए गए. यह उन इलाकों में शामिल है जहां आग और धुएं का असर ज्यादा गंभीर है. जंगलों की आग पर नजर रखने वाली संस्था नुसंतारा एटलस के मुताबिक, सितंबर तक के नौ महीनों में आग ने 19 लाख हेक्टेयर से ज्यादा जमीन को अपनी चपेट में लिया. यह करीब 47 लाख एकड़ के बराबर है. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, इंडोनेशिया की सरकार ने इस आंकड़े की न तो पुष्टि की है और न ही इससे इनकार किया है.
जहरीली हवा से लोगों का धैर्य भी टूट रहा
धुएं का असर सिर्फ सेहत तक सीमित नहीं है. पड़ोसी देशों ने भी खराब हवा को लेकर आपत्ति जताई है. वहीं, इंडोनेशिया के भीतर भी सरकार की प्रतिक्रिया को लेकर नाराजगी बढ़ रही है. स्थानीय समाचार वेबसाइट कोम्पास के मुताबिक, पिछले सप्ताह सैकड़ों छात्रों ने प्रांतीय गवर्नर के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया. उनकी मांग थी कि जंगलों की आग पर काबू पाने के लिए सरकार और ज्यादा कदम उठाए. स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि देशभर में करीब 500 ऐसे केंद्र बनाए गए हैं, जहां लोगों को धुएं से जुड़ी बीमारियों के लिए मुफ्त ऑक्सीजन और इलाज मिल सकता है. इनमें से लगभग 300 केंद्र सेंट्रल कालीमंतन में हैं.