Microsoft Layoffs 2026: दुनिया की दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट के एक फैसले ने नौकरीपेशा लोगों के बीच नई चर्चा शुरू कर दी है.कंपनी ने दुनियाभर में करीब 60 हजार कर्मचारियों को स्वेच्छा से नौकरी छोड़ने का विकल्प दिया है. इसमें भारत के कर्मचारी भी शामिल हो सकते हैं.यह संख्या कितनी बड़ी है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि माइक्रोसॉफ्ट के कुल कर्मचारियों में लगभग हर चार में से एक कर्मचारी इस ऑफर के दायरे में आ सकता है लेकिन क्या दुनिया में इससे पहले किसी कंपनी ने इतनी बड़ी संख्या में नौकरियां खत्म की हैं? इसका जवाब हां है. अमेरिका की जनरल मोटर्स ने 1991 में 74 हजार पद खत्म करने की योजना बनाई थी. IBM ने 1993 में 60 हजार पदों की कटौती की घोषणा की थी वहीं जर्मनी की वॉल्सवैगन (Volkswagen)में एक लाख तक पद घटाने की संभावित योजना चर्चा में रही है हालांकि माइक्रोसॉफ्ट का मामला इनसे अलग है, क्योंकि उसने कर्मचारियों को जबरन निकालने के बजाय स्वैच्छिक एग्जिट का विकल्प दिया है.
माइक्रोसॉफ्ट ने 60 हजार कर्मचारियों के लिए क्या घोषणा की?
माइक्रोसॉफ्ट ने 26 अक्टूबर 2026 को वॉलंटरी एग्जिट ऑफर (Voluntary Exit Offer,VEO) नाम से एक नया कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की.इसके तहत कंपनी के पात्र कर्मचारी अपनी इच्छा से नौकरी छोड़ने का विकल्प चुन सकते हैं.कंपनी ऐसे कर्मचारियों को आर्थिक सहायता और आगे करियर की योजना बनाने के लिए मदद देगी.माइक्रोसॉफ्ट की एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और चीफ पीपुल ऑफिसर एमी कोलमैन ने कंपनी के आधिकारिक ब्लॉग पर इसकी जानकारी दी.उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम उन कर्मचारियों के लिए है जो कंपनी से बाहर नए अवसर तलाशने के बारे में सोच रहे हैं.इसके साथ ही यह कंपनी की अलग-अलग टीमों को बदलती कारोबारी जरूरतों के अनुसार कर्मचारियों की संख्या और कामकाज की व्यवस्था में बदलाव करने का अवसर भी देगा.कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह एक सीमित समय के लिए शुरू किया गया स्वैच्छिक कार्यक्रम है.इसका मतलब यह नहीं है कि सभी 60 हजार कर्मचारियों की नौकरी खत्म हो गई है.
माइक्रोसॉफ्ट के कुल कितने कर्मचारी हैं?
जून 2026 तक माइक्रोसॉफ्ट में दुनियाभर में लगभग 2,23,000 फुल-टाइम कर्मचारी काम कर रहे थे.
इनमें से करीब 60,000 कर्मचारियों को नए एग्जिट कार्यक्रम के लिए पात्र बताया गया है.यह कंपनी के कुल कर्मचारियों का लगभग 27 प्रतिशत हिस्सा है यानी माइक्रोसॉफ्ट के हर चार कर्मचारियों में से लगभग एक इस कार्यक्रम के दायरे में आ सकता है हालांकि यह केवल पात्र कर्मचारियों की संख्या है.कंपनी ने अभी यह नहीं बताया है कि कितने कर्मचारी इस ऑफर को स्वीकार करेंगे और वास्तव में कितने लोग नौकरी छोड़ेंगे.
भारत के 23 हजार कर्मचारियों पर क्या पड़ेगा असर?
माइक्रोसॉफ्ट के नए फैसले में भारत भी शामिल है.कंपनी ने चार देशों के पात्र कर्मचारियों को स्वैच्छिक एग्जिट का विकल्प दिया है.इनमें भारत, अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा शामिल हैं.PTI की रिपोर्ट के मुताबिक माइक्रोसॉफ्ट में भारत में लगभग 23,000 कर्मचारी काम करते हैं हालांकि कंपनी ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि इनमें से कितने भारतीय कर्मचारी नए एग्जिट ऑफर के पात्र होंगे इसलिए यह कहना गलत होगा कि भारत के सभी 23 हजार कर्मचारियों की नौकरी खतरे में है.किसी कर्मचारी की पात्रता उसकी जॉब लेवल, विभाग और संबंधित टीम की कारोबारी जरूरतों पर निर्भर करेगी.
किन कर्मचारियों को मिलेगा नौकरी छोड़ने का विकल्प?
माइक्रोसॉफ्ट ने इस कार्यक्रम के लिए अपने आंतरिक जॉब ग्रेड के अनुसार पात्रता निर्धारित की है.कंपनी के मुताबिक लेवल 70 और उससे नीचे के पात्र कर्मचारियों को इस कार्यक्रम में शामिल किया जा सकता है हालांकि केवल जॉब लेवल के आधार पर हर कर्मचारी को यह ऑफर नहीं मिलेगा.कंपनी की कुछ टीमें इस कार्यक्रम में भाग ले रही हैं जबकि कुछ टीमें इससे बाहर हैं.यह फैसला संबंधित विभाग की कारोबारी प्राथमिकताओं, ग्राहकों से किए गए वादों और कर्मचारियों की जरूरतों के आधार पर लिया गया है.
रिपोर्टों के मुताबिक एआई एक्सपीरिएंस,को पायलट, फाइनेंस,हयूमैन रिर्सोसेज, एक्सबॉक्स और विंडोज + डिवाइसेज जैसे विभागों के कुछ कर्मचारी पात्र हो सकते हैं.वहीं मार्केटिंग, कॉर्मशियल बिजनेस और सिक्योरिटी जैसे विभागों को कार्यक्रम से बाहर रखे जाने की जानकारी सामने आई है.पात्र कर्मचारियों को कंपनी की ओर से ईमेल भेजकर ऑफर की शर्तें बताई जाएंगी.
नौकरी छोड़ने पर कितना पैसा मिलेगा?
माइक्रोसॉफ्ट ने स्वैच्छिक एग्जिट लेने वाले कर्मचारियों को आर्थिक सहायता देने की बात कही है.PTI की रिपोर्ट के अनुसार यह पैकेज सामान्य सेवरेंस व्यवस्था जैसा हो सकता है.इसके तहत कर्मचारी को सेवा के प्रत्येक पूरे वर्ष के बदले एक महीने की बेसिक सैलरी के बराबर राशि मिलने की बात सामने आई है.इसके अलावा हेल्थ इंश्योरेंस और करियर ट्रांजिशन से जुड़ी सहायता भी मिल सकती है.उदाहरण के लिए अगर किसी कर्मचारी की मासिक बेसिक सैलरी एक लाख रुपये है और उसने कंपनी में पांच साल पूरे किए हैं तो इस गणना के आधार पर पांच लाख रुपये बनते हैं.माइक्रोसॉफ्ट ने अपने सार्वजनिक बयान में सभी कर्मचारियों के लिए एक समान भुगतान फॉर्मूला घोषित नहीं किया है.
भारतीय कर्मचारियों को कब तक लेना होगा फैसला?
रिपोर्टों के मुताबिक भारत में पात्र कर्मचारियों को स्वैच्छिक एग्जिट ऑफर स्वीकार करने के लिए 1 दिसंबर 2026 तक का समय मिल सकता है.कंपनी की ओर से संबंधित कर्मचारियों को ईमेल के जरिए उनके ऑफर की जानकारी दी जाएगी.कुछ रिपोर्टों में ऑफर स्वीकार करने वाले कर्मचारियों के लिए दिसंबर 2026 के अंत तक कंपनी छोड़ने की समयसीमा बताई गई है हालांकि कर्मचारियों के लिए अंतिम रूप से लागू तारीखें उनके व्यक्तिगत ऑफर की शर्तों पर निर्भर करेंगी.इसलिए पात्र कर्मचारियों को कंपनी की ओर से भेजे गए आधिकारिक ईमेल को ही अंतिम आधार मानना चाहिए.
AI पर अरबों डॉलर खर्च कर रही माइक्रोसॉफ्ट
माइक्रोसॉफ्ट का यह फैसला ऐसे समय आया है जब कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड कंप्यूटिंग के क्षेत्र में भारी निवेश कर रही है.रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार कंपनी ने 2026 के लिए लगभग 175 अरब डॉलर के पूंजीगत खर्च का अनुमान दिया है.AI सिस्टम चलाने के लिए बड़े डेटा सेंटर, कंप्यूटिंग उपकरण और दूसरी तकनीकी सुविधाओं की जरूरत पड़ती है.इन पर भारी खर्च हो रहा है. कंपनी ने इस कार्यक्रम को बदलती कारोबारी जरूरतों के अनुसार कर्मचारियों को विकल्प देने और संगठन में लचीलापन बढ़ाने से जोड़ा है.
माइक्रोसॉफ्ट में पहले भी हो चुकी है कटौती
यह माइक्रोसॉफ्ट का 2026 में कर्मचारियों से जुड़ा पहला बड़ा फैसला नहीं है.इससे पहले कंपनी ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति कार्यक्रम शुरू किया था.रिपोर्टों के अनुसार अप्रैल-मई 2026 के दौरान लगभग 8,600 से 9,000 अमेरिकी कर्मचारियों को इस तरह के कार्यक्रम का विकल्प दिया गया था.इसके अलावा जुलाई 2026 में कंपनी ने लगभग 4,800 पदों की कटौती की घोषणा की थी.
क्या माइक्रोसॉफ्ट का फैसला दुनिया की सबसे बड़ी छंटनी है?
माइक्रोसॉफ्ट के 60 हजार कर्मचारियों वाले आंकड़े के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या किसी कंपनी में पहले भी इतनी बड़ी संख्या में नौकरियां प्रभावित हुई हैं.ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि कई कंपनियों ने इससे भी बड़े स्तर पर कर्मचारियों की संख्या घटाने की घोषणा की है लेकिन यहां तीन बातों में अंतर समझना जरूरी है.पहला कंपनी कितने कर्मचारियों को स्वैच्छिक एग्जिट का विकल्प देती है.दूसरा कंपनी कितने पद खत्म करने की योजना घोषित करती है.तीसरा वास्तव में कितने कर्मचारियों की नौकरी जाती है.ये तीनों आंकड़े अलग-अलग हो सकते हैं .
जनरल मोटर्स: 1991 में 74 हजार नौकरियां खत्म
दुनिया की बड़ी ऐतिहासिक छंटनियों में अमेरिकी ऑटोमोबाइल कंपनी जनरल मोटर्स का नाम प्रमुख है.
दिसंबर 1991 में कंपनी ने 21 कारखाने बंद करने और अगले चार वर्षों में 74,000 पद समाप्त करने की योजना घोषित की थी.इसमें लगभग 54,000 उत्पादन क्षेत्र के पद और 20,000 कार्यालय तथा प्रबंधन से जुड़े पद शामिल थे.उस समय कंपनी घाटे और बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सामना कर रही थी.जापानी कार कंपनियों से मुकाबला बढ़ रहा था और अमेरिकी ऑटोमोबाइल बाजार में मांग कमजोर थी.कंपनी ने अपने खर्च कम करने और कारोबार को दोबारा व्यवस्थित करने के लिए यह योजना बनाई थी.सभी 74 हजार कर्मचारियों को एक ही दिन नौकरी से नहीं निकाला गया था.
IBM: 1993 में 60 हजार पद घटाने का ऐलान
टेक्नोलॉजी क्षेत्र में IBM की छंटनी एक बड़ा ऐतिहासिक उदाहरण है.जुलाई 1993 में IBM ने लगभग 60,000 पदों की कटौती की घोषणा की थी.उस समय कंप्यूटर उद्योग तेजी से बदल रहा था.पर्सनल कंप्यूटर और नई तकनीकों के आने से कंपनी के पारंपरिक कारोबार पर दबाव बढ़ गया था.IBM को अपने कारोबार और खर्च की व्यवस्था में बड़े बदलाव करने पड़े.कंपनी ने पुनर्गठन के तहत कर्मचारियों की संख्या घटाने की योजना बनाई.इस मामले की खास बात यह है कि लगभग तीन दशक पहले भी एक बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनी ने 60 हजार पदों की कटौती की घोषणा की थी.
Volkswagen: एक लाख तक पद घटाने की योजना
जर्मनी की ऑटोमोबाइल कंपनी वाल्सवैगन (Volkswagen)में भी बड़े पैमाने पर नौकरियां घटाने की योजना सामने आई है.जुलाई 2026 में रायटर्स ने रिपोर्ट दी थी कि कंपनी के CEO ओलिवर ब्लूमे ने कर्मचारियों को बताया कि प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए लगभग 50,000 अतिरिक्त पदों की कटौती की जरूरत पड़ सकती है.कंपनी पहले ही समूह स्तर पर लगभग 50,000 पद घटाने की योजना पर सहमति बना चुकी थी.
सियर्स: 1993 में 50 हजार पदों की कटौती
अमेरिकी रिटेल कंपनी Sears ने जनवरी 1993 में लगभग 50,000 पदों की कटौती की घोषणा की थी.उस समय अमेरिका के खुदरा कारोबार में बड़े बदलाव हो रहे थे.कंपनी को प्रतिस्पर्धा और कारोबार के पुनर्गठन जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था.लॉस एंजिलेस टाइम्स रिपोर्ट में सियर्स (Sears) की इस घोषणा को उस दौर की बड़ी कर्मचारी कटौतियों में शामिल किया गया था.यह उदाहरण दिखाता है कि बड़े पैमाने पर पद समाप्त करने की योजनाएं केवल टेक्नोलॉजी या ऑटोमोबाइल क्षेत्र तक सीमित नहीं रही हैं.
सिटीग्रुप: 2008 में 50 हजार पदों की कटौती
साल 2008 का वैश्विक वित्तीय संकट दुनिया की बड़ी आर्थिक घटनाओं में शामिल है.इस संकट के दौरान अमेरिका की बैंकिंग कंपनी सिटीग्रुप ने लगभग 50,000 पदों की कटौती की घोषणा की थी.बैंकिंग क्षेत्र में बढ़ते घाटे और वित्तीय दबाव के कारण कंपनी को अपने खर्च कम करने पड़े.घोषित संख्या में कारोबार बेचने से कर्मचारियों की संख्या में आने वाली कमी भी शामिल थी.इसलिए सभी 50 हजार पदों को सीधे कर्मचारियों की बर्खास्तगी के रूप में देखना सही नहीं होगा.
AT&T: 1996 में 40 हजार नौकरियां कम करने की योजना
अमेरिकी टेलीकॉम कंपनी AT&T ने जनवरी 1996 में लगभग 40,000 नौकरियां कम करने की योजना घोषित की थी.यह कंपनी के कुल कर्मचारियों का लगभग 13 प्रतिशत हिस्सा था.कंपनी अपने कारोबार का पुनर्गठन कर रही थी.उस समय की रिपोर्टों के मुताबिक लगभग 6,500 कर्मचारियों ने पहले ही स्वैच्छिक सेवरेंस पैकेज स्वीकार कर लिया था.इसके अलावा कुछ पद कारोबार बेचने से प्रभावित होने थे. लगभग 30 हजार कर्मचारियों के अनैच्छिक रूप से नौकरी गंवाने की संभावना जताई गई थी.
Ford: 2002 में 35 हजार पद घटाने की योजना
अमेरिकी वाहन निर्माता फोर्ड ने 2002 में लगभग 35,000 पदों की कटौती से जुड़ी पुनर्गठन योजना घोषित की थी.कंपनी लागत घटाने और अपने कारोबार को ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाने की कोशिश कर रही थी.ऑटोमोबाइल उद्योग में कमजोर मांग और बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने कंपनी पर दबाव बढ़ाया था. इसके चलते कंपनी ने उत्पादन और कर्मचारियों की संख्या से जुड़ी व्यवस्था में बदलाव की योजना बनाई.
बोइंग: 2001 में 31,000 पदों की कटौती
अमेरिकी विमान निर्माता बोइंग ने 2001 में लगभग 31,000 पदों की कटौती की योजना घोषित की थी.
उस समय विमानन उद्योग बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा था.11 सितंबर 2001 के आतंकवादी हमलों के बाद हवाई यात्रा और विमानन कंपनियों के कारोबार पर गंभीर असर पड़ा था.विमानों की मांग कमजोर होने के कारण बोइंग ने कर्मचारियों की संख्या कम करने की योजना बनाई.यह उदाहरण बताता है कि वैश्विक घटनाओं का असर भी बड़ी कंपनियों में रोजगार पर पड़ सकता है.
HP: 2012 में 27 हजार पदों की कटौती की घोषणा
टेक्नोलॉजी कंपनी हेवलेट पैकर्ड (Hewlett-Packard)यानी HP ने 2012 में लगभग 27,000 पदों की कटौती की योजना घोषित की थी.कंपनी अपने कारोबार को दोबारा व्यवस्थित कर रही थी.उस समय टेक्नोलॉजी बाजार में तेजी से बदलाव हो रहे थे.कंपनी लागत कम करने और अपने कारोबारी प्रदर्शन में सुधार लाने के लिए पुनर्गठन कर रही थी.
Amazon: 2023 में लगभग 27 हजार पद खत्म
ई-कॉमर्स और टेक्नोलॉजी कंपनी Amazon ने 2023 में दो चरणों में लगभग 27,000 कॉर्पोरेट पदों की कटौती की घोषणा की थी.पहले जनवरी 2023 में लगभग 18,000 पदों की कटौती का ऐलान हुआ. इसके बाद मार्च में लगभग 9,000 अतिरिक्त पद घटाने की घोषणा की गई.कंपनी ने आर्थिक अनिश्चितता और खर्च नियंत्रित करने की जरूरत को इन फैसलों से जोड़ा था.यह टेक्नोलॉजी क्षेत्र में हाल के वर्षों की बड़ी घोषित छंटनियों में शामिल है.
Meta: लगभग 21 हजार पदों की कटौती
Facebook और Instagram की मूल कंपनी मेटा ने भी बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की संख्या घटाने की घोषणा की थी.नवंबर 2022 में कंपनी ने लगभग 11,000 कर्मचारियों की छंटनी का ऐलान किया.इसके बाद मार्च 2023 में लगभग 10,000 अतिरिक्त पद खत्म करने की योजना घोषित की गई.इस तरह दोनों चरणों को मिलाकर लगभग 21,000 पद प्रभावित हुए.कंपनी ने खर्च कम करने और कामकाज को ज्यादा कुशल बनाने के उद्देश्य से ये फैसले लिए थे.