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Who is Fazlur Rehman demanding Imran Khan release: राजनीति ऐसी चीज हैं, जहां कट्टर दुश्मनों में भी दोस्ती हो जाती है. कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है पाकिस्तान की सियासत में, जहां इमरान खान के कट्टर दुश्मन रहे मौलाना फजलुर रहमान अब उनकी रिहाई की मांग कर रहे हैं.
इमरान खान के साथ आए मौलाना डीजल.
Who is Fazlur Rehman demanding Imran Khan release: पाकिस्तान की राजनीति में एक नया मोड़ देखने को मिल रहा है. जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने ऐसी धमाकेदार मांग की है, जो पाकिस्तान की राजनीति को ही बदल देगी. मौलाना डीजल के नाम से मशहूर फजलुर रहमान ने जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई की मांग कर रहे हैं. वह अपनी राजनीतिक सभाओं में इमरान की रिहाई का मुद्दा उठा रहे हैं. साथ ही उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ और सरकार के बीच बातचीत कराने की कोशिश भी कर रहे हैं.
इस घटनाक्रम को पाकिस्तान की राजनीति में बदलते समीकरणों के तौर पर देखा जा रहा है. इसकी वजह दोनों नेताओं के बीच पुरानी राजनीतिक दुश्मनी है. एक समय मौलाना फजलुर रहमान इमरान खान के कट्टर विरोधियों में गिने जाते थे. इमरान भी उन्हें ‘मौलाना डीजल’ कहकर निशाना बनाते थे और अब वही मौलाना उनकी रिहाई के समर्थन में आवाज उठा रहे हैं. यही तो वक्त का पहिया है, जो उल्टा घूम गया है.
पुरानी दुश्मनी कैसे बदली हमदर्दी में?
फजलुर रहमान ने पहले इमरान खान पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए थे. उन्होंने उन्हें कथित तौर पर इजरायल समर्थक एजेंट तक कहा था. दूसरी ओर इमरान खान भी अपने भाषणों में मौलाना का मजाक उड़ाते रहे हैं. ऐसे में दोनों के बीच राजनीतिक मुद्दे पर सहमति बनना पाकिस्तान के मौजूदा हालात में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. मौलाना के इस रुख से यह संकेत मिलता है कि पाकिस्तान में राजनीतिक मतभेदों के बावजूद कुछ मुद्दों पर विपक्षी दल एक साथ आ सकते हैं. हालांकि उनकी कोशिशों से इमरान खान की रिहाई का रास्ता खुलेगा या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है.
इमरान खान की कैसे हुई राजनीति में एंट्री?
- पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार हामिद मीर ने बांग्लादेश के अखबार ‘प्रथम आलो’ में लिखे एक लेख में दोनों नेताओं के राजनीतिक सफर से जुड़ा पुराना घटनाक्रम साझा किया है. उन्होंने बताया कि वह इमरान खान और फजलुर रहमान को वर्ष 1988 से जानते हैं.
- मीर के मुताबिक उस समय पाकिस्तान में जनरल जिया-उल-हक का सैन्य शासन था. उन्होंने प्रधानमंत्री मुहम्मद खान जुनेजो को भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच पद से हटा दिया था. जुनेजो को 1985 के गैर-दलीय चुनावों के बाद जिया ने ही प्रधानमंत्री नियुक्त किया था. प्रधानमंत्री को हटाए जाने के दौरान पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री नवाज शरीफ ने जुनेजो का साथ देने के बजाय जनरल जिया का समर्थन किया था.
- हामिद मीर बताते हैं कि जुनेजो को हटाने के बाद जनरल जिया-उल-हक इमरान खान को अपनी नई सरकार में शामिल करना चाहते थे. इमरान खान ने 1987 में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की थी, लेकिन जिया के कहने पर वह क्रिकेट में वापस लौट आए.मीर के लेख के मुताबिक जनरल जिया को उम्मीद थी कि इमरान खान की लोकप्रियता से उनकी गिरती छवि को सुधारने में मदद मिलेगी.
कट्टर दुश्मनों में कैसे हुई हमदर्दी?
आज इमरान खान और मौलाना फजलुर रहमान के बीच बनते नए समीकरण पाकिस्तान की राजनीति में एक अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं. हालांकि दोनों के बीच यह नजदीकी कितनी दूर तक जाएगी, इसका फैसला आने वाले वक्त में होगा. मौलाना फजलुर रहमान ने पाकिस्तान सरकार और इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के बीच गतिरोध को हल करने के लिए मध्यस्थता की भूमिका निभाने का ऑफर दिया है. सरकारी सूत्र बता रहे हैं कि मौलाना फजलुर रहमान ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को सलाह दी कि वे खैबर पख्तूनख्वा में बल प्रयोग करने के बजाय बातचीत का रास्ता चुनें.