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जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्विवद्यालय में पिछले 20 साल से लगातार छात्र संघ चुनाव कराने की मांग की जा रही है. कई बार मामला कोर्ट तक भी पहुंचा, हालांकि अब तक चुनाव नहीं हो सके. रविवार को एक बारगी लग रहा था कि छात्रों और विवि में सहमति बन जाएगी, मगर विवि की एक शर्त ने फिर से छात्रों को उकसा दिया.
Jamia Student Union Election 2026, Jamia Millia Islamia News: जामिया यूनिवर्सिटी छात्र आंदोलन के बाद बदला फैसला.
जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में 2006 के बाद से चुनाव नहीं हुए हैं. इस बार छात्र अपनी चुनाव की मांग मनवाने के लिए भूख हड़ताल पर बैठे हैं. उनकी मांग है कि तत्काल छात्र संघ चुनाव कराए जाएं. रविवार को छात्रों और विवि प्रशासन के बीच सहमति बनते नजर आई थी. हालांकि विवि प्रशासन की ओर से जारी आदेश में जोड़ी गई नई शर्त से मामला फिर बिगड़ गया. तब तक पांच में से 3 छात्र भूख हड़ताल खत्म कर चुके थे, बाद में उन्होंने विवि प्रशासन पर धोखा देने का आरोप लगाते हुए भूख हड़ताल पर बैठे 2 छात्रों के समर्थन कर ऐलान कर दिया है.
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव कराने की मांग कोई नहीं हैं. 2006 से लगातार छात्र इसकी मांग कर रहे हैं. दरअसल उस समय छात्रों और विवि प्रशासन के बीच बढ़ रहे टकराव को देखते हुए छात्र संघ इकाई को भंग कर दिया गया था. इसके बाद से कभी चुनाव नहीं हो पाए. 2012 में हाईकोर्ट के आदेश पर छात्र संघ चुनाव के नए नियमों का एक ड्राफ्ट भी तैयार कराया गया था, जो आज तक लागू नहीं किया गया.
रविवार को छात्रों के साथ सहमति बनने के बाद विवि प्रशासन ने जो आदेश जारी किया, उसमें कहा गया कि छात्र संघ संविधान लागू होने के 15 दिन के अंदर चुनाव कराए जाएंगे. छात्रों का कहना है कि अब तक 2012 और 2017 में भी ऐसे नया संविधान बनाए जाने के नाम पर छात्रों को बरगलाया गया, लेकिन आज तक न तो चुनाव का नया संविधान लागू हुआ और न ही चुनाव कराए गए.
जामिया मिल्लिया में आखिरी बार छात्र संघ चुनाव 2005 में हुए थे. हालांकि अगले ही साल 31 मार्च को निर्वाचित छात्र संघ को भंग कर दिया गया था. इसके पीछे कैंपस में हो रही हिंसक घटनाओं को हवाला दिया गया था. ये भी बताया गया था कि इससे पढ़ाई के माहौल पर असर पड़ रहा है. 2012 में राज्यसभा में तत्कालीन मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री ई. अहमद ने एक सवाल के जवाब में बताया था कि छात्र संघ को हिंसक घटनाओं के बाद भंग किया गया था. इसकी सबसे बड़ी वजह कुलपति पर हमला था. हालांकि कुछ तत्कालीन मीडिया रिपोर्ट में इस बात का भी दावा किया गया था कि विवि प्रशासन और छात्र संघ के बीच कई मुद्दों को लेकर कुछ अहम मुद्दों पर टकराव था. विवि प्रशासन ऐसा मान रहा था कि छात्र संघ उन मुद्दों में भी हस्तक्षेप कर रहा है जो असल में उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आते.
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