कार्तिक संकष्टी चतुर्थी कब है? परिघ योग में गणेश पूजा, जानें तारीख, मुहूर्त
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Vakratunda Sankashti Chaturthi 2026 Date: कार्तिक संकष्टी चतुर्थी या वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी व्रत कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखते हैं. इस बार संकष्टी चतुर्थी व्रत पर परिघ योग बन रहा है, जिसमें शत्रुओं पर विजय के लिए कार्य करते हैं. इस व्रत में चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं, लेकिन इस बार इंतजार करना होगा. आइए जानते हैं वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी की तारीख और मुहूर्त के बारे में.
वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी व्रत में गणेश पूजा करके चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं. (Photo: AI)
Vakratunda Sankashti Chaturthi 2026 Date: कार्तिक माह की संकष्टी चतुर्थी को वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी कहते हैं, जो कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को होती है. इस दिन व्रत रखकर गणेश जी की पूजा करते हैं और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजा करते हैं. इस बार वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी पर परिघ योग बन रहा है. जो लोग यह व्रत रखते हैं और विधिपूर्वक गणेश जी की पूजा करते हैं, उनके कष्ट और जीवन के संकट दूर होते हैं. गणपति बप्पा के आशीर्वाद से शुभता आती है और कार्य सफल होते हैं. इस व्रत में शाम को चंद्रमा की प्रतीक्षा करनी होती है क्योंकि यह देरी से उगता है.
वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी 2026 तारीख
वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी 2026 मुहूर्त
यदि आपको व्रत रखना है तो आप गणेश जी की पूजा शुभ-उत्तम मुहूर्त में सुबह 06:31 ए एम से 07:54 ए एम के बीच कर सकते हैं, उसके बाद लाभ-उन्नति मुहूर्त 12:05 पी एम से 01:28 पी एम तक है, वहीं अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त 01:28 पी एम से 02:52 पी एम तक रहेगा.
चतुर्थी व्रत और पूजा का संकल्प आप ब्रह्म मुहूर्त में 04:48 ए एम से 05:39 ए एम के बीच कर सकते हैं. उस दिन का शुभ समय या अभिजीत मुहूर्त 11:42 ए एम से 12:27 पी एम तक है.
परिघ योग में गणेश पूजा
वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी पर परिघ योग बन रहा है, जो प्रात:काल से लेकर देर रात 12:06 ए एम तक है. वहीं रोहिणी नक्षत्र प्रात:काल से लेकर सुबह 11:11 ए एम तक है. उसके बाद से मृगशिरा नक्षत्र है. परिघ योग के देवता विश्वकर्मा और प्रमुख ग्रह शनि हैं. इस योग में आप शत्रुओं पर विजय पाने के लिए काम कर सकते हैं. इसमें पूजा पाठ की भी कोई मनाही नहीं है. शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं.
वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी 2026 चंद्रोदय
वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी को सुबह में गणेश जी की पूजा करने के बाद रात में चंद्रमा की पूजा करते हैं. इस रात चंद्रोदय 8 बजकर 17 मिनट पर होगा. इस समय में आप अर्घ्य देकर चंद्रमा की पूजा कर लें. इस प्रकार से चतुर्थी की पूजा संपन्न हो जाएगी.
वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी 2026 पारण समय
वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी व्रत का पारण 30 अक्टूबर को किया जाएगा. सूर्योदय 06:31 ए एम पर होगा, उसके बाद से आप पारण करके व्रत को पूरा कर लें. चतुर्थी का पारण शिव योग में होगा.