मसूर की खेती से कमाना है बंपर मुनाफा? बुवाई से पहले जान लें जरूरी बातें
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Lentil Farming Tips: मसूर की खेती से अच्छी कमाई करना चाहते हैं, तो बुवाई से पहले कुछ जरूरी बातें जान लीजिए. सही समय पर खेत में बीज डालने और खेती का तरीका बदलने से उत्पादन बेहतर हो सकता है. किसान अंशुमान सिंह ने लोकल 18 को बताया कि मसूर की खेती में किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है.
सतना. अगर आप किसान हैं और कम लागत में अच्छी पैदावार लेकर अपनी कमाई बढ़ाना चाहते हैं, तो मसूर की खेती आपके लिए अच्छा विकल्प बन सकती है. इस फसल की खास बात यह है कि इसे ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती और यह कम उपजाऊ जमीन में भी उगाई जा सकती है. हालांकि अच्छी पैदावार के लिए सही समय पर बुवाई, बीजों का उपचार और सिंचाई का ध्यान रखना जरूरी है. अगर किसान शुरुआत से ही खेती की सही तकनीक अपनाते हैं, तो फसल से बेहतर उत्पादन मिलने की संभावना बढ़ जाती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि मसूर की खेती कब करनी चाहिए, प्रति एकड़ कितना बीज लगेगा और किन किस्मों से अच्छी पैदावार मिल सकती है.
लोकल 18 को जानकारी देते हुए सतना के किसान अंशुमान सिंह ने बताया कि मसूर की खेती के लिए अक्टूबर के आखिरी सप्ताह से लेकर 15 नवंबर तक का समय सबसे अच्छा माना जाता है. इस दौरान तापमान लगभग 20 से 25 डिग्री सेल्सियस रहने पर बीजों का अंकुरण बेहतर होता है और फसल की शुरुआती बढ़वार में मदद मिलती है, इसलिए किसानों को मौसम और खेत की स्थिति को ध्यान में रखते हुए समय पर बुवाई की तैयारी करनी चाहिए. हालांकि इस बार के जैसे कई बार धान की कटाई देर से होने के कारण किसान मसूर की बुवाई समय पर नहीं कर पाते. ऐसी स्थिति में देर से बोई जाने वाली किस्मों का इस्तेमाल करके 25 नवंबर तक बुवाई की जा सकती है.
एक एकड़ में कितना बीज लगेगा?
मसूर की खेती में बीज की सही मात्रा का ध्यान रखना भी जरूरी है. एक्सपर्ट के मुताबिक, छोटे दाने वाली किस्मों की बुवाई के लिए प्रति एकड़ 12 से 15 किलो बीज की जरूरत होती है. वहीं बड़े दाने वाली किस्मों के लिए प्रति एकड़ 16 से 18 किलो बीज रखना चाहिए. किस्म के अनुसार बीज की मात्रा तय करने से खेत में पौधों की उचित संख्या बनाए रखने में मदद मिलती है. बुवाई से पहले बीजों का उपचार करना भी जरूरी है. इसके लिए थिरम या बाविस्टिन जैसे फंगीसाइड से बीज उपचारित करना चाहिए. इसके बाद राइजोबियम कल्चर का इस्तेमाल करना चाहिए. इससे बीजों को शुरुआती अवस्था में कुछ रोगों से बचाने और पौधों की जड़ों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद मिलती है.
कैसी जमीन में आसानी से उगती है मसूर?
मसूर की खेती के लिए हल्की दोमट और मटियार मिट्टी उपयुक्त रहती है. इसकी खेती ऐसी जमीन में भी की जा सकती है, जहां दूसरी फसलों की तुलना में उत्पादन कम मिलता हो. हालांकि खेत में जल निकास की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए और उकठा रोग की समस्या वाले खेतों से बचना चाहिए.
कम सिंचाई में तैयार हो जाती है फसल
मसूर की खेती का एक बड़ा फायदा यह है कि इसमें दूसरी कई फसलों के मुकाबले कम सिंचाई की जरूरत पड़ती है. अगर सर्दियों में बारिश नहीं होती है, तो सामान्य परिस्थितियों में पूरी फसल के दौरान दो सिंचाई पर्याप्त हो सकती हैं. पहली सिंचाई बुवाई के लगभग 30 से 35 दिन बाद यानी फूल आने से पहले करनी चाहिए. वहीं दूसरी सिंचाई उस समय जरूरी होती है, जब पौधों में फलियां बन रही हों. हालांकि सिंचाई का फैसला खेत में नमी और मौसम की स्थिति देखकर करना चाहिए क्योंकि खेत में ज्यादा पानी भरने से फसल को नुकसान भी हो सकता है.
इन किस्मों से मिल सकती है अच्छी पैदावार
मसूर की खेती में अच्छी पैदावार पाने के लिए उन्नत किस्मों का चुनाव महत्वपूर्ण है. जेएल-3, आईपीएल-316 और आरवीएल-31 जैसी किस्मों का इस्तेमाल सबसे बेस्ट रहेगा. मसूर की फसल सामान्य तौर पर लगभग 110 से 130 दिनों में पककर तैयार हो जाती है. अनुकूल मौसम और सही कृषि प्रबंधन मिलने पर प्रति एकड़ 5 से 7 क्विंटल तक पैदावार मिलती है.
कुल मिलाकर मसूर उन किसानों के लिए उपयोगी विकल्प बन सकती है, जो कम सिंचाई में दलहन फसल उगाना चाहते हैं. समय पर बुवाई, सही बीज मात्रा, बीज उपचार और जरूरत के अनुसार सिंचाई पर ध्यान देकर किसान बेहतर उत्पादन हासिल करने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं.