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Yash Panchal CA Inter Success Story: कोटा के फल विक्रेता के बेटे यश पांचाल ने विपरीत परिस्थितियों से लड़कर सीए इंटरमीडिएट परीक्षा में 600 में से 407 अंक प्राप्त कर कोटा सिटी टॉपर बनने का गौरव हासिल किया है. आर्थिक तंगी के बावजूद नानी के आर्थिक सहयोग और अपनी बड़ी बहन की प्रेरणा से यश ने यह मुकाम हासिल किया. परीक्षा के दौरान बहन के अस्पताल में भर्ती होने जैसे मानसिक दबाव के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और साबित कर दिया कि मजबूत इरादों से हर मुश्किल को हराया जा सकता है.
कोटा: राजस्थान के शिक्षा नगरी कहे जाने वाले कोटा से एक बेहद प्रेरणादायक सफलता की कहानी सामने आई है. जहाँ आर्थिक तंगियों और कठिन परिस्थितियों से मुकाबला करते हुए एक साधारण परिवार के बेटे ने अपनी मेहनत के दम पर इतिहास रच दिया है. फल बेचने वाले पिता और घरों में खाना बनाने वाली मां के बेटे यश पांचाल ने चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) इंटरमीडिएट परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए 600 में से 407 अंक हासिल किए हैं और कोटा सिटी टॉपर बनने का गौरव प्राप्त किया है. उनकी यह सफलता हर उस युवा के लिए एक मिसाल है जो विपरीत परिस्थितियों में भी बड़े सपने देखने का हौसला रखता है.
यश के परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी बिल्कुल नहीं थी कि वे सीए जैसी महंगी और कठिन पढ़ाई का भारी खर्च आसानी से उठा पाते. पिता की फल बेचने से होने वाली सीमित आमदनी और मां के घरेलू काम से मिलने वाले सहयोग से बमुश्किल घर का गुजारा चलता था. ऐसे मुश्किल वक्त में यश की नानी ने उनके सपनों को पंख दिए और उनकी पढ़ाई का पूरा खर्च उठाया. नानी ने न केवल पढ़ाई के लिए सभी जरूरी संसाधन जुटाए, बल्कि उनकी जरूरत के अनुसार लैपटॉप भी उपलब्ध करवाया. माता-पिता के संघर्ष और नानी के सहयोग ने यश को बिना डिगे अपने लक्ष्य की तरफ लगातार आगे बढ़ने की ऊर्जा दी.
बहन से मिली प्रेरणा और परीक्षा के दिन का तनाव
स्कूल के दिनों से ही यश ने सीए बनने का मन बना लिया था. उनकी बड़ी बहन भी कॉमर्स की पढ़ाई कर रही थीं, जिनसे प्रेरित होकर यश ने कॉमर्स स्ट्रीम चुना और सीए की कठिन तैयारी में जुट गए. हालांकि, परीक्षा का दौर यश के लिए आसान नहीं रहा. कॉस्टिंग के महत्वपूर्ण पेपर वाले दिन ही उनकी बहन को खून की कमी (हीमोग्लोबिन की कमी) के कारण अचानक अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. एक तरफ बहन की गंभीर तबीयत की चिंता और दूसरी तरफ महीनों की कड़ी मेहनत का दबाव, ऐसे में मानसिक संतुलन बनाए रखना बेहद कठिन था. इसके बावजूद यश ने हिम्मत नहीं हारी और पूरी दृढ़ता के साथ परीक्षा दी.
कोटा सिटी टॉपर बनने के बाद अब सीए फाइनल की तैयारी
ऑल इंडिया रैंक हासिल करने से भले ही यश पांचाल मात्र 15 से 20 अंकों से चूक गए हों, लेकिन कोटा शहर में पहला स्थान प्राप्त करना उनके और उनके परिवार के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है. वे अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय अपनी नानी, माता-पिता और बहन को देते हैं. अब उनका अगला और मुख्य लक्ष्य सीए फाइनल की परीक्षा में बेहतरीन प्रदर्शन करना और अपने परिवार का नाम रोशन करना है. कोटा ब्रांच के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर सत्र की इस परीक्षा में दोनों ग्रुप का कुल पास प्रतिशत 18.4 फीसदी रहा, जिसमें यश का चमकता सितारा सभी के लिए प्रेरणा बन गया है.