खंडवा. मध्य प्रदेश के खंडवा की पहचान महान गायक और अभिनेता किशोर कुमार की जन्मभूमि के रूप में तो है ही लेकिन शहर की कुछ पुरानी जगहें ऐसी भी हैं, जो उनसे जुड़ी यादों को आज तक सहेजे हुए हैं. खंडवा के सिनेमा चौक पर स्थित करीब 70 साल पुराने शेर पंजाब होटल भी ऐसी ही एक जगह है. होटल के मालिक टीटू अरोरा लोकल 18 को बताते हैं कि किशोर कुमार जब मुंबई से खंडवा आते थे, तो यहां मछली खाने जरूर पहुंचते थे. होटल के संस्थापक भगवान सेठ से उनकी गहरी दोस्ती थी. दोनों की दोस्ती इतनी पुरानी थी कि किशोर कुमार फोन करके कहते थे कि मछली तैयार रखना, वह खाने आ रहे हैं. आज भी होटल में वह कमरा और टेबल मौजूद है, जहां किशोर दा बैठकर खाना खाते थे. उनकी यादों से जुड़ी इस जगह को होटल परिवार ने अब तक संभालकर रखा है.
शेर पंजाब होटल के संचालक टीटू अरोरा लोकल 18 को बताते हैं कि उनके पिता भगवान सेठ और किशोर कुमार के बीच दोस्ती होटल शुरू होने से भी पहले की थी. उनके पिता की एक दुकान किशोर कुमार के घर के सामने थी. भगवान सेठ अक्सर वहां बैठा करते थे. इसी दौरान दोनों की मुलाकातें हुईं और धीरे-धीरे दोस्ती गहरी होती चली गई. टीटू बताते हैं कि वह बचपन से ही किशोर कुमार को देखते आए हैं. किशोर दा उनके पिता से मिलने आते थे और परिवार के लोगों से भी अपनापन रखते थे. वह कहते हैं कि किशोर कुमार उनके पिता के इतने करीबी थे कि घर आने-जाने जैसा ही माहौल रहता था. उस समय किशोर दा देश के बड़े कलाकार जरूर थे लेकिन भगवान सेठ से मिलने आते, तो उनका व्यवहार बिल्कुल सामान्य रहता था. परिवार के लिए वह किसी बड़े सितारे से ज्यादा पिता के खास दोस्त थे.
मछली खाने के शौकीन थे किशोर कुमार
टीटू अरोरा के मुताबिक, किशोर कुमार को मछली बहुत पसंद थी. वह बंगाली परिवार से थे और उनके परिवार में भी मछली खाने का चलन था. वह जब भी खंडवा आते, तो शेर पंजाब होटल में मछली खाने जरूर पहुंचते थे. टीटू बताते हैं कि किशोर दा फोन करके उनके पिता से कहते थे, ‘भगवान सेठ, मछली तैयार रखना, आ रहा हूं.’ उनके छोटे भाई अनूप कुमार भी कई बार पहले फोन करके आने की सूचना देते थे ताकि किशोर कुमार के पहुंचने तक खाना तैयार रखा जा सके. उस दौर में फोन पर ही आने की खबर दी जाती थी. किशोर दा के लिए कौन सी मछली बनाई जाए, इसका ध्यान भी भगवान सेठ खुद रखते थे. टीटू बताते हैं कि उस समय खंडवा में जो मछली आसानी से मिल जाती थी, खासकर सोल या कतला, उसी से उनकी पसंद का खाना तैयार किया जाता था. टीटू के अनुसार, उनके पिता केवल होटल के मालिक नहीं थे बल्कि खुद भी बेहतरीन खाना बनाते थे. उन्हें लोगों को अपने हाथों से बनाकर खिलाने का शौक था. यही स्वाद और अपनापन होटल की पहचान बन गया. किशोर कुमार का यहां आना भी इसी दोस्ती और स्वाद से जुड़ा हुआ था.
किशोर कुमार का खास कमरा
शेर पंजाब होटल की सबसे खास बात यह है कि यहां किशोर कुमार की यादों से जुड़ा कमरा और वह टेबल आज भी मौजूद हैं, जहां बैठकर वह खाना खाते थे. टीटू अरोरा बताते हैं कि इस कमरे को उन्होंने आम इस्तेमाल के लिए नहीं खोला है. इसे खासतौर पर संभालकर रखा गया है और होटल में कोई विशेष अतिथि आता है, तभी उसे वहां बैठाया जाता है. टीटू उस कमरे को दिखाते हुए बताते हैं कि किशोर दा इसी जगह बैठते थे और उनके पिता अपने हाथों से उनके लिए खाना तैयार करते थे. होटल परिवार के लिए यह केवल एक कमरा नहीं बल्कि दोस्ती और परिवार की यादों का हिस्सा है. कई लोग होटल में आते हैं, तो किशोर कुमार से जुड़ी इन बातों को जानने में दिलचस्पी दिखाते हैं. करीब 70 साल पुराने इस होटल में समय के साथ कई बदलाव आए लेकिन किशोर दा से जुड़ी इस याद को परिवार ने जस का तस रखने की कोशिश की है. होटल में आने वाले लोगों के लिए यह जानना खास अनुभव है कि जिस जगह पर वो आज खाना खा रहे हैं, वहां कभी किशोर कुमार भी अपने दोस्तों और परिवार के साथ बैठा करते थे.
पिता की कमाई से पला परिवार
टीटू अरोरा बताते हैं कि उनके पिता भगवान सेठ ने इसी होटल की कमाई से अपने बड़े परिवार का पालन-पोषण किया. उनके परिवार में पांच बेटे और पांच बेटियां थीं. भगवान सेठ ने होटल में मेहनत करके बच्चों को पढ़ाया-लिखाया और परिवार को आगे बढ़ाया. उन्हें गर्व है कि आज भी वह अपने पिता की बनाई पहचान को आगे बढ़ा रहे हैं. उन्हें होटल में काम करते हुए करीब 45 साल हो चुके हैं. पिता से मिले काम और जिम्मेदारी को वह अपनी विरासत मानते हैं. उनके लिए शेर पंजाब होटल केवल कारोबार नहीं बल्कि परिवार की मेहनत, पिता के संघर्ष और किशोर कुमार जैसी शख्सियत से जुड़ी यादों का हिस्सा है. टीटू कहते हैं कि पहले उनके पिता भगवान सेठ के नाम से होटल की पहचान थी और आज भी लोग उन्हें उनके पिता के नाम से जानते हैं. उनके लिए यह गर्व की बात है कि वर्षों बाद भी लोग इस होटल को याद करते हैं और यहां के पुराने स्वाद के बारे में पूछते हैं.
टीटू भी गाने और डांस के शौकीन
टीटू अरोरा खुद भी किशोर कुमार के बड़े प्रशंसक हैं. वह बताते हैं कि बचपन से ही उन्हें गाने और डांस करने का शौक रहा है. किशोर दा को भी उनका यह शौक पसंद था. टीटू के मुताबिक, किशोर कुमार उनके पिता से कहते थे कि वह टीटू को मुंबई ले जाएंगे लेकिन पिता को अपने लाडले बेटे से बहुत लगाव था, इसलिए उन्होंने उसे अपने पास ही रखने का फैसला किया. आज टीटू होटल का काम संभालने के साथ अपने इस शौक को भी जिंदा रखे हुए हैं. वह खुद गाते हैं और डांस भी करते हैं. उनके लिए यह केवल मनोरंजन नहीं बल्कि अपने मन की खुशी है. किशोर कुमार की यादें उनके जीवन से इस तरह जुड़ी हैं कि होटल की हर पुरानी बात उन्हें अपने बचपन और पिता की याद दिलाती है. टीटू बताते हैं कि उनके पिता के हाथों का स्वाद, किशोर दा का होटल आना और उनके साथ बिताए पल परिवार की सबसे खास यादों में शामिल हैं. आज वह उसी होटल को आगे बढ़ा रहे हैं, जहां कभी किशोर कुमार अपने दोस्त भगवान सेठ से मिलने और पसंदीदा मछली खाने आया करते थे.
स्वाद के साथ संभालकर रखी अनमोल याद
शेर पंजाब होटल की कहानी सिर्फ एक पुराने खानपान के ठिकाने की कहानी नहीं है, यह दोस्ती, परिवार की मेहनत और एक महान कलाकार से जुड़ी यादों की कहानी भी है. भगवान सेठ ने अपने हुनर और मेहनत से इस होटल को पहचान दिलाई. किशोर कुमार के साथ उनकी दोस्ती ने इस जगह को एक खास किस्सा भी दिया, जिसे आज उनके बेटे टीटू अरोरा आगे बढ़ा रहे हैं.
खंडवा आने वाले किशोर कुमार के प्रशंसकों के लिए यह जानना दिलचस्प है कि शहर के एक पुराने होटल में आज भी उनकी पसंद, उनके बैठने की जगह और उनके परिवार से जुड़ी यादें मौजूद हैं. होटल की उस टेबल और कमरे को संभालकर रखना टीटू अरोरा के लिए अपने पिता और किशोर दा, दोनों को याद करने का एक तरीका है. शेर पंजाब होटल आज भी उसी विरासत के साथ चल रहा है, जहां कभी किशोर कुमार दोस्ती के लिए आते थे और भगवान सेठ के हाथों की बनी मछली का स्वाद लेते थे.