सहारनपुर: 191 देशों की साइकिल यात्रा पूरी करने के बाद सोमेन देबनाथ अब भारत भ्रमण पर हैं. साइकिल यात्री सोमेन देबनाथ पश्चिम बंगाल के सुंदरबन के रहने वाले हैं. बृहस्पतिवार को उनका सफर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर पहुंचा. उन्होंने अपनी रोमांचक विश्व यात्रा के अनुभव को साझा किया.
24 साल की उम्र में शुरुआत, 2 लाख किमी का सफर
सोमेन देबनाथ बताते हैं कि 24 साल की उम्र में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने विश्व यात्रा शुरू की थी. करीब 19 साल तक चले इस सफर में उन्होंने सातों महाद्वीपों के 191 देशों की यात्रा करते हुए करीब 2 लाख किलोमीटर की दूरी साइकिल से तय की. सोमेन देबनाथ ने कहा कि यात्रा सिर्फ दुनिया घूमने का अभियान नहीं थी, बल्कि सामाजिक जागरूकता, मानव सेवा, पर्यावरण संरक्षण और भारतीय संस्कृति व सद्भाव का संदेश देने का प्रयास भी थी.
उल्फा और तालिबान की कैद, अंटार्कटिका से लेकर कोविड तक का मुकाबला
यात्रा के दौरान सोमेन को असम में उल्फा उग्रवादियों ने 5 दिन तक बंधक बनाए रखा. जबकि अफगानिस्तान के काबुल से हेरात जाते समय तालिबान ने सोमेन को जासूस समझकर 24 दिनों तक कैद रखा. सोमेन देबनाथ ने अंटार्कटिका की बर्फीली सतह पर भी साइकिल चलाई. इतना ही नहीं, साल 2020 में चीन में यात्रा के दौरान सोमेन कोविड से संक्रमित हुए और वहां से जिंदगी की जंग जीतकर आगे बढ़े.
10 भाषाएं सीखीं और पार किए महाद्वीप
उन्होंने बताया कि 191 देशों की यात्रा के दौरान उन्होंने लगभग 10 देशों की भाषाओं को भी सीखा. इस यात्रा के दौरान उन्होंने अफ्रीका के 52 देश, मिडिल ईस्ट के 10 देश, साउथ अमेरिका के 13 देश, सेंट्रल अमेरिका के 8 देश, कैरेबियन के 8 देश और नॉर्थ अमेरिका में यूएसए, कनाडा होते हुए मंगोलिया, चीन, जापान, कोरिया, न्यूजीलैंड, स्विट्जरलैंड, आइसलैंड, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, म्यांमार और बांग्लादेश होते हुए भारत पहुंचे.
‘पूरी दुनिया एक परिवार है’
सोमेन ने बताया कि सभी देशों से मुझे बहुत प्यार मिला है, बस कुछ देशों में मेरे साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया गया, बाकी पूरी दुनिया को घूम कर अच्छा एहसास हो रहा है. इस यात्रा के दौरान ही मेरे पिताजी का देहांत हो गया और मैं उनसे भी नहीं मिल पाया, मैं घर आकर अपनी माता से मिला. दो भाई हैं उनका परिवार भी बड़ा हो गया. घर के सभी लोगों का प्यार मुझे मिला था तभी जाकर पूरे विश्व को मैंने घूम लिया और पूरी दुनिया एक परिवार है.