झुंझुनूं. धार्मिक आयोजनों में आस्था का सैलाब उमड़ता है, हजारों लोगों के लिए भोजन बनता है और भंडारे के बाद अक्सर डिस्पोजल प्लेट, कटोरी और गिलास का ढेर लग जाता है. लेकिन झुंझुनूं के ऐतिहासिक चंचलनाथ टीले पर इस परंपरा का एक अलग ही रूप देखने को मिला. यहां ब्रह्मलीन संत शिवनाथ महाराज की 74वीं पुण्यतिथि पर शिव महोत्सव के तहत आयोजित विशाल भंडारे में करीब 5000 श्रद्धालुओं ने स्टील की थाली, कटोरी और गिलास में प्रसाद ग्रहण किया. आयोजन में प्लास्टिक के डिस्पोजल बर्तनों का इस्तेमाल नहीं किया गया. पीठाधीश्वर ओमनाथ महाराज की प्रेरणा से शुरू हुई यह पहल बताती है कि धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं.
चंचलनाथ टीले पर प्लास्टिक मुक्त भंडारे की व्यवस्था एक दिन का प्रयोग नहीं, बल्कि पिछले दो वर्षों से जारी प्रयास है. बड़े आयोजनों में डिस्पोजल बर्तनों के कारण पैदा होने वाले कचरे को कम करने के उद्देश्य से आश्रम में श्रद्धालुओं की संख्या के अनुरूप स्टील की थालियां, कटोरियां और गिलास मंगवाए गए. अब भंडारे में इन्हीं बर्तनों में प्रसाद परोसा जाता है. इससे एक ओर प्लास्टिक कचरे को रोकने में मदद मिलती है, वहीं दूसरी ओर श्रद्धालुओं के बीच पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी पहुंचता है.
5000 श्रद्धालुओं की व्यवस्था, फिर भी प्लास्टिक से दूरी
आमतौर पर बड़े धार्मिक आयोजनों में कम समय में हजारों लोगों को भोजन कराने के लिए डिस्पोजल बर्तनों का इस्तेमाल आसान विकल्प माना जाता है. लेकिन इनके उपयोग से आयोजन के बाद कचरे की समस्या बढ़ जाती है. प्लास्टिक लंबे समय तक पर्यावरण में बना रह सकता है और इसका अनुचित निस्तारण मिट्टी, जल तथा आसपास के वातावरण को प्रभावित कर सकता है. चंचलनाथ टीले पर स्टील के बर्तनों को अपनाकर इस समस्या का व्यावहारिक विकल्प सामने रखा गया है. करीब 5000 श्रद्धालुओं के भंडारे में एक जैसी व्यवस्था बनाए रखना बताता है कि इच्छाशक्ति और पूर्व तैयारी हो, तो बड़े आयोजन भी प्लास्टिक के डिस्पोजल बर्तनों के बिना किए जा सकते हैं. स्टील के बर्तनों को साफ करके दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे एक बार उपयोग होने वाले बर्तनों पर निर्भरता घटती है.
दो साल पहले ओमनाथ महाराज ने शुरू की पहल
चंचलनाथ टीले के पीठाधीश्वर ओमनाथ महाराज की प्रेरणा से करीब दो साल पहले प्लास्टिक के डिस्पोजल बर्तनों का उपयोग बंद करने की दिशा में कदम उठाया गया. इसके लिए आश्रम में पर्याप्त संख्या में स्टील की थालियां, कटोरियां और गिलास मंगवाए गए, ताकि भंडारे में आने वाले श्रद्धालुओं को प्रसाद ग्रहण करने में परेशानी न हो. इस व्यवस्था की खासियत यह है कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आयोजन की कार्यप्रणाली में भी दिखाई देता है. श्रद्धालु जब स्टील के बर्तनों में प्रसाद ग्रहण करते हैं, तो उन्हें भी यह समझने का अवसर मिलता है कि छोटे-छोटे बदलावों से कचरा कम करने में योगदान दिया जा सकता है. धार्मिक स्थलों पर होने वाले आयोजनों में इस तरह की व्यवस्था अपनाई जाए, तो इसका संदेश बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच सकता है.
संतों ने की पहल की सराहना, प्लास्टिक का उपयोग कम करने की अपील
शिव महोत्सव में शामिल दादूद्वारा बगड़ के महामंडलेश्वर डॉ. अर्जुनदास महाराज ने कहा कि चंचलनाथ टीला झुंझुनूं की प्राचीन धार्मिक पीठ है. यहां शिवनाथ महाराज की 74वीं पुण्यतिथि पर आयोजित भंडारे में प्लास्टिक मुक्त व्यवस्था अपनाना सराहनीय है. उन्होंने कहा कि देशभर में प्लास्टिक मुक्त भारत और स्वच्छता को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं. ऐसे में धार्मिक संस्थानों और सामाजिक आयोजनों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है. उन्होंने लोगों से प्लास्टिक का उपयोग कम करने, पर्यावरण के अनुकूल विकल्प अपनाने और स्वच्छ भारत अभियान को मजबूत बनाने का आह्वान किया. उनके अनुसार, समाज में जागरूकता बढ़ाने के लिए जरूरी है कि लोग केवल पर्यावरण संरक्षण की बात न करें, बल्कि अपने दैनिक जीवन और सामूहिक आयोजनों में भी इसका पालन करें.
हर साल पुण्यतिथि पर होता है विशाल भंडारा
आयोजन समिति के सेवा सहयोगी उमाशंकर महमिया ने बताया कि ब्रह्मलीन संत शिवनाथ महाराज की पुण्यतिथि पर प्रतिवर्ष विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है. पिछले दो वर्षों से पीठाधीश्वर ओमनाथ महाराज की प्रेरणा से इस आयोजन में स्टील के बर्तनों का उपयोग कर प्लास्टिक मुक्त व्यवस्था का संदेश दिया जा रहा है. उन्होंने बताया कि इस पहल का उद्देश्य श्रद्धालुओं को प्रसाद ग्रहण कराने के साथ समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है. धार्मिक आयोजनों में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं, इसलिए यहां अपनाई गई अच्छी व्यवस्था का प्रभाव दूर तक जा सकता है. यदि दूसरे धार्मिक स्थल भी अपनी सुविधाओं के अनुसार ऐसे विकल्प अपनाएं, तो एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक के बर्तनों से बनने वाले कचरे को कम करने में मदद मिल सकती है.
सांप्रदायिक सौहार्द के साथ सामाजिक सरोकार की पहचान
चंचलनाथ टीला धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सद्भाव और सांप्रदायिक सौहार्द की पहचान भी रखता है. शिवनाथ महाराज की पुण्यतिथि पर आयोजित शिव महोत्सव में संतों और श्रद्धालुओं की भागीदारी ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया. इस बार प्लास्टिक मुक्त भंडारे की व्यवस्था ने आयोजन को पर्यावरण संरक्षण से भी जोड़ दिया. कार्यक्रम में विजयनाथ महाराज, निरंजननाथ महाराज, अभयनाथ महाराज, राजनाथ महाराज, गणपतनाथ महाराज, नीरज जांगिड़, दीपक जांगिड़, डिंपल जांगिड़, सुभाष खाजपुरिया, महेश टाइपिस्ट, विनोद पुरोहित, ताराचंद सैनी, रामू फोटोग्राफर, फूलाराम सैनी और विमल सैनी सहित शेखावाटी क्षेत्र से बड़ी संख्या में संत एवं श्रद्धालु मौजूद रहे.