बिजली सेक्टर की दो दिग्गज कंपनियां होंगी एक! PFC-REC के विलय पर बड़ा अपडेट

बिजली सेक्टर की दो दिग्गज कंपनियां होंगी एक! PFC-REC के विलय पर बड़ा अपडेट


Last Updated:

सरकार दो बड़ी कंपन‍ियों के व‍िलय पर व‍िचार कर रही है. PFC और REC के विलय का प्रस्ताव वित्त मंत्रालय पहुंच गया है. वित्त मंत्री की मंजूरी के बाद इसे केंद्रीय कैबिनेट के सामने रखा जाएगा. सरकार प्रेफरेंस शेयर के जरिए विलय के बाद कम से कम 51 फीसदी हिस्सेदारी बनाए रखने पर विचार कर रही है.

Zoom

PFC REC मर्जर की सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है.

बिजली के कारोबार में पैसा लगाने वाली दो सरकारी कंपनियां अब एक होने की ओर बढ़ रही हैं. पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) और REC लिमिटेड के विलय की फाइल वित्त मंत्रालय के पास पहुंच चुकी है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की मंजूरी मिलने के बाद इसे केंद्रीय कैबिनेट के सामने रखा जाएगा. इस विलय से करीब 12 लाख करोड़ रुपये के कर्ज पोर्टफोलियो वाली बड़ी सरकारी वित्तीय कंपनी बनाने की तैयारी है.

Moneycontrol की रिपोर्ट के मुताबिक, बिजली सचिव पंकज अग्रवाल ने बताया कि दोनों कंपनियों के विलय का प्रस्ताव वित्त मंत्रालय को भेज दिया गया है. सरकार की योजना इसे 1 अप्रैल 2027 से प्रभावी करने की है. हालांकि, इसके लिए अभी कैबिनेट और दूसरी जरूरी मंजूरियां मिलना बाकी हैं.

सरकार 51% हिस्सेदारी कैसे बचाएगी?

इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल है कि विलय के बाद सरकार की हिस्सेदारी कम से कम 51 फीसदी कैसे बनी रहेगी. इसके लिए अब सरकार प्रेफरेंस शेयर जारी करने के विकल्प पर विचार कर रही है. पहले रिकैपिटलाइजेशन बॉन्ड और नए इक्विटी शेयर जारी करने जैसे विकल्पों पर भी चर्चा हुई थी. लेकिन प्रेफरेंस शेयर के जरिए सरकार अपनी न्यूनतम हिस्सेदारी बनाए रखने की कोशिश कर रही है.

प्रेफरेंस शेयर सामान्य इक्विटी शेयर से अलग होते हैं. इनके साथ लाभांश और पूंजी लौटाने के मामले में कुछ प्राथमिकताएं जुड़ी हो सकती हैं. इनकी वास्तविक लागत और शर्तें इस बात पर निर्भर करेंगी कि सरकार इन्हें किस ढांचे में जारी करती है. पंकज अग्रवाल ने प्रेफरेंस कैपिटल की अंतिम रकम नहीं बताई. हालांकि, पिछली रिपोर्टों में इसके लिए करीब 800 करोड़ रुपये की संभावित राशि का अनुमान दिया गया था. इसे अभी अंतिम सरकारी खर्च नहीं माना जा सकता.

PFC और REC का विलय क्यों हो रहा है?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में दोनों सरकारी कंपनियों के पुनर्गठन की योजना का ऐलान किया था. मकसद बिजली क्षेत्र को ज्यादा बड़े पैमाने पर कर्ज उपलब्ध कराने वाली वित्तीय संस्था तैयार करना है.

बिजली बनाने के लिए पावर प्लांट चाहिए. बिजली को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए ट्रांसमिशन लाइनें चाहिए. फिर घरों और फैक्ट्रियों तक बिजली पहुंचाने के लिए वितरण नेटवर्क की जरूरत पड़ती है. इन सब पर भारी निवेश होता है. PFC और REC इसी तरह की परियोजनाओं को कर्ज देने का काम करती हैं. दोनों कंपनियां एक हो जाती हैं, तो उनके संसाधनों और कर्ज देने की क्षमता को एक बड़े मंच पर लाने का अवसर मिलेगा.



Source link