उर्मिला सनावर वाकई मुश्किल में फंस गई है.. एक के बाद एक दर्जन भर केस दर्ज, किस केस में हरिद्वार जेल गई

उर्मिला सनावर वाकई मुश्किल में फंस गई है.. एक के बाद एक दर्जन भर केस दर्ज, किस केस में हरिद्वार जेल गई


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Ankita Bhandari – Urmila Sanawar News: अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की पहचान और जांच को लेकर उठ रहे सवालों के बीच उर्मिला सनावर के बयान लगातार चर्चा में हैं… अब एक और प्राथमिकी दर्ज होने से उनकी कानूनी मुश्किलें बढ़ सकती हैं. हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना आरोप सिद्ध होने के बराबर नहीं है. मामले में अंतिम स्थिति पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी.

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उर्मिला सनावर के खिलाफ कई केस दर्ज..

देहरादून : अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी के मुद्दे को लेकर चर्चाओं में आईं उर्मिला सनावर की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. सोशल मीडिया पर दिए गए बयानों और वीडियो को लेकर उनके खिलाफ लगातार कानूनी कार्रवाई हो रही है. अब देहरादून कोतवाली नगर में एक और मुकदमा दर्ज हुआ है, जिसे देखते हुए करीब 1 दर्जन मुकदमे अभी तक उर्मिला सनावर पर दर्ज हुए हैं. इसमें एक मुकदमे में उनको हरिद्वार पुलिस ने रविवार को जेल भेज दिया है. इसमें उर्मिला सनावर पर 5 करोड़ की रंगदारी और रविदास धाम की जमीन को अपने नाम करवाने का दबाव बनाए जाने का आरोप है. यह शिकायत पूर्व विधायक सुरेश राठौड़, जिनसे उनका लगातार विवाद चल रहा है, उनकी ही बेटी दीपिका राठौड़ ने पुलिस को दी थी.

वहीं देहरादून की शहर कोतवाली में भी एक मौका दर्ज हुआ है. ताजा मामला सिक्किम के राज्यपाल दुष्यंत कुमार गौतम, भाजपा के राष्ट्रीय संगठन से जुड़े बीएल संतोष और आरती गौड़ के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित तौर पर आपत्तिजनक और मानहानिकारक बयान प्रसारित करने से जुड़ा है… जिसमें मोती बाजार निवासी सागर जो हिंदू रक्षा दल से जुड़े है उनकी शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है..

सीबीआई कोर्ट के बाहर के वीडियो को लेकर शिकायत
शिकायत के अनुसार, हरिद्वार रोड स्थित सीबीआई कोर्ट के बाहर का एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो रहा है. आरोप है कि वीडियो में उर्मिला सनावर मीडिया के कैमरों और माइक के सामने सिक्किम के राज्यपाल दुष्यंत कुमार गौतम, बीएल संतोष और आरती गौड़ के खिलाफ व्यक्तिगत आरोप लगाती दिखाई दे रही हैं.

शिकायतकर्ता का कहना है कि संबंधित बयानों के समर्थन में कोई न्यायिक आदेश या प्रमाण सामने नहीं रखा गया. ऐसे में कथित टिप्पणियों से संबंधित व्यक्तियों की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने के साथ ही समाज में भ्रम, आक्रोश और वैमनस्य फैलने की आशंका है.

चार धाराओं में केस, वीडियो प्रसारित करने वालों की भी जांच
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 79, 352, 353 और 356 के तहत प्राथमिकी दर्ज की है. थाना प्रभारी निरीक्षक कैलाश चंद्र भट्ट के निर्देश पर मामले की जांच उपनिरीक्षक राकेश रावत को सौंपी गई है. पुलिस अब वीडियो की सामग्री, उसके सोशल मीडिया पर प्रसार और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है. जांच में यह भी देखा जाएगा कि वीडियो किस संदर्भ में बनाया गया और उसमें प्रसारित बयानों की प्रकृति क्या है.



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